हैदराबाद/रायपुर: बस्तर के सुदूर पहाड़ों और गांवों से हैदराबाद की ओर रुख करने वाले 184 युवा धावकों में से कई के लिए इस मैराथन की शुरुआती रेखा तक पहुँचने का सफर बिना शूज़ के शुरू हुआ था।

उचित खेल सुविधाओं और धावन उपकरणों के अभाव में इनमें से कई युवाओं ने बैलाडिला की कठिन पहाड़ियों और ग्रामीण रास्तों पर नंगे पैर अभ्यास किया है। आगामी 30 अगस्त को वे एक बिल्कुल भिन्न परिवेश में होंगे—जहाँ वे देश की एक प्रमुख शहरी मैराथन में हज़ारों अन्य प्रतिभागियों के साथ दौड़ेंगे।

मुख्यतः आदिवासी समुदायों से आने वाले ये रनर  बैलाडिला, सुकमा, बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और जगदलपुर जैसे सुदूर क्षेत्रों से चुने गए हैं। इनमें से 184 धावकों के लिए एनएमडीसी हैदराबाद मैराथन का यह 15वां संस्करण किसी बड़े पैमाने की शहरी मैराथन में प्रतिस्पर्धा करने का पहला अवसर होगा। इस दल में छह महिला धावक भी शामिल हैं।

इनकी हैदराबाद यात्रा में एनएमडीसी द्वारा पूर्ण सहयोग प्रदान किया गया है। संगठन  ने उनके प्रशिक्षण को प्रायोजित करने के साथ-साथ उन्हें रनिंग शूज़, किट एवं अन्य आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराई हैं, तथा उनके रहने और परिवहन की भी समुचित व्यवस्था की है।

उनके लिए तैयारियाँ काफी गहन रूप से की जा  रही हैं। 17 अगस्त से धावकों   के विभिन्न समूह प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिनमें किरंदुल और बचेली के आसपास की पहाड़ियों पर अभ्यास करने वाले युवा भी शामिल हैं।

प्रतिभागियों को प्रशिक्षित कर रहे विवेक ने बताया, “ये युवा विभिन्न सुदूर क्षेत्रों से आते हैं और 17 अगस्त से लगातार प्रशिक्षण ले रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि इस समूह में भिन्न-भिन्न अनुभव स्तर वाले धावक  शामिल हैं।

हालाँकि, प्रशिक्षकों का ध्यान विशेष रूप से इस बात पर केंद्रित हुआ है कि पहली बार मैराथन में भाग ले रहे इनमें से कुछ धावकों में इस दौड़ से आगे बढ़ने की अपार क्षमता है।

विवेक ने कहा कि यदि इन युवा धावकों को निरंतर कोचिंग और प्रतिस्पर्धी आयोजनों का अधिक अवसर मिले, तो इनमें से कुछ में पेशेवर एथलीट के रूप में विकसित होने की बड़ी संभावना है।

यह अवसर इस दल के लिए हैदराबाद मैराथन को केवल एक दौड़ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। यह देश के मुख्यधारा के खेल ढांचे से दूर विकसित हुई युवा खेल प्रतिभा को प्रदर्शित करने और उसकी पहचान करने का एक सशक्त मंच भी है।

एनएमडीसी हैदराबाद मैराथन के रेस डायरेक्टर राजेश वेच्चा ने कहा, “हैदराबाद मैराथन का उद्देश्य हमेशा दौड़ने के साझा अनुभव के माध्यम से लोगों को जोड़ना रहा है। मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि इस वर्ष एनएमडीसी बस्तर के सुदूर और आदिवासी क्षेत्रों से युवा धावकों को देश भर के हज़ारों धावकों के साथ अपनी जगह बनाने के लिए ला रहा है, जो इसे विशेष रूप से अर्थपूर्ण बनाता है। इनमें से कई युवाओं के लिए बड़े पैमाने के प्रतिस्पर्धी आयोजन का यह पहला अनुभव है। हमें उम्मीद है कि यह मैराथन उन्हें आत्मविश्वास, अनुभव और एक ऐसा मंच प्रदान करेगी जहाँ वे अपनी एथलेटिक क्षमता को पहचान सकें।”

ये 184 धावक मैराथन की विभिन्न श्रेणियों में पंजीकृत कुल 32,000 प्रतिभागियों का हिस्सा होंगे। पेशेवर अनुभव वाले धावकों का एक छोटा समूह 42.2 किलोमीटर की फुल मैराथन और 21.1 किलोमीटर की हाफ मैराथन में भाग लेगा। 184 धावकों में से अधिकांश 10 किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लेंगे, जबकि शुरुआती धावकों के लिए 5 किलोमीटर की दौड़ भी आयोजित की जाएगी।

इस आयोजन का विशाल पैमाना उस वातावरण से बिल्कुल भिन्न होगा जिसमें बस्तर के इन धावकों ने तैयारी की है। बैलाडिला की पहाड़ियों ने उनके प्रशिक्षण स्थल के रूप में काम किया, जहाँ की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों ने उनके सहनशीलता और स्टैमिना को बढ़ाने में सहायता की।

कई युवाओं के लिए यह बदलाव प्रत्यक्ष और परिवर्तनकारी रहा है। जो धावक कभी नंगे पैर अभ्यास करते थे, वे अब संगठित लॉजिस्टिक सहायता, उचित रनिंग शूज़ और किट से लैस होकर एक प्रमुख शहरी मैराथन में भाग ले रहे हैं।

मैराथन में विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं के लिए ₹45 लाख का भारी-भरकम पुरस्कार कोष रखा गया है। लेकिन बस्तर के दल के लिए तात्कालिक पुरस्कार एक राष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धा करने और अपने पूर्व अनुभवों की तुलना में कई गुना बड़े जनसमूह के बीच स्वयं को परखने का अवसर होगा।

छह महिला धावकों के लिए भी 30 अगस्त की यह दौड़ संगठित प्रतिस्पर्धी मैराथन की दुनिया में एक महत्वपूर्ण पहला कदम है।

एनएमडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री अमिताभ मुखर्जी ने कहा, “एनएमडीसी के लिए हैदराबाद मैराथन का अर्थ  सिर्फ दौड़ने से कहीं अधिक सुअवसर पैदा करने से है। बस्तर के सुदूर और आदिवासी समुदायों के युवा धावकों को अपने गांव की पगडंडियों पर नंगे पैर अभ्यास करने से लेकर एक प्रमुख राष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धा करते देखना अत्यंत उत्साहजनक है। हमें उम्मीद है कि यह अनुभव उन्हें बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देगा, साथ ही हमें जमीनी स्तर से खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें तराशने में मदद करेगा।”

उनकी श्रेणी के अनुसार आगे की दूरी 42.2 किमी, 21.1 किमी या 10 किमी हो सकती है। लेकिन इन धावकों को हैदराबाद तक लाने वाली यात्रा ने पहले ही उससे कहीं अधिक दूरी तय कर ली है—बस्तर के सुदूर गांवों और नंगे पैर प्रशिक्षण के रास्तों से लेकर 32,000 धावकों वाले आयोजन की शुरुआती रेखा तक।

और प्रशिक्षकों का मानना है कि इन 184 धावकों में कुछ ऐसे भी हैं जो अभी केवल यह महसूस करने की शुरुआत कर रहे हैं कि वे कितनी दूर तक दौड़ सकते हैं।

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