प्रदेश में मुख्यमंत्री साइकिल योजना के तहत खरीदी गईं 10,000 साइकिलें जंग खा रही हैं। इन्हें छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने 2017 में खरीदा था, जो श्रमिकों को बंटनी थीं। ये अलग-अलग बहाने बनाकर बांटी ही नहीं गईं। इस बारे में भास्कर ने पड़ताल की। दरअसल, खरीदी के साथ ही विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई। वितरण रोक दिया गया। कांग्रेस सत्ता में आई और मार्च 2020 में कोरोना लॉकडाउन के चलते वितरण नहीं हुआ। तब से साइकिलें धूल खा रही हैं। पता लगा कि रायपुर के महादेव घाट स्थित एक बंद पड़े 2 मंजिला मकान में साइकिलें डंप हैं। जानकारी मिलने पर भास्कर की टीम वहां पहुंची। ग्राउंड से लेकर फर्स्ट फ्लोर के हर कमरे में साइकिलें मिलीं। मकान में नगर निगम की आईडी प्लेट RPR568D00096 लगी है। यह मकान देव सिंह साहू के नाम पर है। मकान का हाल देखकर लगा कि 5-7 साल से इसका ताला नहीं खुला। पता चला है कि साल 2017 में जब 20 हजार साइकिलें खरीदी गईं, तब बजट 10 करोड़ था। प्रति साइकिल 3075 रुपए की थी। भास्कर ने रायपुर के महादेव घाट स्थित मकान में डंप 500+ साइकिलें खोज निकालीं 1. महादेव घाट स्थित इस घर में सैंकड़ों साइकिलें एक के ऊपर एक रखीं कबाड़ की स्थिति में हैं जिसमें इसमें मुख्यमंत्री साइकिल योजना लिखा है। 2. वह मकान जहां साइकिलें रखी गई हैं। 3. नगर निगम की प्रॉपर्टी आईडी। 4. प्रॉपर्टी आईडी को स्कैन करने पर मकान मालिक का नाम। 2 मंडल, एक योजना योजना- मुख्यमंत्री साइकिल योजना। श्रम विभाग द्वारा संचालित। 2 मंडल। पहला- छत्तीसगढ़ भवन, अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल। दूसरा- असंगठित कर्मकार मंडल। योजना शुरू- 1 अक्टूबर 2010 किसके लिए- पुरुष-महिला श्रमिक। असंगठित कर्मकार मंडल के तहत 6 श्रेणी में अखबार वितरक, चरवाहा, दुग्धवाले, कोटवार व घरेलु कामगारों सहित इनके पुत्र और पुत्रियों को भी। कितनी साइकिलें बांटी 1.12 लाख साइकिलें बांटी 2010 में शुरू होने के बाद से 2017 तक। कांग्रेस सरकार ने 2018 से डीबीटी सिस्टम लागू किया था। इसके तहत पात्र श्रमिक कामगारों को साइकिल के लिए 3700 रुपए दिए जा रहे हैं। साइकिलों के बारे में सभी जिलों से जानकारी मांगी है। अगर, ये रिपेयर योग्य होंगी तो रिपेयर करवाकर आवेदकों को वितरित करेंगे।- गिरीश रामटेके, सचिव, छत्तीसगढ़ संनिर्माण कर्मकार मंडल
10 हजार साइकिलें खा रही जंग:आचार संहिता, कोरोना लॉकडाउन, फिर डीबीटी सिस्टम लागू होने का बहाना बना साइकिलें नहीं बांटी

















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