बस्तर संभाग में पिछले तीन दिनों से मूसलाधार बारिश हो रही। कई गांवों का संपर्क उनके जिला मुख्यालयों से टूट चुका है। वायुसेना भी रेस्क्यू काम में जुटी रही। मुख्यमंत्री भी अपनी विदेश यात्रा के बीच बस्तर के हालात पर चिंता जताई हैं। पिछले 24 घंटों की बात करें तो बस्तर संभाग के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई। जिसमें सुकमा में 210 MM, बास्तानार में 200 MM और लोहांडीगुड़ा में 190 MM वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग की माने तो बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया के प्रभाव से दक्षिण छत्तीसगढ़ में अगले दो दिनों तक भारी बारिश हो सकती है। आज, गुरुवार को भी कोंडागांव और कांकेर जिले में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी है। वहीं बीजापुर, नारायणपुर, राजनांदगांव, बालोद, दुर्ग, रायपुर, मुंगेली, बिलासपुर सहित 13 जिलों में बादल गरजने, बिजली गिरने और आंधी चलने का यलो अलर्ट जारी किया है। पहले ये 3 तस्वीरें देखिए… वायुसेना का रेस्क्यू अभियान, बस्तर में अब 68 को बचाया गया इससे पहले इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण मांदर गांव में घर की छत पर फंसे 6 लोगों को वायुसेना ने हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा SDRF और अन्य बचाव दल ने मिलकर 68 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया है। नाले में बही कार, पति-पत्नी और 2 बच्चों की मौत NH-30 जगदलपुर-सुकमा मार्ग पर दरभा घाटी के पास उफनते नाले को पार करने के दौरान एक कार बह गई। हादसे में तमिलनाडु से बस्तर घूमने आए परिवार में पति-पत्नी और दो बच्चों की मौत हो गई। ड्राइवर ने तैरकर जान बचाई। SDRF की टीम ने कार में फंसे शवों को बाहर निकाला। सभी शवों को जगदलपुर मेडिकल कॉलेज भेजकर पोस्टमॉर्टम किया गया। पिछले 24 घंटे में हुई बारिश बस्तर में बारिश की और भी तस्वीरें देखिए… बलरामपुर में सबसे ज्यादा पानी बरसा बेमेतरा जिले में अब तक 423.7 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से -48% कम है। महासमुंद (-20%) जिले में वर्षा सामान्य से काफी कम रही है, जिन्हें ‘क्षेत्र में वर्षा की कमी’ वाले क्षेत्रों में रखा गया है। सरगुजा जिले में भी 27% वर्षा की कमी दर्ज की गई है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, बेमेतरा, जगदलपुर में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। वहीं, बलरामपुर जिले में 1257.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 69% अधिक है। जांजगीर जिले में भी 24% अधिक बारिश हुई है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी
बस्तर में 2 दिन भारी बारिश…अब तक 4 की मौत:कई गांवों का संपर्क जिला-मुख्यालय से टूटा, 13 जिलों में यलो-अलर्ट, आंधी चलेगी; बिजली गिरेगी

















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