दुर्ग में एनीकट से 2 नाबालिग बहे…1 शव मिला:दूसरे की तलाश जारी, सरगुजा में बिजली गिरने से 3 की मौत;आज 28 जिलों में अलर्ट

छत्तीसगढ़ में फिर से बारिश का दौर शुरू हो गया है। रायपुर में देर रात से बूंदाबांदी हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिन पूरे प्रदेश में मानसून की एक्टिविटी तेज रहेगी। इससे पहले गुरुवार को सरगुजा में अलग-अलग जगहों पर बिजली गिरने से 3 लोगों की मौत हो गई। वहीं दुर्ग जिले के जमराव एनीकट में 2 नाबालिग बह गए। एक का शव बरामद कर लिया गया है। दूसरे की तलाश जारी है। इस बीच मौसम विभाग ने आज बस्तर संभाग के बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर और सुकमा में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। रायपुर-दुर्ग, बिलासपुर समेत 24 जिलों में बारिश और बिजली गिरने का यलो अलर्ट है। बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया बन रहा है। जिसके असर से बारिश की स्थिति बन रही है। 25 और 26 जुलाई को मध्य और उत्तरी क्षेत्र में भारी बारिश हो सकती है। 23 दिनों में 300 मिलीमीटर पानी बरसा छत्तीसगढ़ में इस महीने यानी 23 दिनों में अब तक 300 MM तक बारिश हो चुकी है। इसमें में 198.2 MM यानी करीब 70% बारिश 01 जुलाई से 11 जुलाई के बीच हुई है। इसके बाद 12 से 23 जुलाई के बीच इस महीने केवल 30% प्रतिशत पानी बरसा है। पिछले 24 घंटे की बात करें तो प्रदेश में एवरेज 12.1 MM बारिश ही हुई है, जो सामान्य वर्षा है। तापमान की बात की जाए तो 34.2 डिग्री के साथ सबसे गर्म बिलासपुर रहा। सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री दुर्ग में रिकॉर्ड किया गया। रायपुर के DEO ऑफिस कैंपस में भरा पानी इससे पहले रायपुर में दोपहर के बाद अचानक मौसम बदला और तेज बारिश होने से कई इलाकों में जलभराव हो गया। रायपुर के DEO ऑफिस कैंपस में भी पानी भर गया। जिसके कारण यहां तक आने-जाने में लोगों को दिक्कतें हुईं। रायगढ़ में भी दोपहर साढ़े 3 बजे के बाद गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 462.9 मिमी औसत वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है। अब तक बलरामपुर जिले में सबसे ज्यादा 753.3 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 248.1 मिमी बारिश हुई है। लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियमित समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ

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