3 दिन भारी बारिश, 5 जिलों में यलो अलर्ट:नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा जिले भीगेंगे, बाकी जगह बिजली गिरेगी, बौछारें पड़ेंगी, रायपुर में बादल छाए

छत्तीसगढ़ में आज बस्तर, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। बाकी जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, बिजली गिर सकती है। रायपुर समेत कई जिलों में सुबह से बादल छाए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले 3 दिनों में पूरे प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है। कई जगहों पर मध्यम से भारी बारिश के आसार हैं। बस्तर संभाग के जिलों में बाढ़ और बारिश की वजह से अब भी कई लोग प्रभावित हैं। तापमान की बात करें तो पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक तापमान 33.2 डिग्री दुर्ग का रहा है। वहीं सबसे कम तापमान 22.0 डिग्री पेण्ड्रा रोड में दर्ज किया गया। मौजूदा मौसमी सिस्टम बस्तर में 200 से ज्यादा घर ढहे बस्तर संभाग में पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश के बाद चार जिलों दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर में बाढ़ से 200 से ज्यादा मकान ढह गए। 2196 लोग राहत शिविर में शिफ्ट किए गए। इन्हें स्कूल, इंडोर स्टेडियम, आश्रम जैसे जगहों पर ठहराया गया है। अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। अब बाढ़ के बाद की तस्वीरें भी सामने आई हैं। बारसूर में स्टेट हाईवे 5 पर पुल टूट गया है, टूटे पुल पर अब सीढ़ी बांधकर ग्रामीण आना जाना कर रहे हैं। बता दें कि नारायणपुर, बस्तर, बीजापुर के 55 से 60 गांवों के ग्रामीण अपनी रोजमर्रा के सामानों के लिए बारसूर साप्ताहिक बाजार पहुंचते हैं। दंतेवाड़ा में 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान दंतेवाड़ा नगर समेत आस-पास के गांवों में कुल करीब 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है। दंतेवाड़ा में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इससे शंखनी-डंकनी नदी का पानी नहीं बह पाया और आसपास के गांवों में भारी तबाही मच गई। बस्तर में बाढ़ के बाद की तस्वीरें… बलरामपुर में सबसे ज्यादा पानी बरसा प्रदेश में अब तक 900 MM बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 427.5 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से -50% कम है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, बेमेतरा, जगदलपुर में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। वहीं, बलरामपुर जिले में 1266.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 61% अधिक है। आंकड़े 01 जून से 3 1अगस्त 2025 तक के हैं। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी

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