बलरामपुर में बांध टूटने से 4 की मौत, 3 लापता:इनमें बच्ची समेत 3 महिलाएं, आज 12 जिलों में अलर्ट; रायपुर में देर रात से बूंदाबांदी

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर, बलरामपुर जिले में आज भारी बारिश का यलो अलर्ट है। इसके अलावा बिलासपुर, मुंगेली, रायगढ़ समेत 10 जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिर सकती है, आंधी चल सकती है। रायपुर सहित कई इलाकों में देर रात से बूंदाबांदी जारी है। बंगाल में बने लो प्रेशर एरिया के कारण पिछले 24 घंटों में बिलासपुर, सरगुजा, रायपुर और बस्तर संभागों के अधिकांश इलाकों में पानी बरसा। वहीं तापमान की बात करें तो सबसे अधिक तापमान 31.6°C दुर्ग और सबसे ​कम तापमान राजनांदगांव में 20.5°C दर्ज किया गया। इससे पहले बलरामपुर में लगातार बारिश से लुत्ती में पुराना बांध बह गया। बांध के बहने से निचले इलाके के चार घर के 7 लोग बह गए। इनमें से 4 की डेडबॉडी मिल गई है। बाढ़ में बहे 3 अन्य लोगों का पता नहीं चल सका है। तलाश जारी है। तस्वीर देखिए- अब जानिए क्या है मानसून द्रोणिका मानसून द्रोणिका लो प्रेशर लाइन होती है, जो भारत के उत्तर-पश्चिम से लेकर उत्तर-पूर्वी भाग तक फैली रहती है। यह आमतौर पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जाती है। कई बार इसका विस्तार पाकिस्तान और म्यांमार तक भी हो जाता है। जब दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय होता है तो उत्तर भारत के मैदानी भागों में यह द्रोणिका विकसित होती है। इसकी स्थिति कभी उत्तर की ओर (हिमालय के पास) और कभी दक्षिण की ओर (मध्य भारत तक) खिसकती रहती है। जब मानसून द्रोणिका उत्तर की ओर रहती है तो हिमालय और उसके तराई वाले क्षेत्र (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तर बंगाल, असम) में ज्यादा बारिश होती है। जानिए क्या है लो प्रेशर एरिया जहां हवा का दबाव आसपास की जगहों से कम होता है, उसे लो प्रेशर एरिया कहते हैं। जब किसी इलाके में तापमान ज्यादा होता है (जैसे समुद्र की सतह या जमीन बहुत गर्म हो जाए)। गर्मी से हवा हल्की और ऊपर उठने लगती है। ऊपर हवा चली जाने से नीचे की सतह पर दबाव घट जाता है, और वह जगह लो प्रेशर एरिया बन जाती है। यहां पर आसपास से हवा अंदर की ओर खिंचती है। हवा ऊपर उठकर ठंडी होती है और बादल और बारिश का कारण बनती है। समुद्र पर बनने वाले लो प्रेशर एरिया कई बार बड़े तूफान (Cyclone) में बदल जाते हैं। भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले लो प्रेशर एरिया ही देशभर में भारी बारिश करवाते हैं। उदाहरण के तौर पर समझिए बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर बना तो वह मानसून द्रोणिका के साथ जुड़कर ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, यूपी तक बारिश करा देगा। अगर यह और ताकतवर हो जाए तो डीप डिप्रेशन और फिर साइक्लोन में बदल सकता है। इन शॉर्ट लो प्रेशर एरिया = गर्म हवा ऊपर उठी → नीचे दबाव कम हुआ → हवा अंदर की ओर खिंची → बादल + बारिश। भारत की मानसूनी बारिश और चक्रवात का मुख्य कारण यही लो प्रेशर एरिया होते हैं। बस्तर में 200 से ज्यादा घर ढहे बस्तर संभाग में पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश के बाद चार जिलों दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर में बाढ़ से 200 से ज्यादा मकान ढह गए। 2196 लोग राहत शिविर में शिफ्ट किए गए। इन्हें स्कूल, इंडोर स्टेडियम, आश्रम जैसे जगहों पर ठहराया गया है। अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। अब बाढ़ के बाद की तस्वीरें भी सामने आई हैं। बारसूर में स्टेट हाईवे 5 पर पुल टूट गया है, टूटे पुल पर अब सीढ़ी बांधकर ग्रामीण आना जाना कर रहे हैं। बता दें कि नारायणपुर, बस्तर, बीजापुर के 55 से 60 गांवों के ग्रामीण अपनी रोजमर्रा के सामानों के लिए बारसूर साप्ताहिक बाजार पहुंचते हैं। बलरामपुर में सबसे ज्यादा पानी बरसा प्रदेश में अब तक 919.1 बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 429.1 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से -51% कम है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, बेमेतरा, जगदलपुर में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। वहीं, बलरामपुर जिले में 1278.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 59% अधिक है। आंकड़े 1 जून से 2 सितंबर 2025 तक के हैं। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी

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