बिलासपुर में नाले में बही कार, 8 लोग बचे…बच्चा लापता:कोरबा में बाढ़ में बहा युवक,तलाश जारी, मुंगेली-कबीरधाम समेत 3 जिलों में आज रेड अलर्ट

छत्तीसगढ़ में तेज बारिश का दौर जारी है। रायपुर में रातभर तेज पानी बरसा है। जिससे कई इलाकों में जलभराव हो गया। प्रोफेसर कॉलोनी की सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं। पेंड्रा के धनौली गांव में नदी के बाढ़ का पानी घरों-दुकानों में घुस गया है। सड़क पर घुटने तक पानी बह रहा है। वहीं कोरबा के घिनारा नाला का जलस्तर बढ़ गया है। जिससे कई गांव से संपर्क टूट गया है। सोन नदी में दोस्तों के साथ घूमने गया युवक बह गया है, जिसकी तलाश जारी है। वहीं बिलासपुर में हरेली के दिन शिव मंदिर से लौटते वक्त कार नाले के बाढ़ में बह गई। कार में 9 लोग सवार थे। 8 लोग किसी तरह तैर कर बाहर निकले, लेकिन 3 साल का बच्चा तेज बहाव में कार के साथ बह गया। इस बीच मौसम विभाग ने आज राजनांदगांव, मुंगेली और कबीरधाम जिले में रेड अलर्ट जारी किया है। कोरिया, बेमेतरा, दुर्ग सहित 8 जिलों में ऑरेंज और 22 जिलों में यलो अलर्ट है। कल यानी 27 जुलाई के बाद बारिश की रफ्तार में कमी आएगी।
पिछले 24 घंटे में प्रदेश में 38.7 MM औसत पानी बरस चुका है। मौसम विभाग का कहना है कि तटीय पश्चिम बंगाल पर लो प्रेशर बना हुआ है, जिसके असर से आज (शनिवार) को भी भारी बारिश हो सकती है। अब ये तस्वीरें देखिए… 25 दिनों में 373 मिलीमीटर पानी बरसा छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 543.4 मि.मी. औसत वर्षा हो चुकी है। पिछले 25 दिनों में की बात करें तो 373.7 मिमी पानी गिरा है। अब तक बलरामपुर जिले में सबसे ज्यादा 837.4 मिमी वर्षा हुई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 277.4 मिमी पानी गिरा है। लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियमित समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ

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