बस्तर संभाग में पिछले तीन दिनों से मूसलाधार बारिश के बाद, शुक्रवार को स्थिति कुछ हद तक सामान्य हो पाई है। बारिश कुछ कम हुई है। राहत और बचाव कार्य जारी है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक बाढ़ से दंतेवाड़ा जिले में 100 से ज्यादा गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट चुका है। 200 से ज्यादा मकान ढह गए। 2196 लोग राहत शिविर में शिफ्ट किए गए। वहीं पांच लोगों की मौत हो चुकी है। दंतेवाड़ा नगर समेत आस-पास के गांवों में कुल करीब 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है। दंतेवाड़ा में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इससे शंखनी-डंकनी नदी का पानी नहीं बह पाया और आसपास के गांवों में भारी तबाही मच गई। इस बीच मौसम विभाग ने आज बिलासपुर, GPM, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर, सरगुजा और रायगढ़ में बादल गरजने, बिजली गिरने और आंधी चलने का अलर्ट जारी किया है। अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहने की उम्मीद है। पिछले 24 घंटे की बात करें तो दुर्ग, बस्तर और रायपुर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। वहीं, बिलासपुर और सरगुजा संभागों के एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश दर्ज की गई। किसी भी जिले में सामान्य से अधिक बारिश नहीं हुई है। छत्तीसगढ़ में मानसून की द्रोणिका (ट्रफ) और एक लो-प्रेशर एरिया एक्टिव है, जिसके कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। तापमान की बात करें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान बिलासपुर में 32.5°C और सबसे कम न्यूनतम तापमान पेण्ड्रा रोड में 22.8°C रहा। रेस्क्यू की ये 2 तस्वीरें देखिए… 2196 लोग राहत शिविर में शिफ्ट किए गए सीएम विष्णु देव साय ने प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिलों बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बस्तर में राहत और बचाव कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने अफसरों से कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। राहत और बचाव के काम तेजी से करें। राहत शिविरों में ठहरे सभी लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा और आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाए। राजस्व सचिव एवं आपदा राहत आयुक्त रीना बाबासाहेब कंगाले ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 4 जिलों में 43 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इसमें 2196 लोग ठहराए गए हैं। इसमें दंतेवाड़ा जिले के 1,116, सुकमा के 790, बीजापुर के 120 और बस्तर के 170 लोग हैं। बाढ़ से अब तक 5 लोगों और 17 पशुओं की मृत्यु हुई है। बस्तर की ये तस्वीरें भी देखिए… बलरामपुर में सबसे ज्यादा पानी बरसा प्रदेश में अब तक 888.2 MM बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 425.7 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से -48% कम है। महासमुंद (-20%) जिले में वर्षा सामान्य से काफी कम रही है, जिन्हें ‘क्षेत्र में वर्षा की कमी’ वाले क्षेत्रों में रखा गया है। सरगुजा जिले में भी 27% वर्षा की कमी दर्ज की गई है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, बेमेतरा, जगदलपुर में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। वहीं, बलरामपुर जिले में 1257.6मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 66% अधिक है। जांजगीर जिले में भी 24% अधिक बारिश हुई है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी
3 दिन की बारिश के बाद बस्तर में मानसून स्लो:2,196 लोग राहत शिविर में शिफ्ट, 200 मकान ढहे; आज 8 जिलों में यलो अलर्ट

















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