2 राज्यों के 14-जिलों में पड़ताल के बाद हुआ खुलासा:छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के कागज पर छाप दीं मप्र की 2 लाख से ज्यादा किताबें

छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के कागज पर मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों के लिए 2 लाख से ज्यादा किताबें छापी गईं हैं। इन किताबों को मध्यप्रदेश के 14 जिलों में बांटा गया है। डीबी स्टार की टीम द्वारा रायपुर समेत मध्यप्रदेश के 14 जिलों की पड़ताल करने पर इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। जिस कागज पर किताबें छापी गईं हैं, उसकी छपाई मेसर्स यूनीवर्सल प्रेस से हुई है। जो मथुरा की है। यूनीवर्सल प्रेस को छत्तीसगढ़ में जीएसएम पेपर सप्लाई और किताबें छापने में से कोई भी काम छत्तीसगढ़ में नहीं मिला है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम का कागज इन तक अवैध तरीके से पहुंचाया गया। डीबी स्टार के पास इस मामले से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। किताबें छापने के लिए करीब 136 टन कागज का उपयोग हुआ है, जिसकी कीमत करीब 1 करोड़ 6 लाख रुपए है। इधर, छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए किताबें नहीं हैं। स्कूलों से 8 सितंबर की स्थिति में 12 लाख किताबों की डिमांड आई है। इससे पहले बच्चों को 6 लाख पुरानी किताबें बांटी जा चुकी हैं। इन हालातों के लिए छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम में कागज की कमी को ही जिम्मेदार माना जा रहा है। इस साल छापी गईं 2 करोड़ 40 लाख किताबें
छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम की ओर से इस साल जीएसएम पेपर के लिए 8 करोड़ रुपए का टेंडर हुआ था। 3 कागज मिलों को पेपर सप्लाई का काम दिया गया। किताबें छापने की जिम्मेदारी 27 प्रेस संचालकों को दी गई थी। इस साल अलग-अलग विषय व कक्षाओं के लिए कुल 2 करोड़ 40 लाख किताबें छापी गईं हैं। एनसीईआरटी की किताबों को 80 और एससीईआरटी की ​किताबों को 70 जीएसएम पेपर पर छापा गया है। सवाल: कागज कहां से गया, प्रिंटिंग प्रेस या मिल से
कागज के टेंडर के बाद किताबें छापने वाली प्रेस को ये कागज दिया जाता है। अफसरों को संदेह है कि इन्हीं दोनों में से किसी एक जगह से कागज गया होगा। मध्यप्रदेश में छापी गईं किताबों का कागज 70 जीएसएम का है जो छत्तीसगढ़ में एससीईआरटी की किताबें छापने में उपयोग किया जाता है। जबकि मध्यप्रदेश में 80 जीएसएम के पेपर पर किताबों की छपाई होनी थी। डीबी स्टार टीम ने ऐसे किया खुलासा
मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में बांटी गईं किताबों का डीबी स्टार के रिपोर्टर ने वाटरमार्क चैक किया। इसमें स्पष्ट रूप से छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम का वाटर मार्क दर्ज है। दरअसल, सरकारी कागजों का दुरुपयोग न हो इसलिए जीएसएम पेपर में वाटरमार्क रहता है। जिसमें अधिकृत फर्म का नाम वाटर मार्क के रूप में दर्ज होता है। इसी को चैक करने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। हमारे नाम के पेपर का उपयोग करना गलत छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के जीएसएम पेपर से मध्यप्रदेश में किताबें छापी गईं हैं, तो मैं प्रिटिंग प्रेस को लीगल नोटिस भेजूंगा। हमारे टीबीसी के ट्रेड मार्क वाले कागज का उपयोग करने का उनको अधिकार नहीं है।
– राजा पाण्डेय, अध्यक्ष, पाठ्य पुस्तक निगम, छत्तीसगढ़ हमारे पास पेपर का पूरा हिसाब है…
छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की ओर से खरीदे गए जीएसएम पेपर का हमारे पास पूरा हिसाब है। जितनी किताबें छपनी हैं उस हिसाब से हमने प्रिंटर को कागज दिया था। मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ पापुनि लिखे पेपर से किताबें छापी गईं हैं तो यह वहां के लिए जांच का विषय है।
– संजीव कुमार झा, एमडी, पापुनि छग

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