पुलिस की इमरजेंसी सेवा के लिए आखिरकार सी-डैक को काम दे दिया गया है। दैनिक भास्कर ने पहले ही इस संबंध में खबर प्रकाशित की थी कि गाड़ियां चलाने का अनुभव नहीं होने के बावजूद सी-डैक को डायल 112 का काम दिया जा सकता है। सी-डैक सरकारी उपक्रम है। इसको टेंडर किए बिना ही नामिनेशन के आधार पर काम दिया गया है। फिलहाल कंपनी को 116 करोड़ के आईटी से संबंधित काम करने के लिए अधिकृत किया गया है। भविष्य में वह गाड़ियों के बारे में फैसला लेने स्वतंत्र होगी। सी-डैक को नामिनेशन आधार पर काम देने का फैसला 18 जून के कैबिनेट में लिया गया। पर उसके बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इससे यह संदेश जा रहा है कि सी-डैक को काम देने का फैसला गोपनीय तरीके से किया गया है। यही वजह है कि कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने विस में आरोप लगाया कि डायल 112 के बारे में गृहमंत्री विजय शर्मा ने गलत जानकारी दी है। गृहमंत्री ने भावना बोहरा के सवाल के जवाब में बताया था कि डायल 112 सेवा का टेंडर खत्म नहीं हुआ है। टेंडर की प्रक्रिया चल रही है, जबकि टीपीएल के साथ अनुबंध अगस्त 2023 में खत्म हो गया था। राघवेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि गृहमंत्री ने उनके सवाल के जवाब में कहा कि आईटी पार्ट का काम सभी 33 जिलों के लिए 23 करोड़ 26 लाख रुपए प्रतिवर्ष की दर पर दे दिया गया है। काम कम और बताया ज्यादा : सी-डैक को काम देने के लिए कैबिनेट के अंदर यह बात कही गई कि यह 28 राज्यों में डायल-112 का काम नॉमिनेशन बेस पर कर रहा है। इसलिए इसे छत्तीसगढ़ में भी काम दिया जा सकता है। जबकि सी-डैक का कैड साफ्टवेयर 28 राज्यों में उपयोग किया जा रहा है। बाकी पूरे आईटी का काम सीडैक को दस राज्यों में भी नहीं मिला हुआ है। तीन भागों में बांटा गया काम
सी-डैक को गाड़ी चलाने का कोई अनुभव नहीं है, जब यह मामला भास्कर ने उठाया तो विभाग ने पुलिस मुख्यालय को तीन तरीके बताए। पहला पूरा काम नामिनेशन बेस पर दे सकते हैं। दूसरा पीएचक्यू वाहनों को चलवाए और आईटी का काम सी-डैक को दिया जाए। तीसरा सी-डैक को आईटी देकर वाहन चलवाने के लिए टेंडर किया जाए। विभाग ने पीएचक्यू के कहने पर यह प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा। वहां से तीसरे ऑप्शन को चुना गया। ऐसे समझें किस तरह हुई प्रक्रिया सी-डैक को नॉमिनेशन बेस पर डायल-112 के आईटी का काम दे दिया गया है। 28 राज्यों के बाद छत्तीसगढ़ 29वां राज्य है जहां सी-डैक काम करेगा। विजय शर्मा, गृहमंत्री
भास्कर ने बताया था- सी-डैक को काम दिया जाएगा:आखिरकार इमरजेंसी सेवा डायल-112 का काम सी-डैक को ही दिया

















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