छत्तीसगढ़ में पहली डिजिटल जनगणना की तैयारी चल रही है। इसका काम राज्य में दो चरण में होगा। पहले में अप्रैल-सितंबर 2026 तक मकानों की सूची बनेगी। फिर 30 दिनों में मकानों की गिनती होगी। दूसरे चरण में फरवरी 2027 से जनगणना शुरू होगी। इसे 1 मार्च को इसे पूरा कर लिया जाएगा। लोगों की गिनती मोबाइल एप से करके डेटा जमा किया जाएगा। जनगणना की रियल टाइम मॉनिटरिंग भी होगी। केंद्र सरकार के पोर्टल पर राज्य जनगणना निदेशालय और जिला प्रशासन इसे पूरा करेंगे। एसीएस मनोज कुमार पिंगुआ को स्टेट नोडल अधिकारी बनाया गया है। गाइडलाइन के अनुसार 31 दिसंबर तक जिलों के प्रशासनिक क्षेत्राधिकार परिवर्तित होंगे। इसके बाद 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में प्रशासनिक इकाइयों में कोई बदलाव नहीं हो सकेगा। तहसीलों-नगरों में कोई व्यक्ति या मकान गिनती से न छूटे, इसके लिए तहसीलों में ग्रामवार आबादी, हेमलेट, मजरा, पारा, टोला और नगरीय निकायों में वार्ड की सभी कॉलोनी-स्लम बस्ती की सूची बना लेने को कहा गया है। जिलों को तहसीलों में आने वाले गांवों की सूची सत्यापित कर जनगणना निदेशालय को भेजने को कहा गया है। 62 हजार कर्मचारी लगेंगे जनगणना में
इस बार प्रदेश की आबादी 3.20 करोड़ तक हो सकती है। वर्ष 2011 में यह संख्या 2.55 करोड़ थी। इस काम में करीब 62 हजार सरकारी कर्मचारी लगेंगे। उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। सरकारी विभाग और जिला कार्यालय अपने कर्मचारियों की सूची कर रहे हैं। कलेक्टर जनगणना कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा करेंगे। सीधी बात – मनोज कुमार पिंगुआ, स्टेट नोडल अधिकारी प्रदेश में जनगणना कैसे होगी?
पिंगुआ: इसका फ्रेम बना लिया गया है। इस संबंध में जिलों को भी गाइडलाइन जारी कर दी गई है। जब प्रगणक घर-घर जाएं तो उन्हें सही जानकारी दें। घर का कोई भी व्यक्ति न छूटे। यह बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है। इस बार जाति जनगणना भी होगी। क्या इसके लिए जाति प्रमाण पत्र लगेगा?
पिंगुआ: अभी तक प्रमाणपत्र के संबंध में कोई निर्देश नहीं है। जो तय फॉर्मेट है उसी में विस्तृत जानकारी आ जाएगी। सवाल: टाइम-टेबल के अनुसार काम हो जाएगा?
पिंगुआ: कटऑफ डेट्स पर सभी कार्य करने होंगे। इसके निर्देश दिए गए हैं।
ब्लूप्रिंट तैयार:प्रदेश में जनगणना 1 मार्च 2027 तक हो जाएगी, दो चरण में प्रक्रिया

















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