दुर्ग के रुदा और राजनांदगांव के धीरी गांव को जोड़ने शिवनाथ नदी पर बन रहा पुल मुआवजे के चलते पूरा नहीं हो पा रहा है। दुर्ग की तरफ पुल का हिस्सा तैयार हो गया है, जबकि राजनांदगांव के धीरी गांव की तरफ पुल का काम डेढ़ साल से अधूरा है। पुल पूरा न हो पाने के पीछे मुआवजा न मिल पाना कारण रहा। जैसे ही इस तरफ पुल का काम शुरू हुआ, धीरी गांव के कुछ किसानों ने मुआवजे को लेकर कोर्ट में याचिका दायर कर दी। हाल ही में कोर्ट का स्टे हटने के बाद पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने काम फिर से शुरू कर दिया है। अगले छह महीने में पुल तैयार होने का दावा किया जा रहा है। पुल की लंबाई करीब 1200 मीटर है। 2012 में इस पुल के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। उस वक्त दुर्ग ग्रामीण से कांग्रेस की प्रतिमा चंद्राकर विधायक थीं। पुल का दूसरा हिस्सा राजनांदगांव विधानसभा में आता है। इस क्षेत्र से उस वक्त डॉ. रमन सिंह विधायक और मुख्यमंत्री थे। 8 साल तक यह मामला फाइलों में ही लटका रहा। 2019-20 के अनुपूरक बजट में इसके लिए करीब 29 करोड़ की स्वीकृति मिली। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार आने के बाद ही इस पर काम शुरू हुआ। पुल बनने से 1 लाख लोगों को लाभ, बचेंगे 15 मिनट
रुदा-धीरी सहित दुर्ग और राजनांदगांव जिले के दर्जनभर से ज्यादा गांवों के एक लाख लोगों को इस पुल के बनने से फायदा होगा। पुल नहीं बनने से अभी लोगों को इस पुल से करीब तीन किमी दूर खांडा और बिरेझर पुल से आना-जाना करना पड़ता है। रुदा-धीरी पुल बनने से लोगों के 10 से 15 मिनट बचेंगे। सरपंच नंदकुमार साहू के अनुसार अभी दोनों पुल से रोज करीब 10 से 15 हजार लोग गुजरते हैं। इन गांव के लोगों को होगा फायदा
दुर्ग की तरफ रुदा, खांडा, निकुम, भोथली, गुटेला, भरदा तथा राजनांदगांव की तरफ धीरी, ढेरी, सांकरा, बिरेझर, सोमनी, थनौद आदि गांव के लोगों को एक-दूसरे जिले में आने-जाने का रास्ता साफ होगा। रुदा-खांडा गांव के सरपंच नंदकुमार साहू ने कहा कि रुदा की तरफ पुल काफी पहले बनकर तैयार हो गया है। करीब 13 साल पहले इसकी स्वीकृति मिली थी। दिसंबर तक बन जाएगा पुल
रुदा-धीरी के बीच पुल का काम रुकने की वजह जमीन अधिग्रहण से संबंधित मामला था। पुल दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा। इससे नदी के दोनों किनारे के करीब दर्जनभर गांव के लोगों को दोनों जिलों के बीच कनेक्टिविटी मिल जाएगी।
– एसके कोरी, चीफ इंजीनियर सेतु संभाग
दुर्ग-राजनांदगांव को जोड़ने वाला पुल डेढ़ साल से अधूरा, वजह- मुआवजा

















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