आज कारगिल युद्ध विजय दिवस को 26 साल हो गए। 26 जुलाई, 1999 को कारगिल पर हिन्दुस्तान फौज ने तिरंगा लहराया। इस जंग में भारत के 527 जवान शहीद हुए, लेकिन छत्तीसगढ़ एक जवान ऐसा भी था, जिन्होंने गोलियों की बारिश और चीखों के बीच 1000 जवानों की जिंदगी बचाई, लेकिन आज वह खुद जिंदगी से जंग लड़ रहे हैं। ये कहानी छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद सेना मेडल हासिल करने वाले पहले कारगिल योद्धा ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) प्रणव लहरी की है। जब वे श्रीनगर के 92 मिलिट्री हॉस्पिटल में ऑर्थोपेडिक सर्जन थे। अब वह पार्किंसंस बीमारी के कारण व्हीलचेयर पर हैं। याददाश्त कमजोर हो रही। रायपुर के रहने वाले प्रणब लहरी दैनिक भास्कर से लड़खड़ाते जुबान से बताते हैं कि कैप्टन विक्रम बत्रा ने कहा था या तो तिरंगा लहराकर आऊंगा या तिरंगे में लिपट कर, और वो सच में तिरंगे में लिपटकर आए। बहादुर बलिदानियों की वजह से हमने कारगिल युद्ध को जीता। इतना कहकर ब्रिगेडियर लहरी भावुक हो गए। दैनिक भास्कर से बातचीत के वक्त प्रणव लहरी की पत्नी निवेदिता लहरी की आंखों में भी आंसू थे। वह कह रहीं थी कि हमें मदद की जरूरत है, लेकिन सरकार हमें भूल चुकी है। दूसरों की जान बचाने वाला खुद गुमनामी के बीच बीमारियों से लड़ रहा है। क्या देश अपने फौजियों को सिर्फ युद्ध के वक्त याद करता है? पढ़िए इस रिपोर्ट में कैसे जिंदगी की जंग लड़ रहा फौजी और उसका परिवार… छत्तीसगढ़ के पहले सेना मेडल विजयी योद्धा, लेकिन भुला दिए गए ब्रिगेडियर प्रणव लहरी की पत्नी निवेदिता ने बताया कि राज्य निर्माण के बाद इन्हें कारगिल युद्ध में उत्कृष्ट युद्ध सेवा के लिए सेना मेडल से नवाजा गया। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद सेना मेडल हासिल करने वाले पहले कारगिल योद्धा ब्रिगेडियर प्रणव ही हैं। अब वह बीमार हैं, व्हीलचेयर पर हैं। छत्तीसगढ़ की सरकार ने हमें भुला दिया है। निवेदिता ने कहा कि आमतौर पर इस तरह के सैन्य मेडल विजेताओं को CM हाउस या राजभवन बुलाकर सम्मानित किया जाता है, लेकिन हमें इस तरह का कोई सम्मान नहीं मिला। बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि नेताओं का जन्मदिन हो तो शहर में होर्डिंग लग जाती है, लेकिन रायपुर के लोग ही नहीं जानते कि कारगिल का एक ऐसा योद्धा भी उनके बीच है, जिसने देश के लिए इतना कुछ किया। युद्ध में घायल 1000 जवानों की सर्जरी निवेदिता ने बताया कि युद्ध के दौरान बहुत ही खराब स्थिति थी। दुश्मन पहाड़ी की चोटी पर बैठा था। नीचे से आ रही भारतीय सेना को बड़ी आसानी से अपना निशाना बना रहा था। इस वजह से हर दिन सैकड़ों जवान घायल हो रहे थे। यह सभी श्रीनगर के उसी बेस हॉस्पिटल में ले जाते रहे, जहां ब्रिगेडियर लहरी पदस्थ थे। युद्ध के दौरान ब्रिगेडियर लहरी ने 1000 से ज्यादा जवानों की सर्जरी की। वह दिन रात अस्पताल और बॉर्डर एरिया पर ड्यूटी कर रहे थे। घायल जवानों का इलाज कर रहे थे। श्रीनगर के अस्पताल में भारतीय सेना के जवानों के शरीर से निकाली गई पाकिस्तानी गोलियां आज भी रखी गई हैं। जिस बंकर में ब्रिगेडियर इलाज कर रहे थे, वो बंकर ब्लास्ट निवेदिता ने बताया कि कारगिल युद्ध के समय जहां सैनिक लड़ाई लड़ रहे थे, उससे कुछ दूरी पर ही अंडरग्राउंड बंकर में एक अस्पताल बनाया गया था। वह एक ऑपरेशन थिएटर की तरह था, ताकि जल्द से जल्द घायल सैनिकों को इलाज मिल सके। ब्रिगेडियर लहरी वहीं घायल सैनिकों का इलाज कर रहे थे, तभी पाकिस्तान की ओर से फायर किया गया। इस दौरान 45 पाउंड का एक गोला आकार वहां गिरा और ब्लास्ट हो गया। बंकर के आसपास इंडियन आर्मी का राशन पेट्रोल डीजल मोबाइल कनेक्टिविटी के समान टावर सिग्नल सब कुछ जलकर खाक हो गया। बड़ी मुश्किल से उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ घायल सैनिकों को बाहर निकाला। अस्पताल के कमांडेंट ने दी थी बंकर ब्लास्ट की सूचना निवेदिता कहती हैं कि बंकर में ब्लास्ट के बाद अस्पताल के कमांडेंट की ओर से हमें सूचना मिली कि बंकर ऑपरेशन थिएटर ब्लास्ट हो गया है। वहां इंडियन आर्मी को बहुत नुकसान हुआ है। यह सुनने के बाद मेरी स्थिति बहुत खराब हो चुकी थी। सिग्नल सिस्टम ब्लास्ट हो जाने के कारण हमें इस बात की जानकारी नहीं मिल रही थी। ऑपरेशन थिएटर में मौजूद डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ और घायल जवानों का क्या हुआ, 7 दिन तक कोई खबर नहीं आई। आप सोचिए उन 7 दिनों तक मैं कहीं कांटेक्ट नहीं कर पा रही थी। ऐसी स्थिति में खुद के लिए और छोटी बच्ची के लिए खाना बनाकर खाना और गले से निवाला उतर जाए यह हालत हमारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि 7 दिन बाद खबर आई कि ब्रिगेडियर लहरी ठीक है। वहां मौजूद लोगों को नुकसान नहीं हुआ था। ब्रिगेडियर लहरी अपनी जान की परवाह किए बिना बंकर में ही रहकर 7 दिनों तक घायल जवानों का इलाज करते रहे। पाकिस्तानी सैनिकों का भी लहरी ने किया इलाज निवेदिता बताती हैं कि युद्ध के दौरान ब्रिगेडियर लहरी ने 2 पाकिस्तानी सैनिकों का भी इलाज किया। इंडियन आर्मी के जवान कारगिल के अलग-अलग क्षेत्र को जीत रहे थे, तो वहां मौजूद पाकिस्तानी सैनिकों को भी पकड़ा गया। बुरी अवस्था में घायल दो पाकिस्तानी सैनिकों को इलाज के लिए इंडियन आर्मी ने ब्रिगेडियर लहरी को जिम्मा दिया। इस दौरान ब्रिगेडियर ने दोनों का इलाज सफलतापूर्वक किया और दोनों ठीक भी हो गए। शत्रु होते हुए भी उन्होंने यह कहा कि भारतीय सेना की वजह से हमारी जान बची। हम यहां सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इलाज पूरा हो जाने के बाद इन सैनिकों को पाकिस्तान के हवाले कर दिया था। कारगिल के योद्धा के लिए आगे आए, कुछ संभव मदद सरकार करे- निवेदिता लहरी ब्रिगेडियर प्रणव लहरी की पत्नी निवेदिता ने बताया कि कारगिल और सियाचिन के मुश्किल मौसम के बीच ड्यूटी कर चुके ब्रिगेडियर लहरी 2014 में रिटायर हुए। रिटायरमेंट के बाद उनके शरीर पर असर देखने को मिला। सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। अब उन्हें पार्किंसंस बीमारी हो चुकी है। वह ठीक से बोल नहीं पाते, ठीक से चल, नहीं पाते व्हीलचेयर पर ही रहते हैं। मैं अकेले उनकी देखभाल नहीं कर पाती दिक्कत होती है। हमने कई जगह इनका इलाज भी कराया, लेकिन वह ठीक नहीं हो पा रहे हैं। मैं चाहती हूं कि राज्य सरकार कारगिल के योद्धा के लिए आगे आए, कुछ संभव मदद हमें मिले। पाकिस्तान को डिमॉलिश कर देना चाहिए- प्रणव लहरी ब्रिगेडियर प्रणव लहरी ने बताया कि कारगिल की लड़ाई में पाकिस्तान का क्रूर चेहरा अपनी आंखों से देखा है। हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह टेलीविजन पर वह नजर जमाए रहते थे। उस दौरान भी उन्हें लगता था कि कास मैं जाकर अपने जवानों की सेवा कर पाऊं। इसे लेकर ब्रिगेडियर लहरी ने कहा कि इंडियन आर्मी जैसा ऑर्गेनाइजेशन दूसरा नहीं हो सकता, बहुत अच्छी तरीके से पाकिस्तान को जवाब दिया गया मैं तो कहता हूं दुनिया के नक्शे से ही पाकिस्तान का निशान मिटा देना चाहिए , आतंकवाद को पालने वाले ऐसे देश को डिमॉलिश कर देना चाहिए। कांकेर के सरकारी स्कूल में पढ़े ब्रिगेडियर लहरी ने बताया कि मैं रायपुर में ही पला बढ़ा। पिताजी काम के सिलसिले में कांकेर गए थे, तो मेरी स्कूलिंग वहीं हुई। कांकेर के सरकारी स्कूल में जमीन पर बैठकर हम पढ़ा करते थे। इसके बाद रायपुर के मेडिकल कॉलेज में टॉप भी किया था। इसके बाद शॉर्ट सर्विस कमीशन के बारे में पता चला तो मैंने आर्मी में अप्लाई किया। आर्मी के पुणे स्थित मेडिकल कॉलेज से भी मैंने गोल्ड मेडल हासिल किया, फिर आर्मी के अलग-अलग अस्पतालों में मैंने डॉक्टर के रूप में काम किया। ये बीमारी है ब्रिगेडियर को रिटायर्ड ब्रिगेडियर प्रणव लहरी पार्किंसंस बीमारी से ग्रसित हैं। पार्किंसंस ऐसी कंडीशन है, जिसमें ब्रेन का कुछ हिस्सा धीरे-धीरे डैमेज हो जाता है। इसके लक्षण समय के साथ धीरे-धीरे गंभीर हो जाते हैं। इसके कारण मेंटल हेल्थ प्रभावित होती है। सोचने की क्षमता पर असर पड़ता है, याददाश्त भी कमजोर होने लगती है। साइंस जर्नल फ्रंटियर्स के मुताबिक, साल 2021 में पूरी दुनिया में 1 करोड़ 17 लाख 70 हजार लोगों को पार्किंसन्स था। अनुमान है कि 2050 तक पेशेंट्स की संख्या दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 2 करोड़ 52 लाख के करीब हो सकती है। क्या है पार्किसंस? ये एक तरह का मानसिक रोग है। इसमें व्यक्ति को चलने में दिक्कत साथ ही बॉडी में कंपन और अकड़न होती है। इसके अलावा बॉडी बैलेंस करने में भी समस्या होती है। रिसर्च के मुताबिक, पार्किसंस शुरुआत में एक सामान्य बीमारी की तरह ही होता है। कुछ दिनों बाद यह एक गंभीर बीमारी का रूप ले लेती है। एक्सपर्ट्स की मानें, कई लोगों में पार्किसंस की बीमारी देखने को मिली है। अगर कोई इन 5 प्रमुख बातों का ध्यान रखता है, तो इस बीमारी पर रोक लगा सकते हैं। 1- ताजी सब्जियों खाएं नई रिसर्च के मुताबिक, हमें विटामिन C और E युक्त फूड खाना चाहिए। इसका सीधा असर हेल्थ पर पड़ता है। इसलिए ताजी सब्जियां खाएं। इनमें भी विटामिन C और E युक्त सब्जियां खाना बेहतर रहेगा। 2- एक्सरसाइज करें रोजाना एक्सरसाइज करने से भी पार्किसंस की बीमारी का खतरा कम होता है। अपने रूटीन में योगा और एक्सरसाइज को शामिल करना जरूरी है। 3- ग्रीन टी पीना शुरू करें अक्सर डॉक्टर भी पार्किसन बीमारी में ग्रीन टी पीने की सलाह देते हैं। इसमें कैफीन कम होता है। जो बॉडी को फायदा पहुंचाती है। 4- पेस्टीसाइड केमिकल युक्त फलों और सब्जियों से बचें पेस्टीसाइड से बनाए रखें दूरी- केमिकल युक्त वातावरण से भी पार्किंसन रोग हो सकता है। इसलिए हमें पेस्टीसाइज़ जैसे केमिकल्स से दूरी बनाए रखनी चाहिए जिससे की हमारी सेहत पर इनका बुरा असर न पड़ सके। 5. प्रॉपर हेल्थ चेकअप जरूर कराएं अपनी सेहत का ख्याल रखना हम सभी की जिम्मेदारी होनी चाहिए, क्योंकि सेहत को लेकर की गई थोड़ी सी भी लापरवाही हमारे लिए एक मुसीबत बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी सेहत का ख्याल रखें और समय-समय पर अपना हेल्थ चेकअप करवाएं। इससे आपको यह संतुष्टि भी रहेगी कि आप पूर्ण तौर पर स्वस्थ हैं।
जंग में 1000 जवानों को बचाने वाले ब्रिगेडियर रो पड़े:बोले-कैप्टन बत्रा ने कहा था तिरंगा लहराकर या लिपटकर आऊंगा, पत्नी बोलीं-सरकार भूली,पति व्हीलचेयर पर

















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