तारीख 9 सितंबर 2015…सड़कों पर मवेशियों के झूंड और इससे लगातार हो रहे हादसों को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा था कि अफसर AC कमरों से निकलकर सड़क पर जाकर देखें क्या हो रहा है? लेकिन 10 साल बाद हालात जस के तस। 14 जुलाई की रात ग्राम बारीडीह के पास अज्ञात वाहन चालक ने लापरवाही पूर्वक तेज रफ्तार से वाहन चालन करते हुए सड़क पर बैठे गौवंश को बुरी तरह कुचल दिया, जिससे 13 गोवंश की मौके पर मौत हो गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए महाधिवक्ता से पूछा कि इन घटनाओं पर लगाम कैसे लगेगी? एक आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले में मवेशियों के कारण पिछले 5 साल में 166 हादसे हुए। इनमें 43 लोगों की जान चली गई। 68 लोग घायल हो गए हैं। वहीं, ऐसे भी हादसे हुए जिनमें बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत हो गई। जब-जब हादसे होते हैं, तब प्रशासन दिखावे के लिए एक्टिव हो जाता है और बैठक लेकर दिशा निर्देश जारी किए जाते हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। इस मामले में भास्कर की टीम ने पड़ताल की है। देखिए और पढ़िए दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट… सिलसिलेवार जानिए घटनाक्रम 14 जुलाई की रात ग्राम बारीडीह के पास अज्ञात वाहन चालक ने लापरवाही पूर्वक तेज रफ्तार से वाहन चालन करते हुए सड़क पर बैठे गौवंश को बुरी तरह कुचल दिया, जिससे 13 गोवंश की मौके पर मौत हो गई और 5 गौवंश घायल है जिनका इलाज जारी है। 15 जुलाई इस हादसे पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए महाधिवक्ता से पूछा कि इन घटनाओं पर लगाम कैसे लगेगी? जिस पर शासन की ओर जवाब के लिए समय मांगा गया। अब इस मामले में आगामी 30 जुलाई को सुनवाई होगी। जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद केस पर लगातार सुनवाई हुई, जिसमें समय-समय पर मुख्य सचिव को प्रदेश स्तर पर कार्य योजना बनाने के आदेश दिए गए। लेकिन, 10 साल बाद भी व्यवस्था जस की तस है। शहर से लेकर नेशनल हाईवे तक जगह-जगह मवेशियों का जमावड़ा लग रहा है, जिससे हादसे हो रहे हैं। प्रशासन का दावा इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने मैदानी अमलों को मवेशियों को सड़कों से हटाने का आदेश दिया है। दावा किया जा रहा है कि मवेशियों के गले में रेडियम लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही जनपद पंचायत से लेकर पंचायत सचिव की टीम बनाई गई है, रात सात बजे से 12 बजे तक सड़कों पर मवेशी हटाएंगे। ग्राउंड जीरो में वहीं स्थिति नेशनल हाईवे में बैठे रहे मवेशी 16 जुलाई बुधवार की रात शहर की हर सड़कों पर मवेशियों का कब्जा नजर आया। मंगला से उसलापुर सकरी रोड पर जगह-जगह मवेशी बैठे रहे। वहीं, नूतन चौक से सीपत रोड, महाराणा प्रताप चौक से मंगला रोड, महामाया चौक से कोनी रोड, तोरवा से मोपका रोड, गांधी चौक से तोरवा चौक, लिंक रोड, राजेंद्र नगर रोड, नेहरू चौक से मंगला रोड, शनिचरी बाजार रोड, गोड़पारा, बृहस्पति बाजार, चिंगराजपारा में मवेशी सड़कों पर डेरा जमाए बैठे रहे। नेशनल हाईवे पर भी मवेशियों का जमावड़ा दरअसल, बारिश के मौसम में जगह-जगह कीचड़ की वजह से मवेशी सूखे जगह की तलाश करते हुए नेशनल हाईवे तक पहुंच जाते हैं, जो रात में सड़कों को महफूज मानकर वहां बैठ जाते हैं। कोनी से लेकर सेंदरी व रतनपुर तक जगह-जगह मवेशियों का झूंड नजर आया। यही स्थिति रायपुर रोड और मस्तूरी रोड में भी दिखा। नेशनल हाईवे पर भारी वाहनों की रफ्तार तेज रहती है, जिससे हादसों की स्थिति बनती है। मवेशियों को देखने के बाद भी गाड़ी चालक रफ्तार नियंत्रित नहीं कर पाते और मवेशियों को कुचल कर भाग जाते हैं। रात में कहीं कोई जिम्मेदार नजर नहीं आया दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में शहर के साथ ही आसपास के नेशनल हाईवे का जायजा लिया गया। कुछ जगहों को छोड़कर हर जगह सड़कों पर गौवंश नजर आए। लेकिन, इस दौरान कोई भी जिम्मेदार सड़कों से मवेशी हटाते नहीं दिखे। शहर से लगे ग्राम पंचायत ढेका में सचिव सहित कुछ लोग बिलासपुर-रायगढ़ और रायपुर नेशनल हाईवे पर बैठे मवेशियों को खदेड़ते दिखे। सड़क पर मवेशियों के कारण 166 हादसे, 43 की मौत जिले में मवेशियों के कारण पिछले 5 साल में 166 हादसे हुए। इनमें 43 लोगों की जान चली गई। 68 लोग घायल हो गए हैं। वहीं, ऐसे भी हादसे हुए जिनमें बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत हो गई। आए दिन हादसे नेशनल हाईवे से लेकर स्टेट रोड के अलावा बाजार, गली-मोहल्ले, कॉलोनी और शहर की सड़कों पर मवेशी आम लोगों के लिए परेशानी की सबब बन रहे हैं। इनके कारण आए दिन घटनाएं हो रही है। बीते हफ्ते रतनपुर रोड में तेज रफ्तार बाइक भैंस से टकरा गई, जिससे बाइक सवार युवक की मौत हो गई। वहीं, बाइक के पीछे बैठे युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। ज्यादातर मवेशी के मालिक हैं फिर भी आवारा छोड़ देते हैं कहा जा रहा है कि शहर यानी नगर निगम सीमा क्षेत्र के साथ ही नेशनल और स्टेट हाईवे पर बैठे ज्यादातर मवेशियों के मालिक हैं। लेकिन, वो जान बुझकर मवेशियों को आवारा छोड़ देते हैं, जो बाहर घूमते रहते हैं। इन्हें रोकने के लिए प्रशासन ने ऐसे मवेशी मालिकों के खिलाफ अब कार्रवाई करने का दावा किया है। हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल से पूछा- कैसे लगेगी घटनाओं पर रोक हाइवा से कुचलकर मारे गए 13 मवेशियों को लेकर हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्वत: संज्ञान लिया है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने महाधिवक्ता से पूछा कि इन घटनाओं पर लगाम कैसे लगेगी? जिस पर शासन की ओर जवाब के लिए समय मांगा गया है। अब इस मामले की सुनवाई 30 जुलाई को होगी। हाईकोर्ट ने कहा कि सभी जगह मुख्य सड़कों और हाईवे पर बहुत खतरनाक स्थिति है। अफ़सोस की बात है कि इस तरह के हादसे निरंतर हो रहे हैं, शासन इन पर रोक लगाने के क्या उपाय कर रहा है? कोर्ट ने महाधिवक्ता से पूछा कि पूर्व में न्यायालय के आदेश पर कितना अमल किया गया है? गायों के मालिकों के खिलाफ एफआईआर हुई है या नहीं? महाधिवक्ता ने बताया कि, इस हादसे में दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। शासन ट्रैफिक की मानक संचालन प्रक्रिया का पूरा पालन करेगा। उन्होंने शासन की ओर से विस्तृत जवाब देने के लिए कोर्ट से समय देने का अनुरोध किया। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। पहली बार पुलिस ने गौवंश के मालिकों पर दर्ज किया केस ग्राम बारीडीह के पास अज्ञात वाहन चालक ने लापरवाही पूर्वक तेज रफ्तार से वाहन चालन करते हुए सड़क पर बैठे गौवंश को बुरी तरह कुचल दिया, जिससे 13 गोवंश की मौके पर मौत हो गई और 5 गौवंश घायल है जिनका इलाज जारी है। इस घटना के बाद पहली बार रतनपुर थाने में अज्ञात वाहन चालक के साथ ही मवेशी मालिक पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस अफसरों ने यह भी दावा किया है कि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संबंधित गांव के सरपंच व कोटवार के साथ मिलकर एक कमेटी बनाई गई है, जो मवेशियों के गले में रेडियम नेक बेंड लगा रहे हैं। मवेशियों को लावारिस छोड़ने वाले पशु मालिकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है। ऐसी स्थिति में अब लापरवाह मवेशी मालिकों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। 5 दिन पहले ही हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार 11 जुलाई को हाईकोर्ट ने सड़क की खराब स्थिति व मवेशियों के जमावड़े पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने महाधिवक्ता को बुलवाकर कहा था कि सड़कें खराब हैं और मवेशियों के कारण लोग लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। यह बहुत पीड़ा जनक है। अगर, कोर्ट न देखे तो क्या सरकार काम ही नहीं कराएगी। कोर्ट ने स्थिति को सुधारने के लिए कहा था। 10 साल से हाईकोर्ट कर रहा निगरानी फिर भी शासन-प्रशासन के दावे फेल ……………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सोमवार की देर रात तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने 22 मवेशियों को कुचल दिया, जिससे 17 गायों की मौत हो गई। 5 मवेशी घायल हैं। गौ-सेवकों ने मामले की शिकायत पुलिस से की है। घटना रतनपुर थाना क्षेत्र की है। पढ़ें पूरी खबर…
सड़कों पर मवेशी: पांच साल में 166 हादसे, 43 मौतें:हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- कैसे हटाओगे, बताओ; हकीकत-हर सड़क पर मवेशी छोड़ रहे मालिक

















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