छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में महापर्व छठ पूजा का आज अंतिम दिन रहा। 28 अक्टूबर की सुबह व्रती महिलाओं और श्रद्धालुओं ने छठ मैया की पूजा करने के साथ ही उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। भगवान को जल और दूध अर्पित कर विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। छठ पूजा के तीसरे दिन सोमवार (27 अक्टूबर) की शाम को 4 बजे से श्रद्धालु छठ घाट पहुंचे और पूजा-अर्चना की थी। इस दौरान डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया था। छठ पूजा के लिए शहर के अलग-अलग घाटों में विशेष इंतजाम किए गए थे। इस तरह से 36 घंटे का निर्जला उपवास के साथ छठ व्रत पूरा हुआ। 36 घंटे का उपवास पूरा हुआ वहीं मंगलवार (28 अक्टूबर) की सुबह 5 बजे से श्रद्धालु पूजा सामाग्री लेकर जूटमिल छठ घाट, एसईसीएल रोड और खर्राघाट के छठ घाट में पहुंचे। श्रद्धालु अपने-अपने परिवारों के साथ यहां पूजा-अर्चना शुरू करते हुए छठी मैया का आर्शीवाद लिया। व्रती महिलाएं घुटने तक पानी में उतरी और सूर्य निकलने पर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अपना 36 घंटे का निर्जला उपवास पूरा किया। ऐसे में नहाय-खाय से शुरू हुई छठ पूजा का समापन हो गया। आतिशबाजियां भी की गई सुबह से छठ घाट में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। ऐसे में कई श्रद्धालुओं ने आतिशबाजी भी की। सभी घाट में पटाखे फोड़े जा रहे थे। हर साल की तरह सुबह से यहां मेला जैसा माहौल था। इसके अलावा कई श्रद्धालुओं ने बहते पानी में दीपदान भी किया। सुरक्षा के लिए पुलिस जवान मौजूद छठ पूजा को लेकर पुलिस जवान भी ड्यूटी पर तैनात थे। सभी छठ घाट में थाना व यातायात विभाग के जवान मौजूद रहकर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे थे। वहीं कयाघाट मुक्तिधाम की ओर से एसईसीएल की ओर बड़ी गाड़ियां न आ सके, इसके लिए ट्रैफिक बैरिकेड्स लगाए गए थे। इससे छठ पूजा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी कोई समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा।
रायगढ़ में छठ व्रतियों ने उगते सूर्य को दिया अर्घ्य:36 घंटे का निर्जला उपवास पूरा; पूरी आस्था के साथ मनाया गया पर्व

















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