मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जल संसाधन विभाग की पहली ही बैठक में अफसरों की क्लास ली। मंत्रालय में विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने भू- अर्जन में देरी के कारण सिंचाई परियोजनाओं के लंबित होने पर अफसरों को फटकार लगाई। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि यह समझ में आ रहा है कि विभाग में किस तरह काम हो रहा है। किसान से खेत भी ले लिए और पानी भी नहीं दे रहे हो। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि 6 महीने में भू- अर्जन का पेमेंट क्लियर करें। साथ ही उन्होंने कहा कि भू- अर्जन राजस्व का विषय है लेकिन हम इसके लिए फेसिलिटेट करेंगे। ताकि किसानों को दुख न हो कि पानी भी नहीं मिला और खेत भी चला गया। मुख्यमंत्री साय ने लक्षित सिंचाई क्षमता और वास्तविक सिंचाई क्षमता के बीच अंतर को कम करने के लिए एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा। उन्होंने विशेषकर बस्तर और सरगुजा संभाग की अधूरी योजनाओं को जल्द पूरा करने और निर्माणाधीन वृहद परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि फील्ड अफसर और कर्मचारी नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। इसके कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि अफसर और कर्मचारी सतत रूप से फील्ड में रहें। बांधों के साथ ही दूसरे अन्य स्ट्रक्चर पर निगरानी रखें। मुख्यमंत्री ने सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत, बांधों की जलभराव क्षमता, वर्तमान सिंचाई स्थिति और आगामी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव रवि मित्तल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, प्रमुख अभियंता इंद्रजीत उईके तथा बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग मंडलों के मुख्य अभियंता सहित जल संसाधन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। लुत्ती बांध टूटने पर नाराज
बलरामपुर- रामानुजगंज जिले में स्थित लुत्ती बांध के टूटने के मामले में भी मुख्यमंत्री साय ने नाराजगी जताई। उन्होंने अफसरों को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की गलती किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सीएम ने कहा-:किसान से खेत लिए, पानी नहीं दिया, बर्दाश्त नहीं करेंगे

















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