कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस:9 घंटे समीक्षा, सीएम सख्त- योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

कलेक्टरों को रोज सुबह सात बजे नगर निकायों के वार्डों में करनी होगी निगरानी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में रविवार को कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की और सख्त तेवर अपनाए। लगभग नौ घंटे तक चली बैठक के बाद सीएम ने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि अब उन्हें रोज सुबह 7 बजे नगरीय निकायों के वार्डों का निरीक्षण करना होगा। नगर निगम, नगर पालिका अधिकारियों के काम की समीक्षा के साथ ही निकायों द्वारा किए जा रहे स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन की नियमित समीक्षा भी करनी होगी। सीएम ने कहा कि जनहित से जुड़े किसी भी कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि शासन की नीतियों और योजनाओं का अंतिम लाभ जनता तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचना ही सुशासन का वास्तविक अर्थ है। इस दिशा में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा, 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो रही है। किसानों का धान खराब न हो। उनका पंजीयन समय पर हो जाए और धान बेचने के लिए उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और धान बेचने के सात दिन के भीतर ही किसानों को एमएसपी का भुगतान कर दिया जाएगा। इस मामले में अनियमितता के लिए कलेक्टर ही जिम्मेदार होेंगे। उन्होंने पीएम सूर्य-घर योजना के तहत सोलर पैनल लगाने वाले लोगों को लोन​ दिलाने में मदद करने के निर्देश दिए। सा​थ ही अपने जिलों में जितना अधिक हो इसका प्रचार-प्रसार करें। उन्होंने कमिश्नरों को बस्तर और सरगुजा संभाग में विशेष रूप से योजना की प्रगति की समीक्षा करने के लिए कहा है। बेहतर की तारीफ की: सीएम ने बेहतर काम करने वाले जिलों की तारीफ की, तो कमजोर जिलों के कलेक्टरों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें काम में सुधार लाने की नसीहत दी। प्रभारी सचिव- संभागायुक्त करेंगे योजनाओं के अमल की समीक्षा आज एसपी और डीएफओ कॉन्फ्रेंस
मुख्यमंत्री सोमवार को सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और डीएफओ कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। इस दौरान वे कानून व्यवस्था के साथ ही वन अधिकार कानूनों की समीक्षा करेंगे। सीएम ने पूछा- धड़ल्ले से चल रहा है अवैध रेत खनन, क्यों नहीं रोक पा रहे हैं कलेक्टर? बोले- रेत घाटों की ई-नीलामी पर ध्यान दें, कलेक्टर बोले-पर्यावरण मंजूरी में देरी होती है मुख्यमंत्री ने माफिया द्वारा रेत, मुरुम और डोलोमाइट के धड़ल्ले से किए जा रहे अवैध खनन पर नाराजगी जताई। सीएम साय ने कहा कि रेत और मुरुम का धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है। इसकी ढेरों शिकायतें मिल रही हैं। कलेक्टर इन कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे। अवैध खनन रोकने के लिए आप क्या कर रहे हैं? इसके बाद सीएम ने कहा- चार-पांच दिन में लगभग सभी रेत घाट खुल जाएंगे, ऐसे में अवैध खनन रोकने के लिए सभी कलेक्टरों से अपने-अपने जिलों की रेत घाटों की ई-नीलामी पर ध्यान दें। इस पर कुछ कलेक्टर्स ने कहा कि कई जगहों पर पर्यावरण मंजूरी में देरी होती है, इससे प्रक्रिया बाधित हो सकती है। उनके इस तर्क पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आप उस बारे में मत सोचो, पर्यावरण मंजूरी जल्द हम उपलब्ध करा देंगे। वहीं मुख्य सचिव विकासशील ने प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया कि पहले जिस तरह से रेत घाटों की नीलामी होती थी उससे हमें कम राजस्व मिलता था, जबकि ई-नीलामी से राज्य के राजस्व में काफी बढ़ेगा। दरअसल, राज्य सरकार प्रदेश के 150 रेत घाटों की नीलामी करने जा रही है। रेत खदानों की नीलामी से सरकार को सीधे राजस्व प्राप्त होगा। दावा है कि इससे पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ेगी। साथ ही रेत के अवैध खनन पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। बताया गया है कि वर्तमान में इन रेत घाटों से सरकार को लगभग सौ करोड़ तक की कमाई होती है। लेकिन ई-नीलामी से राजस्व में दोगुना तक की बढ़ोतरी हाेने की संभावना है।

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