छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। 31 अक्टूबर को कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने ED को दस दिनो के अंदर पूरे काउंटर एफिडेविट जमा करने को कहा है। बता दें कि ये मामला 2000 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले से जुड़ा है। चैतन्य बघेल पिछले 3 महीने से जेल में बंद है। चैतन्य ने जमानत के साथ ही PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग) एक्ट की धारा 50 और 63 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका लगाई थी जिस पर सुनवाई हुई। सिब्बल बोले- बिना समन गिरफ्तारी करना गलत इस मामले की सुनवाई 31 अक्टूबर को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने की। चैतन्य बघेल की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और N. हरिहरन ने पक्ष रखा। सिब्बल ने बिना नोटिस गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘गैर-सहयोग का आरोप लगाकर गिरफ्तारी कर ली गई, बिना नोटिस दिए बिना, न ही समन। PMLA की धारा 19 के तहत बिना नोटिस गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच एजेंसी इंवेस्टिगेशन के नाम पर जानबूझकर देरी कर रही हैं। ताकि आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखा जा सके। कोर्ट ने कहा – आरोप पर जवाब देना होगा सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल के आरोपों पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ‘गैर-सहयोग एकमात्र आधार नहीं है। आरोपों का जवाब तो देना पड़ेगा।’ वहीं जस्टिस बागची ने कहा ‘यह सिर्फ गिरफ्तारी के आधार का मामला नहीं है, बल्कि सवाल यह भी है कि जांच कब तक चलेगी।’ ED का जवाब- हमारे पास जांच के लिए तीन महीने का वक्त ED की ओर से ASG एस.वी. राजू ने कहा सुप्रीम कोर्ट ने हमें जांच पूरी करने के लिए 3 महीने का समय दिया है। प्रक्रिया जारी है। जिसके बाद कोर्ट ने मामले पर नोटिस जारी करते हुए ED को 10 दिन में काउंटर-एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। काउंटर फाइल होने के बाद अगली सुनवाई तय होगी। अब समझिए PMLA को चुनौती क्यों दी गई PMLA यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कई शक्तियां ED को दी गई हैं। चैतन्य बघेल ने जो याचिका दायर की है, उसका मकसद है PMLA की धाराओं 50 और 63 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देना है। धारा 50 (PMLA) क्या है? धारा 63 (PMLA) क्या है? चैतन्य बघेल की याचिका में कहा गया है कि ये धाराएं संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं- याचिका में मुख्य तर्क सरल भाषा में कहें तो…ये याचिका कहती है कि ED को इतने ज्यादा अधिकार नहीं होने चाहिए कि वह किसी को बिना नोटिस और बिना संरक्षण के पूछताछ और सजा दे सके। ये अधिकार संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों से टकराते हैं। …………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… चैतन्य बघेल के खिलाफ चार्जशीट पेश नहीं कर पाई EOW: कोर्ट से दो दिन का समय और मांगा, अब अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ज्यूडिशियल रिमांड दो दिन और बढ़ा दी गई है। इससे पहले कोर्ट ने चैतन्य को 13 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। साथ ही शराब घोटाले में आरोपी दीपेंद्र चावड़ा को भी 13 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। पढ़ें पूरी खबर…
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी पर ED को कोर्ट का नोटिस:शराब-घोटाले मामले पर SC में हुई सुनवाई; 10 दिन में काउंटर-एफिडेविट जमा करने का आदेश


















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