राज्य में चर्चित कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच कर रही आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने सोमवार, 6 अक्टूबर को सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर के खिलाफ लगभग 1500 पन्नों की चार्जशीट पेश की है। चार्जशीट में EOW ने अनिल टुटेजा और तत्कालीन अधिकारी रोशन चंद्राकर को कथित रूप से घोटाले का मास्टर माइंड बताया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले की शुरुआत वर्ष 2021-22 में हुई थी, जब उद्योग भवन में हुई एक बैठक में कस्टम मिलिंग से जुड़ी अनियमितताओं की रूपरेखा बनी। उस समय अनिल टुटेजा उद्योग विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे। हालांकि, आरोपों की जांच जारी है और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। पढ़िए, आखिर कैसे रचा गया यह खेल और क्या है इस घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी:- EOW की चार्जशीट में पूर्व IAS पर साजिश रचने का दावा
इस बैठक में IAS अनिल टुटेजा ने खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में 104 लाख मैट्रिक टन धान खरीदी का अनुमान लगाया। उन्होंने रोशन चंद्राकर के साथ मिलकर खाद्य सचिव को चावल का केंद्रीय कोटा मांगने के निर्देश दिए। जबकि 2020-21 में 24 लाख मैट्रिक टन का कोटा ही मिलरों द्वारा पूर्ण करना मुश्किल हुआ था। अनुमानित उपार्जन के समाधान के लिए कस्टम मिलिंग में मिलरों को विशेष प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की योजना बनाई गई, जिससे कथित रूप से अवैध वसूली की जा सके। वसूली के लिए टुटेजा ने मिलर्स संघ पर दबाव डाला-EOW
EOW का आरोप है कि अनिल टुटेजा ने मार्कफेड में वसूली सुनिश्चित करने के लिए राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पर दबाव बनाया। इसी उद्देश्य से तत्कालीन कोषाध्यक्ष नरेश सोमानी को हटवाकर रोशन चंद्राकर को उस पद पर नियुक्त किया गया। 140 करोड़ की वसूली, विरोध करने वालों के मिलों पर छापे
चार्जशीट के अनुसार, रोशन चंद्राकर ने पदभार संभालने के बाद राइस मिलर्स से घूम-घूमकर वसूली की। जो कारोबारी पैसे देने से पीछे हटे, उनके खिलाफ कार्रवाई कराई गई। EOW का आरोप है कि अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा ने पद का दुरुपयोग करते हुए करीब 22 करोड़ रुपए कमीशन के रूप में वसूले। यह राशि कांग्रेस पार्टी के फंड में भी जाने का उल्लेख है। पूरे घोटाले में कुल 140 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली हुई। जिन कारोबारियों ने इसका विरोध किया, उनके मिलों में छापेमारी कराई गई। बोरी और कार्टून में राजीव भवन जाता था कमीशन का पैसा EOW की चार्जशीट के मुताबिक, कस्टम मिलिंग का कमीशन रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर के माध्यम से वसूला जाता था। इस काम की जिम्मेदारी रोशन चंद्राकर और शराब कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया को सौंपी गई थी, जिन्होंने हर जिले में एजेंट नियुक्त किए। वसूली की रकम बीटीआई मैदान, पाम बैलेजियो और बनियान ट्री जैसे होटलों में लाई जाती थी। हर बार पैसे छोड़ने की जगह बदली जाती थी। एजेंट वहां रकम छोड़ते और फिर यह राशि जेल रोड व शंकर नगर स्थित होटल में पहुंचाई जाती, जहां से टुटेजा तक जाती थी। EOW का आरोप है कि यहीं से सभी के हिस्सों में बंटवारा होता था। आरोप है कि एक हिस्सा कांग्रेस के राजीव भवन में भेजा जाता था, जिसे पार्टी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल द्वारा लिया जाता था। पैसा बोरियों और कार्टून में भरकर भेजा जाता था ताकि संदेह न हो। एसोसिएशन में बदलाव कर बनाई वसूली की योजना, सीएम हाउस में हुई थी बैठक EOW के अनुसार, कस्टम मिलिंग घोटाले को अंजाम देने के लिए सिंडिकेट ने राइस मिलर्स एसोसिएशन में पदाधिकारियों का बदलाव किया। शुरुआत में रोशन चंद्राकर को कोषाध्यक्ष नियुक्त कर अवैध वसूली का संचालन शुरू हुआ। प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया और मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में इसे 40 से बढ़ाकर 120 रुपए प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद बेबीलॉन होटल में सम्मान समारोह कर वसूली की शुरुआत हुई। अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा के निर्देश पर रोशन चंद्राकर और एमडी मनोज सोनी ने प्रति क्विंटल 20 रुपए की कमीशन वसूली शुरू की। यह पैसा पहले मार्कफेड के ज़िला अधिकारियों के पास जाता, जो उसे ऊपर तक पहुंचाते थे। रिश्वत देने वाले कारोबारियों के बिल तत्काल पास किए जाते थे, जबकि अन्य के बिल रोक दिए जाते थे।ॉ पीडब्ल्यूडी और वन विभाग में गड़बड़ी EOW की चार्जशीट में उल्लेख है, कि कारोबारी अनवर ढेबर का सरकार में गहरा प्रभाव था। आयकर विभाग की छापेमारी में मिले चैट में इसका खुलासा हुआ है। बताया गया कि पीडब्ल्यूडी, वन विभाग, बिजली विभाग, मार्कफेड सहित कई अन्य विभागों में अनवर का दखल था। टुटेजा के माध्यम से उन्होंने कई काम करवाए। कई विभागों में उनके बिना कोई काम नहीं होता था। ईओडब्ल्यू अब इन विभागों में हुई गड़बड़ियों की भी जांच कर रही है। शराब कारोबारी सिंघानिया करता था वसूली शराब घोटाले में शामिल आरोपी सिद्धार्थ सिंघानिया कस्टम मिलिंग में भी वसूली करता था। यह काम उसे अनवर ढेबर ने सौंपा था। उसने पैसा वसूली के लिए अंकुर पालीवाल और सूरज पवार को रखा था। वहीं टुटेजा की ओर से रोशन चंद्राकर और मनोज सोनी वसूली का काम संभालते थे। BJP विधायक शिवरतन शर्मा ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा 6 मार्च 2023 को विधानसभा में बीजेपी विधायक शिवरतन शर्मा ने कस्टम मिलिंग में प्रति टन 20 रुपए की अवैध वसूली का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि केवल उन्हीं राइस मिलर्स को भुगतान किया जाता है जो वसूली की राशि देते हैं। इस पर तत्कालीन मंत्री मोहम्मद अकबर ने विधायक से सबूत मांगे थे, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ।
कस्टम मिलिंग घोटाला…टुटेजा-ढेबर को 22 करोड़ मिले:सिंडिकेट ने मिलर्स से 140 करोड़ वसूले, रोशन-ढेबर ने की कलेक्शन; रकम बोरी-कार्टून में भरकर राजीव-भवन भेजी गई

















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