ट्रेनिंग में बताया- ऐसे होगा डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी सत्यापन

भास्कर न्यूज| महासमुंद खरीफ विपणन साल 2025-26 में धान उपार्जन कार्य को सुचारू और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को कलेक्टर विनय लंगेह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी सत्यापन प्रशिक्षण प्रदान किया। कलेक्टर ने बताया कि एकीकृत किसान पोर्टल में खरीफ के लिए किसान पंजीयन और पंजीकृत किसान के अपनी भूमि पर ली गई फसल का नाम और रकबा अद्यतन करने की कार्यवाही 31 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करना होगा। उन्होंने बताया कि इस साल खरीफ विपणन में धान खरीदी के लिए एग्रीस्टैक फार्मर आईडी को अनिवार्य किया गया है। खाद्य विभाग के पोर्टल पर धान खरीदी केवल फार्मर आईडी से लिंक समस्त फार्मर आईडी और खसरा आधारित पंजीयन उपरांत ही की जाएगी। इसलिए फसल गिरदावरी और डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज रकबा में किसी प्रकार की त्रुटि न हो। कलेक्टर लंगेह ने निर्देश दिए कि गिरदावरी सत्यापन का कार्य पूर्ण पारदर्शिता और गंभीरता से किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि गिरदावरी में संशोधन करना हो, तो भी उसका सत्यापन आवश्यक है। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारी पीवी मोबाइल ऐप डाउनलोड कर प्रक्रिया को समझें। उन्होंने स्पष्ट किया कि धान फसल के रकबे की गलत प्रविष्टि अथवा बढ़ाकर प्रविष्टि करने की स्थिति में न केवल धान उपार्जन प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि संबंधित पर जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। साथ ही गलत फसल प्रविष्टि से भी धान खरीदी प्रभावित हो सकती है। इसलिए सभी गंभीरता के साथ प्रशिक्षण में बताई गई बातों का पालन करें और प्रक्रिया के तहत ही सत्यापन का कार्य समय-सीमा में पूर्ण करें। कलेक्टर ने उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों से प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने और निर्देशों का पालन करने को कहा। इस मौके पर एसडीएम हरिशंकर पैकरा, तहसीलदार जुगल किशोर पटेल, नायब तहसीलदार मोहित अमिला और खाद्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। गिरदावरी सत्यापन के लिए 817 कर्मचारी नियुक्त किए गए उन्होंने बताया कि गिरदावरी सत्यापन के लिए जिले में 817 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है और अभी तक दर्ज खसरों का कम से कम 5 प्रतिशत सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। विशेष रूप से उन्होंने कहा कि वन अधिकार पट्टा, डुबान क्षेत्र व नगरीय क्षेत्र में भी किसान एप के माध्यम से सत्यापन कार्य किया जाना है।

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