राजधानी रायपुर में कुत्तों का आंतक बढ़ गया है। ब्रीडिंग सीजन होने के कारण इस वक्त कुत्ते ज्यादा खूंखार हैं। वाहन और पैदल चलने वालों को देखते ही वे दौड़ाने लगे हैं। रात के समय उनका खौफ सबसे ज्यादा होता है। कुत्तों पर नियंत्रण में नगर निगम फेल है। नगर निगम के टोल फ्री नंबर निदान पर रोज दर्जनभर शिकायतें आ रही हैं। निगम कार्रवाई के नाम पर कुत्तों को पकड़कर नसबंदी के बाद उन्हीं इलाकों में छोड़ देती है, जहां से उन्हें पकड़ा गया है। शहर के किसी भी वार्ड से शिकायत आने पर निगम का अमला कुत्तों को पकड़ रहा है। रोज 15 से 20 कुत्ते पकड़े जा रहे हैं। उनकी नसबंदी करने के बाद उन्हें वापस उन्हीं इलाकों में छोड़ा जा रहा है, जहां से पकड़े गए थे। किसी इलाके में यदि 50 के आसपास कुत्तों का डेरा है तो निगम शिकायत करने पर करीब दर्जनभर कुत्ते पकड़कर ले जाता है और नसबंदी कर देता है। बाकी बचे कुत्तों की वंशवृद्धि हो जाती है और नसबंदी फेल हो जाता है। बता दें कि कुत्तों को लेकर देश में सख्त नियम है कि उन्हें मारा नहीं जा सकता। पशु क्रूरता का हवाला देकर कुत्तों को मारने पर प्रतिबंध है। इसलिए नगर निगम के पास कुत्तों पर नियंत्रण के लिए सिर्फ नसबंदी ही एक मात्र उपाए है। अंबेडकर अस्पताल में 7 माह में वैक्सीनेशन डॉग शेल्टर तैयार पर शुरू नहीं कुत्तों के लिए नगर निगम ने सोनडोंगरी में डॉग शेल्टर तैयार किया है। करीब दो एकड़ खाली जमीन पर एक बाड़ा बनाया गया है। साथ ही यहां पर अस्पताल, डाक्टरों के रहने की व्यवस्था इत्यादि भी की गई है। डॉग शेल्टर में एक साथ करीब 50 कुत्तों को रखने की व्यवस्था है। निगम अफसरों के अनुसार शहर में बीमार और खूंखार कुत्तों को पकड़कर यहां पर उनका इलाज और नसबंदी इत्यादि किए जाएंगे। इसके साथ ही लोग अपने पालतू कुत्तों को भी यहां पर शुल्क देकर कुछ दिनों के लिए रख सकेंगे। निगम को उम्मीद है कि शेल्टर चालू होने के बाद यहां पर नियमित तौर पर कुत्तों की नसबंदी हो सकेगी।
शहर में कुत्तों का आतंक:कुत्तों को मार नहीं सकते और रखने की जगह नहीं, इसलिए नसबंदी के बाद छोड़ रहे


















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