डॉ. डीडी तन्ना ने कहा -:70% लोगों में विटामिन-डी की कमी, इसका दवा ही इलाज, नहीं लेंगे तो हड्डी कमजोर होगी, कई समस्याएं होंगी

हड्डियों से जुड़ी बीमारियां आम हो गई है। कम उम्र में ही घुटनों में दर्द, कमर दर्द जैसी शिकायतें आम हो गई है। खासकर बच्चों में विटामिन-डी और कै​ल्शियम की कमी हो रही है। इसका कारण है सन एक्सपोजर का कम होना। आज 70% लोगों की जांच कर लीजिए, विटामिन-डी की कमी मिलेगी। विटामिन-डी की दवा जरूर लें। क्योंकि हड्डी कमजोर होगी और आपको आस्टियोपोरोसिस होगा। ये कहना है देश के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. डीडी तन्ना का। वे रविवार को ऑर्थोपेडिक ट्रामा समिट-2025 में शामिल होने रायपुर पहुंचे थे। इस दौरान डॉ. तन्ना से भास्कर के लिए हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील खेमका ने इंटरव्यू लिया। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश… आपने प्रोटीन लेने की सलाह दी, ये कितना जरूरी है, कहते हैं कि इसे लेने से किडनी फैलियर जैसी समस्या होती है?
जवाब: प्रोटीन हड्डियों के लिए बहुत जरूरी है। खासकर जो शाकाहारी हैं, उन्हें इसकी जरूरत सबसे ज्यादा होती है। मैं खुद भी रोजाना 60 ग्राम प्रोटीन लेता हूं। प्रोटीन लेता हूं इसलिए समय-समय पर किडनी फंक्शन टेस्ट कराता हूं। आप भी ऐसा कर सकते हैं। रही बात किडनी फैलियर की तो ये जेनेटिक्स पर डिपेंड करता है। लाइफ स्टाइल के कारण भी होता है, लेकिन ज्यादातर जेनेटिक्स कारणों से ऐसा होता है।
लंबे समय तक आप बैठकर काम करना कितना खतरनाक हो सकता है, इससे निपटने के लिए क्या करें?
जवाब: मसल्स एकदम लेजी होते हैं। आप जब बैठते हैं तो ये सो जाते हैं। इसलिए थोड़ी-थोड़ी देर में अपनी चेयर से उठें। अब आपके टेबल पर ही फोन आ गया है, आप एक्सटेंशन नंबर दबाते हैं और ऑफिस में एक-दूसरे से बात कर लेते हैं। ऐसा ना करें, उठकर वहां अपने साथी के पास चले जाएं। आप जैसे ही उठेंगे, आपके मसल्स भी जाग जाएंगे। हर एक घंटे में आपको कुर्सी छोड़नी होगी। कुछ दूर चलें और फिर वापस आकर काम शुरू कर लें।
बढ़ती उम्र के साथ ऑर्थोपेडिक से संबंधित कौन सी बीमारियां ज्यादा देखने को आती हैं?
जवाब: ये उम्र की ​बीमारियां हैं, घुटनों की समस्याएं आएंगी, कमर की समस्या होगी। इससे बचाव के लिए फिजिकल एक्टिविटी, मेंटल एक्टिविटी और लर्निंग एक्टिविटी बहुत जरूरी हैं। मैंने कई गेम्स खेले, गोल्फ, बैडमिंटन खेला, क्रिकेट खेला। मेंटल एक्टिविटी के लिए पढ़ाई करें। जब भी आप पढ़ते हैं, आपको नई सीख मिलती है। दिमागी एक्टिविटी के लिए सुडोकू खेलें, इससे भेजा काम करते रहता है।
ऑर्थोपेडिक्स के अलावा आप जिंदगी की फिलॉस्फी को कैसे देखते हैं?
जवाब: ऑर्थोपेडिक्स जिंदगी का छोटा भाग है। ह​ड्डियों के डॉक्टर बन गए, पैसा बनाओ, नाम बनाओ, ये सभी बहुत छोटी चीज है। हम जो जिंदगी जीते हैं, वो काफी कम होती है। मैं पूरे देश में सफर करता हूं और लोगों से यही कहता हूं, जिंदगी को अच्छे से जियो। खूब पढ़ो, खूब खेलो, एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी में शामिल रहो। ये आपको जीने की राह सीखता है।
आज से 60 साल पहले जब आपने ऑर्थोपेडिक्स की प्रैक्टिस शुरू की, उस वक्त और आज के ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, फ्रैक्चर, सभी सिनेरियो में क्या बदलाव देखते हैं?
जवाब: 60 साल के पहले जो करते थे, वो अब नहीं करते। 20 साल पहले जो करते थे, वो भी अब नहीं करते, आज का दौर ही अलग है। काफी चेंज हो गया है अगर हम चेंज नहीं हुए तो पेशेंट को इसका नुकसान होता है।
कौन हैं डॉ. तन्ना: डॉ. डीडी तन्ना देश के मशहूर हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। उन्होंने भारत में इंटरलॉकिंग नेलिंग की शुरुआत की और यह तकनीक देश में लाई। उन्होंने मुंबई के नायर अस्पताल में प्रोफेसर के रूप में पढ़ाया है और कई छात्रों को प्रशिक्षित किया है। उन्होंने ऑर्थोपेडिक्स में कई व्याख्यान दिए हैं और “तन्ना की इंटरलॉकिंग बुक” नामक एक पुस्तक भी लिखी है।
आपकी मेडिकल ट्रेनिंग 1960 में हुई, आज भी आप ऑर्थोपेडिक पढ़ा रहे हैं, तब और अब में क्या अंतर नजर आता है?
जवाब: उस जमाने में हम लोग सीखते थे, जो दो साल पहले इंग्लैंड से आया है। वो जो बोलते थे, उसे हम साइंस समझते थे। हमारी ट्रेनिंग में जो जर्नल आते थे, वो 6 महीने बाद पुराने होते थे। अब इंटरनेट की दुनिया में कुछ मिनटों में ही आपको सब कुछ मिल जाता है। ट्रेनिंग बहुत आसान हुई है। सब लोग उपयोग कर सकते हैं।
आजकल कम उम्र में ही बहुत सारे लोगों के घुटनों में पेन होता है, स्पाइन में दर्द रहता है, उसका क्या कारण है?
जवाब: सफर इसका प्रमुख कारण है। पहले के जमाने में लोगों को ट्रैवल नहीं करना पड़ता। मैं मुंबई में रहता हूं, देखता हूं कि सुबह उठते हैं और फिर ढाई घंटे का सफर कर जॉब में पहुंचते हैं। इसका असर आपके स्पाइन में पड़ता है। घुटनों में पेन की प्रमुख वजह ये है कि फिजिकल एक्टिविटी एकदम से कम हो गई है। बॉडी को बेहतर रखना आपके हाथ में है। आप रोज कुछ ना कुछ कसरत करें, तभी आपकी बॉडी ठीक रहेगी, गाड़ी चलती रहेगी। मोबाइल देखने से और लगातार बैठकर कम्प्यूटर पर काम करने से पॉश्चर बिगड़ रहा है? इसके लिए क्या करें?
जवाब: मोबाइल जरूरी है, लेकिन इसका सीमित उपयोग करें। मैं आपको कहूं कि कम्प्यूटर पर काम करने के दौरान एकदम सीधे बैठे रहें(अचानक वे तनकर बैठ गए) तो लगातार ऐसे बैठने की ताकत किसी में नहीं है। ये अब सामान्य हो गया है। ज्यादा देर इस तरह से बैठना गलत है। इसके लिए आप कुछ देर सामान्य बैठ जाएं, फिर सीधे हो जाएं, कुछ देर में अपनी चेयर से उठें, चहलकदमी करें।

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