राज्य के चर्चित 3200 करोड़ के शराब घोटाले और 540 करोड़ के अवैध कोयला परिवहन केस में ईओडब्ल्यू ने रविवार को 6 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई पूर्व सीएम भूपेश बघेल के पीए जयचंद कोसले और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के करीबी अवधेश यादव सहित उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर की गई। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा में अधिकारियों ने दबिश दी है। वहीं, शराब घोटाले मामले में ईओडब्ल्यू ने रायपुर में छापा मारा है। रायपुर और जांजगीर-चांपा के अलावा ईओडब्ल्यू की टीमें बिहार के औरंगाबाद और झारखंड के पलामू में भी जांच के लिए पहुंची। प्रारंभिक कार्रवाई में टीम को भारी मात्रा में नकदी, करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज, जेवर और डिजिटल सबूत मिले हैं। ईओडब्ल्यू के अनुसार शिव विहार कॉलोनी निवासी शराब कारोबारी अवधेश यादव पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के बेहद करीबी रहे। वह बस्तर के सात जिलों में शराब का काम देखते थे। सरकार ने शराब दुकानों में मैनपावर और प्लेसमेंट के लिए निजी कंपनी को ठेका दिया था, लेकिन उसका संचालन अवधेश खुद करता था। आरोप है कि वह बस्तर में खुलेआम ओवररेट शराब बेचता था। पड़ोसी राज्यों से सस्ती शराब लाकर तस्करी करता और कोचिया सिस्टम के जरिए हर जिले में नेटवर्क चलाता था। यहां तक कि शराब में मिलावट कर सप्लाई करने का भी आरोप है। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि अवधेश ने इस कारोबार से 200 करोड़ से ज्यादा का कमीशन कमाया। इस रकम को उसने अपने पैतृक घर पलामू और ससुराल औरंगाबाद में निवेश किया है। जयचंद पर सौम्या के 50 करोड़ निवेश करने का शक ईओडब्ल्यू की टीम ने रविवार सुबह सहायक खनिज संचालक के पुत्र जयचंद कोसले के रायपुर और अकलतरा स्थित घरों पर भी दबिश दी। देर रात तक कार्रवाई जारी रही। जयचंद लंबे समय से जांच एजेंसी की निगरानी में था। वह पूर्व सीएम की उप सचिव सौम्या चौरसिया का करीबी माना जाता है। जांच में यह भी सामने आया कि अवैध कोयला परिवहन से मिलने वाला पैसा जयचंद के जरिए सौम्या तक पहुंचता था। जयचंद ने ही सौम्या का लगभग 50 करोड़ निवेश किया था। उसे खुद भी इस कारोबार से 10 करोड़ से ज्यादा की कमाई हुई। उसने रायपुर के सेजबहार कॉलोनी में आलीशान मकान और अकलतरा के अंबेडकर चौक के पास पैतृक घर सहित करोड़ों की संपत्ति खड़ी की है। जयचंद से ईडी भी कई बार पूछताछ कर चुकी है। बस्तर के 7 जिलों में अवधेश चलाता था खुद का नेटवर्क, ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी दखल रायपुर. अवधेश यादव बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों की शराब दुकानों का संचालन करता था। दुकानों में उसके कर्मचारी और सुपरविजन का काम उसके रिश्तेदार करते थे। झारखंड और बिहार से लाए गए रिश्तेदार भी शराब दुकानों में काम करते थे। आरोप है कि बस्तर संभाग में आबकारी विभाग की ट्रांसफर-पोस्टिंग में अवधेश की बड़ी भूमिका थी। अधिकारियों की नियुक्ति उसकी मर्जी से होती थी। इसके लिए वह पैसा वसूलता था। अवधेश ओडिशा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र से ट्रकों में सस्ती शराब मंगवाकर बस्तर में बेचता था। दुकानों में उसका कमीशन तय था। बिना होलोग्राम के भी शराब बिकती थी। विभाग में उस पर कोई निगरानी नहीं थी क्योंकि वह सीधे मंत्री को रिपोर्ट करता था। आशंका है कि उसने 300 करोड़ से ज्यादा का घोटाला किया है। सौम्या जब निगम आयुक्त बनीं तभी उनका निज सहायक बना जयचंद
ईओडब्ल्यू के मुताबिक, जयचंद कोसले नगर निगम का कर्मचारी था। जब सौम्या चौरसिया रायपुर निगम में अपर आयुक्त थी, तब जयचंद उनके निज सहायक(पीए) के तौर पर काम करने लगा। सौम्या जब मुख्यमंत्री की उप सचिव बनीं थी, तब जयचंद की पोस्टिंग भी वहीं करा दी गई। वह सौम्या के ऑफिस से जुड़ा पूरा काम देखता था, जिसमें पैसों का लेन-देन और निवेश शामिल था। सरकार बदलने के बाद भी जयचंद ने अपनी पोस्टिंग पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बंगले में करा ली और अब वही उनका काम देखने लगा था।
EOW की छत्तीसगढ़ समेत 3 राज्यों में कार्रवाई:भूपेश के पीए जयचंद और कवासी के करीबियों के छह ठिकानों पर छापे


















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