‘फेक-अकाउंट होल्डर-APK’ साइबर ठगों का नया टारगेट:रायपुर में कारोबारी सुबोध सिंघानिया के नाम पर बैंक-अफसर फंसे, 6 पैटर्न से समझें ठगी के तरीके

रायपुर के जाने-माने बिल्डर सुबोध सिंघानिया के नाम पर साइबर ठगों ने 8 लाख 70 हजार रुपए की ठगी की है। आरोपियों ने खुद को सिंघानिया बताकर पहले बैंक मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर से फोन पर संपर्क किया। फिर वॉट्सऐप ग्रुप में सुबोध सिंघानिया का लेटरहेड भेजा और रकम को कोलकाता स्थित एक निजी खाते में ट्रांसफर करवाया। ठगों ने यह राशि ‘फेक अकाउंट होल्डर – APK’ के माध्यम से मंगवाई। ठगी का पता चलते ही बैंक की असिस्टेंट मैनेजर ने कारोबारी की ओर से थाने में शिकायत दर्ज करवाई, जिस पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब छत्तीसगढ़ में पिछले तीन सालों में 791 करोड़ रुपए की साइबर ठगी के मामले दर्ज हो चुके हैं। यह आंकड़े पिछले विधानसभा सत्र में पेश किए गए थे। अब इस रिपोर्ट में विस्तार से जानिए साइबर ठगी के 10 नए पैटर्न और इनसे कैसे बचा जा सकता है। रायपुर रेंज के साइबर डीएसपी निशित अग्रवाल ने इनसे जुड़े अहम सवालों के जवाब दिए हैं पढ़िए:- सवाल: फेक अकाउंट होल्डर स्कैम क्या है? जवाब: यह साइबर ठगी का नया तरीका है, जिसमें ठग खुद को बैंक के बड़े ग्राहक के रूप में पेश करता है। पहले वह फोन पर बातचीत कर भरोसा जीतता है और फिर फर्जी दस्तावेज भेजकर खाते से पैसे ट्रांसफर करवा लेता है। सवाल: इस स्कैम का तरीका क्या है? जवाब: ठग अपने आप को पहले बैंक अधिकारियों को मामूली बातों में डांटता है। डाटने के बाद पैसा पार्टी को देना है बोलकर पैसे बैंक अधिकारियों से ट्रांसफर करवाता है। पैसे ट्रांसफर करवाने के लिए वॉट्सऐप में बैंक अकाउंट होल्डर के ऑफिस का फेक लेटर भेजता है। पैसे नहीं ट्रांसफर करने पर अकाउंट बंद करने की धमकी देता है। बैंक का बड़ा अकाउंट बंद ना हो, इसलिए बैंक अधिकारी पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। सवाल: फेक ई-चालान स्कैम क्या है? जवाब: यह एक नया प्रकार का साइबर फ्रॉड है। इसमें ठग खुद को ट्रैफिक अथॉरिटी या पुलिस अधिकारी दिखाते हैं और लोगों को चालान भरने के नाम पर नकली एप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। यह एप असल में मालवेयर होता है, जो मोबाइल की संवेदनशील जानकारी जैसे SMS, बैंकिंग एप्स, OTP और पासवर्ड चुरा लेता है। सवाल: इस स्कैम का तरीका क्या होता है? जवाब: ठग वॉट्सऐप, SMS या ईमेल के जरिए फर्जी चालान का मैसेज भेजते हैं और खुद को ट्रैफिक पुलिस या सरकारी अधिकारी बताते हैं। मैसेज में लिखा होता है कि आपकी गाड़ी से नियमों का उल्लंघन हुआ है और आपको जुर्माना भरना है। साथ ही इसमें एक APK फाइल (जैसे e-parivahan.apk) या लिंक दिया जाता है, जिस पर दावा होता है कि चालान की जानकारी देखने या भुगतान करने के लिए एप इंस्टॉल करें। जानकारी देने से पहले अनुमति मांगता है जब यूजर एप इंस्टॉल करता है, तो यह फोन से संवेदनशील जानकारी जैसे SMS, कॉन्टैक्ट्स, बैंकिंग एप्स, पासवर्ड और OTP एक्सेस करने की अनुमति मांगता है। एक बार जब ठगों को ये जानकारी मिल जाती है, वे मोबाइल बैंकिंग या UPI के जरिए खाते से पैसे निकाल लेते हैं। सवाल: डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है? जवाब: यह एक तरह का साइबर फ्रॉड है। इसमें अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, साइबर सेल एजेंट या किसी सरकारी जांच एजेंसी का सदस्य बताकर कॉल करते हैं। वे दावा करते हैं कि आपके खिलाफ कोई गंभीर मामला दर्ज है, जैसे अश्लील वीडियो शेयर करना, मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स से जुड़ा अपराध। साथ ही, वे वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल करके नकली पुलिस आईडी कार्ड, वारंट या कोर्ट ऑर्डर दिखाते हैं। वीडियो कॉल के दौरान वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर आपसे जुर्माना या जमानत राशि का भुगतान करने को कहते हैं। सवाल: क्या भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान है? जवाब: साइबर डीएसपी के मुताबिक भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। अगर कोई आपको इस नाम पर धमकाता या डराता है, तो यह फ्रॉड है। ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी साइबर सेल या पुलिस को सूचना दें। सवाल: डिजिटल अरेस्ट के कानूनी तथ्य क्या हैं? जवाब: कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए ठोस कानूनी आधार होना जरूरी है। बिना उचित जांच और कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तारी संभव नहीं। कोई पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंसी केवल ऑनलाइन नोटिस, ईमेल या मैसेज के जरिए आपको ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं कर सकती। सवाल: फास्टैग स्कैम क्या है? जवाब: इस स्कैम में ठग आपके फास्टैग से जुड़ी जानकारी या पैसे चुरा लेते हैं। इसके लिए वे फर्जी कॉल, SMS, वेबसाइट या QR कोड का इस्तेमाल करते हैं। अगर आप इनके झांसे में आकर अपनी डिटेल्स शेयर कर देते हैं, तो ठग आपका फास्टैग बैलेंस खाली कर सकते हैं या उसे गलत तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। सवाल: फास्टैग से जुड़े आम फ्रॉड कौन-कौन से हैं? जवाब: फास्टैग से जुड़े साइबर फ्रॉड कई तरह के होते हैं। ठग हमेशा नए तरीके अपनाते हैं, लेकिन कुछ तरीके सबसे ज्यादा सामने आते हैं। इन्हें समझना जरूरी है, ताकि आप खुद को सुरक्षित रख सकें और अपने फास्टैग का सही इस्तेमाल कर सकें। सवाल: जम्प्ड डिपॉजिट स्कैम क्या है? जवाब: इस स्कैम में साइबर ठग UPI उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाते हैं। सबसे पहले वे आपके बैंक अकाउंट में थोड़ा सा पैसा भेजते हैं। फिर वह आपको यह दिखाते हैं कि पैसा वापस करना है और कई बार विथड्रॉल या रिफंड की रिक्वेस्ट भेजते हैं। अगर आप इस रिक्वेस्ट को स्वीकार करते हैं और अपना UPI पिन डाल देते हैं, तो ठग आपके बैंक अकाउंट से पैसे चुरा लेते हैं। सवाल: ऐसे स्कैम से बचने के लिए UPI यूजर्स को क्या सावधानी बरतनी चाहिए? जवाब: जम्प्ड डिपॉजिट स्कैम में ठग आपको यह भरोसा दिलाने की कोशिश करते हैं कि उन्होंने गलती से आपके बैंक अकाउंट में पैसे भेज दिए हैं। इसके बाद वे फोन, ईमेल या UPI ट्रांजैक्शन रिक्वेस्ट के जरिए आपसे पैसे वापस करने के लिए कहते हैं। सवाल: APK फाइल स्कैम क्या है? जवाब: यह एक साइबर फ्रॉड है जिसमें ठग आपको किसी आधिकारिक संस्था जैसे बैंक, ट्रैफिक अथॉरिटी या सरकारी सेवा का नाम लेकर APK फाइल भेजते हैं। यह फाइल मोबाइल में इंस्टॉल करने पर मालवेयर एक्टिव हो जाता है और आपका संवेदनशील डेटा जैसे: SMS और कॉल्स, बैंकिंग एप्स और UPI पिन, पासवर्ड और OTP और कॉन्टैक्ट लिस्ट चुरा लेते है। इंस्टॉल होने के बाद स्कैमर आपके बैंक अकाउंट या डिजिटल वॉलेट से पैसे निकाल सकते हैं। सवाल: यह स्कैम कैसे काम करता है? जवाब: ठग वॉट्सऐप, SMS, ईमेल या सोशल मीडिया के जरिए फेक लिंक या APK फाइल भेजते हैं। संदेश में दावा होता है कि आपको चालान भरना है, अकाउंट वेरिफाई करना है या कोई ऑफर क्लेम करना है। यूजर APK फाइल इंस्टॉल करता है। एप बैकग्राउंड में डेटा चुराता है और थर्ड-पार्टी सर्वर पर भेज देता है। स्कैमर आपके बैंक या डिजिटल अकाउंट से पैसे निकाल सकता है। सवाल: APK फाइल स्कैम से बचने का तरीका क्या है? जवाब: APK फाइल केवल आधिकारिक स्टोर (Google Play Store, App Store) से डाउनलोड करें। किसी अज्ञात लिंक या संदेश पर क्लिक न करें। बैंकिंग और OTP जानकारी किसी को साझा न करें। मोबाइल में एंटी-वायरस और सिक्योरिटी एप इंस्टॉल रखें। अगर फोन की बैटरी जल्दी खत्म हो या डेटा अचानक बढ़ जाए, तो संदिग्ध एप्स चेक करें। सवाल: ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी स्कैम क्या है? जवाब: यह एक साइबर फ्रॉड है जिसमें ठग आपको किसी ट्रेडिंग या इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म (जैसे शेयर, क्रिप्टो, फॉरेक्स या कमोडिटी ट्रेडिंग) के नाम पर फंसाते हैं। वे दावा करते हैं कि आप छोटी रकम निवेश कर तेजी से बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। फर्जी एप्स, वेबसाइट या कॉल के जरिए वे आपका भरोसा जीतते हैं और पैसा ले लेते हैं। सवाल: यह स्कैम कैसे काम करता है? जवाब: स्कैमर्स फोन कॉल, ईमेल, SMS या सोशल मीडिया पर संपर्क करते हैं। वे दावा करते हैं कि यह “ऑफिशियल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म” है और जल्दी निवेश करने पर फायदा मिलेगा। कभी-कभी फर्जी वेबसाइट या मोबाइल एप डाउनलोड करवाते हैं। यूजर पैसे भेजता है और एप या वेबसाइट दिखाती है कि निवेश बढ़ रहा है। लेकिन जब पैसा निकालने की कोशिश होती है, तो स्कैमर बहाना बनाकर पैसे वापस नहीं करते। सवाल: ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी से बचने का तरीका क्या है? जवाब: केवल सरकारी या लाइसेंस प्राप्त ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें। किसी अज्ञात कॉल, ईमेल या सोशल मीडिया संदेश पर निवेश न करें। अगर कोई “तेजी से मुनाफा” का दावा करे, तो सतर्क रहें यह आमतौर पर स्कैम होता है। एप या वेबसाइट डाउनलोड करने से पहले समीक्षा और रेटिंग चेक करें। कभी भी अपने बैंक डिटेल, UPI पिन या OTP किसी को साझा न करें। संदेह होने पर साइबर क्राइम सेल या पुलिस से तुरंत संपर्क करें। कैसे पहचानें कि आपका डेटा कलेक्ट हो रहा है? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इसे पहचानने का कोई एक तय तरीका नहीं है, लेकिन कुछ संकेत आपके फोन में बता सकते हैं कि आपका डेटा शायद कलेक्ट किया जा रहा है। साइबर एक्सपर्ट मोहित साहू के अनुसार, अगर आपके मोबाइल का डेटा चोरी किया जा रहा है, तो डेटा यूसेज अचानक बढ़ सकता है। कई ऐप्स आपका डेटा कलेक्ट करने के बाद इसे थर्ड-पार्टी सर्वर पर भेज देती हैं। जब यह प्रक्रिया होती है, तो आपका डेटा जल्दी खत्म होने लगता है। साथ ही, अगर फोन की बैटरी जल्दी खत्म होने लगे, फोन अक्सर गर्म हो और ऐप्स असामान्य तरीके से काम करें, तो यह भी एक चेतावनी हो सकती है कि आपका डेटा कलेक्ट हो रहा है। अक्सर स्कैमर्स फर्जी या एडिटेड ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड दिखाकर आपको धोखा देते हैं। इसलिए अगर कभी भी ऐसी कोई विड्रॉल या रिफंड रिक्वेस्ट मिले, तो सावधान हो जाएं और इसे कभी स्वीकार न करें। 6 सालों में साइबर ठगी की घटनाएं 42 गुना बढ़ गई भारत में साल 2023 में 9.2 लाख से अधिक साइबर अपराध संबंधी शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें लगभग 6,000 करोड़ की आर्थिक हानि हुई। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह वर्षों में साइबर ठगी की घटनाएं 42 गुना बढ़ गई हैं। यह केवल तकनीकी समस्या नहीं रह गई, बल्कि आर्थिक और कानूनी चुनौती भी बन गई है। ठगी से प्राप्त धन को धोखाधड़ी और अन्य अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करने के लिए मनी म्यूल, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क का सहारा लिया जा रहा है। इसके मुकाबले सरकारें साइबर सुरक्षा पर अरबों रुपए खर्च कर रही हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (ICCC) ने 2025 के लिए अनुमान लगाया है कि भारतीयों को साइबर ठगी के माध्यम से 1.2 लाख करोड़ से अधिक का नुकसान होने की आशंका है। यह राशि बिहार राज्य के वार्षिक बजट के लगभग आधे के बराबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि आम जनता को डिजिटल लेनदेन करते समय ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। केवल भरोसेमंद और लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म पर ही ऑनलाइन पेमेंट और बैंकिंग करना सुरक्षित है। छत्तीसगढ़ में 791 करोड़ रुपए की ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायतें विधानसभा के पिछले सत्र में यह आंकड़े पेश किए गए थे। छत्तीसगढ़ में पिछले तीन सालों में 791 करोड़ की साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं, डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने विधायकों के सवालों पर विधानसभा में बताया था, कि राज्य के 67,389 लोगों ने 2023 से जून 2025 तक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 791 करोड़ रुपए की ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज कराई हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से 21,195 शिकायतों का निपटारा कर दिया गया है और 1,820 पीड़ितों का पैसा वसूल कर उन्हें वापस कर दिया गया है। ठगी के मामले में देश में 16वें स्थान पर छत्तीसगढ़ त्योहारों के मौसम में साइबर धोखाधड़ी का बढ़ा खतरा त्योहारों के समय साइबर ठगी में वृद्धि का खतरा ज्यादा होता है। इस दौरान धोखेबाज फर्जी ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल, नकली यात्रा पैकेज और अविश्वसनीय ई-कॉमर्स ऑफर के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसा सकते हैं। ऑनलाइन खरीदारी और टिकट बुकिंग बढ़ने के कारण अपराधी नकली वेबसाइट, हानिकारक लिंक और फर्जी यूपीआई पेमेंट अनुरोध के जरिए बैंकिंग जानकारी और खाते से पैसा चुरा सकते हैं। डांडिया नाइट और अन्य त्योहारी आयोजनों के लिए बढ़ती ऑनलाइन बुकिंग का फायदा उठाकर अपराधी नकली पोर्टल और मालवेयर फैलाने वाले लिंक तैयार करते हैं। ………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… कारोबारी सुबोध सिंघानिया के खाते में ठगों ने लगाई सेंध:असिस्टेंट मैनेजर से कॉल पर बात की, कंपनी का लेटर भेजकर ट्रांसफर करवाए 8.70 लाख रायपुर के कारोबारी सुबोध सिंघानिया बनकर साइबर ठगों ने बैंक की असिस्टेंट मैनेजर को गुमराह किया और कारोबारी के खाते से 8 लाख 70 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए। कारोबारी की ओर से असिस्टेंट मैनेजर ने थाने में शिकायत की है। जिस पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पढ़ें पूरी खबर…

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