छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों की खरीदी में भारी गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। जेम पोर्टल के जरिए खरीदे गए सामान पर विभागों ने बाजार मूल्य से कई गुना अधिक भुगतान किया। करोड़ों रुपए की खरीदी में चप्पल, स्टील जग और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले जैसे सामान शामिल हैं। जेम पोर्टल के मुताबिक बाजार में 150–200 रुपए की चप्पलें सरकारी रेट पर 1 हजार 350 रुपए में खरीदी गईं। इसी तरह स्मार्ट क्लास के लिए 1 लाख 45 हजार रुपए में मिलने वाला टीवी 9 लाख 99 हजार रुपए में खरीदा गया। वहीं 400–500 रुपए की कीमत वाला 1 लीटर का स्टील जग 32 हजार रुपए में खरीदा गया। इसी तरह बस्तर ओलिंपिक के लिए शिव नरेश कंपनी से ट्रैक सूट 2 हजार 499 रुपए प्रति यूनिट पर खरीदे गए, जबकि यही मॉडल कंपनी की वेबसाइट पर मात्र 1 हजार 539 रुपए में उपलब्ध है। इस रिपोर्ट में विस्तार से पढ़िए कि आखिर जेम पोर्टल की खरीदी को लेकर इतना बवाल क्यों मचा है:- जानिए क्या है जेम पोर्टल और क्यों शुरू किया गया था? दरअसल, सरकारी विभागों की खरीदी में पारदर्शिता और सुविधा लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल की शुरुआत की थी। 2017 से छत्तीसगढ़ में भी इसी पोर्टल के माध्यम से खरीदी की प्रक्रिया लागू की गई। मकसद यह था कि बिना दलालों और बिचौलियों के सरकारी सामान बाजार दर पर खरीदा जा सके। जिसे पारदर्शिता और ईमानदारी का प्रतीक बताया गया था, उसी पोर्टल के जरिए अब कई खरीदी मामलों में अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। शुरुआत में यह व्यवस्था ठीक भी चली, लेकिन धीरे-धीरे शिकायतें और गड़बड़ियां बढ़ती गईं। हाल के महीनों में कई विभागों की खरीदी पर सवाल उठे हैं, जिनमें कीमतों का भारी अंतर, टेंडर प्रक्रिया में जल्दबाजी और नियमों की अनदेखी जैसी बातें सामने आई हैं। अब जानिए कहां-कहां क्या गड़बड़ियां हुईं ? बस्तर ओलिंपिक में महंगा करके खरीदा गया ट्रैक सूट बस्तर ओलिंपिक आयोजन के बाद ट्रैक सूट खरीदी में गड़बड़ियों के दस्तावेज सामने आए हैं। खिलाड़ियों के लिए 4,900 ट्रैक सूट खरीदे गए, जिसकी टेंडर प्रक्रिया महज 11 दिन में निपटा दी गई। क्वालिफाई करने वाली पांचों कंपनियां एक ही ब्रांड शिव नरेश से जुड़ी थीं। शिव नरेश ब्रांड को ही ठेका मिला। बाजार में 1500 रुपए में मिलने वाले ट्रैक सूट 2,499 रुपए प्रति यूनिट की दर से सप्लाई किए गए। वित्तीय नियमों की अनदेखी कर खेल विभाग ने बिना शासन की मंजूरी खरीदी पूरी कर दी। इसके लिए कंपनी को 1 करोड़ 22 लाख 45 हजार का भुगतान भी किया गया। अब जानिए क्या था ट्रैक सूट खरीदी का मामला ? दरअसल, खिलाड़ियों के लिए 4,900 ट्रैक सूट खरीदे गए। 10 कंपनियों ने टेंडर भरा, एडिडास जैसी कंपनियां भी टेक्निकल बिड में बाहर हो गई। सिर्फ 5 कंपनियां क्वालीफाई हुईं। ये सभी शिव नरेश स्पोर्ट्स ब्रांड से जुड़ी निकलीं। बताया जा रहा है कि सबने एक ही मॉडल (आर्टिकल कोड 459A) का ट्रैक सूट ऑफर किया। आखिर में शिव नरेश स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 2,499 रुपए प्रति यूनिट पर सप्लाई का ऑर्डर मिला। कंपनी की वेबसाइट में इसी मॉडल का ट्रैक सूट 1539 रुपए में मिल रहा है। वहीं नियम के मुताबिक 20 लाख से ज्यादा की खरीदी के लिए 30 दिन का टेंडर होना चाहिए, लेकिन खेल विभाग ने सिर्फ 11 दिन में टेंडर निपटा दिया। शासन स्तर से स्वीकृति भी नहीं ली गई, जबकि खरीदी संचालक के अधिकार सीमा (20 लाख) से कहीं ज्यादा थी। क्या है बलौदाबाजार के 32 हजार रुपए वाले स्टील जग का मामला? बलौदाबाजार जिले में आदिवासी छात्रावास के लिए खरीदे जाने वाले स्टील जगों की कीमत को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दस्तावेजों में प्रत्येक 1 लीटर के जग की कीमत 32,000 रुपए दर्ज है। 160 स्टील जगों की खरीदी का प्रस्ताव तैयार किया गया था। दस्तावेजों में हर जग की कीमत 32,000 रुपए दिखाई गई, जिससे कुल बिल लगभग 51 लाख 99 हजार रुपए बैठा। वहीं विभाग का कहना है कि खरीदी की प्रक्रिया रद्द कर दी गई है। यही वजह रही कि कांग्रेस ने इस पूरे मामले को ‘भ्रष्टाचार का स्टील जग’ करार दिया। विपक्ष का कहना है कि जेम पोर्टल पर महंगे दाम दिखाकर सरकारी पैसों की बंदरबांट की तैयारी की गई थी। दूसरी ओर विभाग ने सफाई दी कि खरीदी का प्रस्ताव 9 जनवरी 2025 को आया जरूर था, लेकिन न तो सप्लाई हुई और न ही भुगतान। विभाग का दावा है कि फरवरी 2025 में दरें असामान्य रूप से ज्यादा पाए जाने पर यह प्रस्ताव रद्द कर दिया गया। 160 जगों की कुल कीमत 51 लाख शर्मनाक है- दीपक बैज इस पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने लिखा था कि एक जग की कीमत 32,000 है, चौंकिए मत, विष्णुदेव की सरकार में सब कुछ संभव है। आदिवासी बच्चों के छात्रावास के लिए सामान खरीदने के फंड पर भी ग्रहण लग गया। जेम पोर्टल से एक जग ₹32,000 में खरीदा गया! – 160 जगों की कुल कीमत ₹51 लाख। शर्मनाक। सरगुजा में स्मार्ट डिस्प्ले खरीदी पर घोटाले का आरोप सरगुजा में आदिवासी विकास विभाग द्वारा स्मार्ट क्लास के लिए खरीदे गए डिस्प्ले की कीमतों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने दस्तावेज़ साझा कर खरीदी प्रक्रिया को घोटाला बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दस्तावेजों के मुताबिक विभाग ने 5 स्मार्ट डिस्प्ले के लिए कुल 49.97 लाख रुपए का कांट्रैक्ट किया। यानी एक यूनिट की कीमत 9.99 लाख रुपए तय की गई, जबकि यही डिस्प्ले जेम पोर्टल पर महज 1.45 लाख रुपए में उपलब्ध था। दस्तावेजों के मुताबिक खरीदी 7 गुना अधिक कीमत पर दस्तावेजों के मुताबिक खरीदी 7 गुना अधिक कीमत पर की गई। यह एग्रीमेंट 2 जनवरी 2025 को हुआ और राशि सांसद निधि से स्वीकृत बताई गई। कांग्रेस ने इसे खुला भ्रष्टाचार बताते हुए कांट्रैक्ट लेटर सार्वजनिक किया। हालांकि अभी तक विभाग की ओर से न तो भुगतान और न ही इंस्टॉलेशन को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। 150 रुपए की चप्पल 1,350 में खरीदी गई छत्तीसगढ़ में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है। ठाकुर प्यारेलाल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, निमोरा ने 9 जून 2025 को जेम पोर्टल के जरिए महंगे दामों पर खरीदारी की। दस्तावेज बताते हैं कि बाजार में 150–200 रुपए की चप्पल 1,350 रुपए प्रति जोड़ी में खरीदी गई। कुल 2,070 जोड़ी चप्पलों पर 27.94 लाख रुपए खर्च किए गए। इस ऑर्डर की डेडलाइन 8 अगस्त 2025 तय की गई थी। यही नहीं, ट्रैक सूट जिसकी कीमत बाजार में करीब 1,250 रुपए प्रति नग है, उसे 4,000 रुपए में खरीदा गया। इस मद पर लगभग 82 लाख रुपए का खर्च हुआ। कंपनी की वेबसाइट पर 699 रुपए में उपलब्ध कॉलेज बैग 1,500 रुपए में खरीदे गए। दस्तावेजों के अनुसार, कुल 31 लाख रुपए के बैग खरीदे गए। इसी तरह 293 रुपए वाली वाटर बॉटल 1,165 रुपए प्रति नग के हिसाब से खरीदी गई। इस पर 24 लाख रुपए का बिल बना। कांग्रेस बोली जेम पोर्टल भ्रष्टाचार का अड्डा कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से जेम पोर्टल भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। उनके मुताबिक, इस पोर्टल पर 200 रुपये का जग 32 हजार रुपए में, 1 लाख रुपए की टीवी 10 लाख रुपए में और 1500 रुपए का ट्रैक सूट ढाई हजार रुपए में खरीदा जा रहा है। बीजेपी ने कहा सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया वहीं भाजपा प्रवक्ता उज्जवल दीपक ने कहा कि जेम पोर्टल शुरू करने का मूल उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ जगहों से गड़बड़ियों की शिकायतें मिली हैं और उनमें भ्रष्टाचार की आशंका है। इस पर सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया है और जांच की जा रही है। उज्जवल दीपक ने जोर देकर कहा कि यह विष्णु का सुशासन है, जहां किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार पर कोताही नहीं बरती जाएगी। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जेम-पोर्टल घोटाला…डेढ़ लाख का TV 10 लाख में खरीदा:500 का जग 32 हजार में, 150 की चप्पल 1350 में; पढ़िए कैसे हुई गड़बड़ी



















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