छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के बदहाल मुक्तिधामों पर सभी जिलों के कलेक्टर से फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट देने को कहा है। वहीं, चीफ सेक्रेटरी को अपने आदेश का कंप्लायंस रिपोर्ट की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार संविधान के तहत जीने के अधिकार का हिस्सा है, इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि हर मुक्तिधाम में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। दरअसल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा 29 सितंबर को बिल्हा के मुक्तिधाम पहुंचे थे। जहां उन्होंने चारों तरफ अव्यवस्था और गंदगी देखी। वे किसी न्यायिक अधिकारी के पिता के निधन पर पहुंचे थे। जिसके बाद उन्होंने इस बदहाली पर संज्ञान लिया। सोमवार (13 अक्टूबर) को इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की तरफ से महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने कोर्ट को बताया कि मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और कलेक्टर बिलासपुर ने इस मामले में अपने-अपने शपथपत्र (हलफनामा) प्रस्तुत किए हैं। साथ ही, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और शहरी प्रशासन विभाग ने 6 अक्टूबर और 8 अक्टूबर 2025 को इस संबंध में राज्यव्यापी निर्देश जारी किए हैं। इस पर डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल निर्देश जारी करने से काम नहीं चलेगा। अगली सुनवाई से पहले सभी कलेक्टर मुक्तिधामों के फोटोग्राफ्स के साथ कंप्लायंस रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मुक्तिधाम पहुंचे थे चीफ जस्टिस, अव्यवस्था देखकर की सुनवाई बता दें कि चीफ जस्टिस सिन्हा 29 सितंबर को रहंगी में एक अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने मुक्तिधाम की अव्यवस्था देखकर हैरानी जताई थी। मुक्तिधाम में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थी। यहां पहुंचने कोई रास्ता भी नहीं था। पानी, बैठने के कोई इंतजाम भी नहीं दिखे। जिस पर हाईकोर्ट ने इस अव्यवस्था को जनहित याचिका मानकर राज्य सरकार, जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। साफ-सफाई और रंगरोगन कर कलेक्टर ने दिया शपथपत्र रहंगी मुक्तिधाम की दशा पर बिलासपुर के कलेक्टर ने शपथ पत्र दिया है, इसमें बताया कि रहंगी मुक्तिधाम में तुरंत सुधार कार्य किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने हॉल को खाली कर प्रतीक्षालय में बदला गया है। पीने के पानी की व्यवस्था की गई है और अंतिम संस्कार प्लेटफॉर्म की मरम्मत कराई गई। इसके अलावा मुख्य सड़क से मुक्तिधाम तक सीसी रोड बनाने के लिए 10 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति भी दी गई है। सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन, हाईकोर्ट बोला- लागू करना जरूरी इधर, हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने भी पहल की। मुख्य सचिव ने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 6 अक्टूबर और नगरीय प्रशासन विभाग ने 8 अक्टूबर को सभी मुक्तिधामों के रखरखाव के लिए विस्तृत दिशा- निर्देश जारी कर दिए हैं। इनमें साफ-सफाई, ग्रीन फेंसिंग या कंटीले तार से बाउंड्री, शेड की मरम्मत, बिजली, पानी और पुरुष-महिला के लिए अलग शौचालय जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने पाया कि अभी इन गाइडलाइन का राज्यभर में समान रूप से पालन नहीं हुआ है। 33 जिलों के कलेक्टरों से मांगी कंप्लायंस रिपोर्ट हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश के सभी कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि 6 और 8 अक्टूबर 2025 को जारी गाइडलाइन का अक्षरशः पालन हो। प्रत्येक कलेक्टर को अपने जिले के सभी मुक्तिधामों की ताजा तस्वीरों के साथ विस्तृत रिपोर्ट 8 दिसंबर 2025 तक हाई कोर्ट में देनी होगी। …………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… मुक्तिधाम गए थे चीफ जस्टिस, अव्यवस्था देख नाराज हुए: दशहरा अवकाश पर सुनवाई की, कहा- शव का सम्मानजनक विदाई मौलिक अधिकार, CS से मांगा शपथ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा रविवार (28 सितंबर) को बिल्हा के मुक्तिधाम पहुंचे। जहां उन्होंने चारों तरफ अव्यवस्था और गंदगी देखी। वे किसी न्यायिक अधिकारी के पिता के निधन पर पहुंचे थे। जिसके बाद उन्होंने इस बदहाली पर संज्ञान लिया। पढ़ें पूरी खबर…
छत्तीसगढ़ में मुक्तिधामों की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त:सभी कलेक्टरों से फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट मांगी; मुक्तिधाम गए थे चीफ जस्टिस, अव्यवस्था देख नाराज हुए

















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