हिन्दी में हिन्दुस्तान नहीं लिख पाए छात्र:स्टूडेंट्स ने लिखा-अनपढ़ समझा जाता है, नौकरी नहीं मिलती; 45% को नहीं पता कब मनाते हैं हिन्दी दिवस

आज हिन्दी दिवस है। आज ही के दिन 1949 में हिन्दी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया गया था। हिंदी भाषा के महत्व को समझाने और उसे प्रोत्साहित करने 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिन्दी दिवस को लेकर दैनिक भास्कर की टीम ने राजधानी रायपुर के 100 छात्रों पर एक सर्वेक्षण किया। इन 100 में 50 उच्चतर माध्यमिक स्कूल के छात्र हैं और 50 कॉलेज के स्टूडेंट्स हैं। इन छात्रों से 3 सवाल पूछे गए- हिन्दी के बारे में आप क्या सोचते हैं, 200 शब्दों में लिखिए। हिन्दी दिवस कब मनाया जाता है और किसी कविता की चार पंक्ति। इसके लिए सभी छात्रों को आधे घंटे का समय दिया गया। 200 शब्दों के लेख में छात्रों ने कई गलतियां की हैं। कई स्टूडेंट्स ऐसी भी रहे जो हिन्दुस्तान, संवैधानिक, विकसित, वासियों, प्रतीक, जीवन यहां तक की हिन्दी भी सही नहीं लिख पाए। 45 प्रतिशत छात्रों को हिन्दी दिवस कब मनाया जाता है, ये नहीं पता था। कई स्टूडेंट्स ने लिखा कि हिंदी बोलने पर अनपढ़ समझा जाता है, नौकरी नहीं मिलती। उच्चतर माध्यमिक के 50 में सिर्फ 10 छात्रों ने ही हिन्दी को राजभाषा लिखा। अन्य छात्रों ने इसे राष्ट्रभाषा बताया। कॉलेज छात्रों की बात करें तो 50 में 22 स्टूडेंट हिन्दी की कोई कविता नहीं लिख पाए। सर्वेक्षण से निकले दूसरे तथ्यों, आंकड़ों और प्रतिशत पर हम आगे आपको विस्तार से बताएंगे, लेकिन इससे पहले छात्रों ने जो लिखा है, वो आपके सामने रखते हैं। छात्रों ने लिखा – हिन्दी बोलने पर अनपढ़ समझा जाता है। स्कूल में पढ़ने वाले सभी 50 छात्रों के लेख के कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु- ये पांच बिन्दु एक से थे। अधिकतर कॉलेज छात्रों ने भी ये लिखा कि हिंदी की अपेक्षा अंग्रेजी बोलने वाले को समाज में ज्यादा प्रतिष्ठता मिलती है। उन्हें ज्यादा पढ़ा-लिखा और बेहतर समझा जाता है। उनके लिए अवसर ज्यादा हैं। हिन्दी बोलने वाले उपेक्षित है। यही कारण है घर वाले उन्हें अंग्रेजी माध्यम स्कूल भेजते हैं। छात्र नहीं लिख पाए हिन्दी पर अपने विचार, लिखा – पुराण हिन्दी में लिखे गए छात्रों को हिन्दी पर अपने विचार लिखने का कहा गया था, लेकिन उच्चतर माध्यमिक के 50 में सिर्फ 15 छात्र ही हिन्दी को लेकर अपने विचार ठीक तरह से लिख पाए। वहीं महाविद्यालय के 22 छात्र अपने विचार लिख पाए। अधिकतर ने हिन्दी का इतिहास, हिन्दी कवियों के नाम और हिन्दी दिवस पर निबंध लिखा। उच्चतर माध्यमिक स्कूल के छात्रों ने ये लिखा- कॉलेज के छात्रों ने ये लिखा- अधिकतर छात्रों को याद नहीं कविता, जिन्होंने लिखी- उन्हें कवि का नाम नहीं मालूम कविता लिखने की बात करें तो उच्चतर माध्यमिक के 50 में से सिर्फ 19 छात्र यानी सिर्फ 38.4% बच्चे ही कविता लिख पाए। कॉलेज में ये आंकड़े कुछ ठीक रहे। 50 में से 27 छात्रों ने यानी 53 प्रतिशत छात्रों ने कविता लिखी। हालांकि इनमें कई ऐसे छात्र हैं, जिन्होंने कविता और कवियों का नाम गलत लिखा। विशेषज्ञ बोले- वॉट्सऐप ने भाषा बिगाड़ी पिछले 10 से ज्यादा सालों से हिन्दी पढ़ा रहे शिक्षकों ने हमने हिंदी भाषा को लेकर चर्चा की। शिक्षिका किरण तिवारी ने बताया कि बच्चों का व्याकरण कमजोर है। बच्चे हिन्दी से दूर भागते हैं। इसका दोष बच्चों का दोष नहीं है। वो सोचते हिन्दी में हैं, लेकिन अब अंग्रेजी सीखने का दबाव इतना है कि बच्चे हिन्दी से दूर हो रहे हैं। उन्हें लगता है कि हिन्दी किस काम आएगी। वहीं शिक्षिका अनामिका तिवारी ने बताया कि हिन्दी को लेकर लोग जागरूक नहीं है। पाठ्यक्रमों से भी हिन्दी साहित्य को विशेष स्थान नहीं मिला। इसके चलते बच्चे अपनी ही भाषा से दूर जा रहे हैं। दूसरी ओर वॉट्सऐप में जिस तरह से हिन्दी लिखी जा रही है, उसने बच्चों को सही हिन्दी लिखना भूला दिया है। अब इन 5 ग्राफिक्स में जानिए हिंदी का इतिहास- संदर्भः

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