राज्यपाल रमेक डेका ने प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों के तौर-तरीकों पर कड़ी नाराजगी जताई है। गुरुवार को राज्यपाल ने इनके कुलपतियों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि निजी विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने का केंद्र बनते जा रहे हैं। अगर गुणवत्ता के मानकों पर खरे नहीं उतरे तो उनको बंद कर दिया जाएगा। प्रबंधन को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मापदंडों और नियमों का सख्ती से पालन करना ही पड़ेगा। राज्यपाल ने कहा कि हर विश्वविद्यालय को अपनी नीतियों और कार्यशैली में राज्य की प्राथमिकताओं को केंद्र में रखना होगा। राज्यपाल ने कहा कि सभी पाठ्यक्रमों के लिए योग्य और स्थाई शिक्षक नियुक्त किए जाएं। ऐसा नहीं होने पर उस संस्थान को संबंधित पाठ्यक्रम को जारी रखने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वहां छात्रों की संख्या के अनुसार पर्याप्त फैकल्टी होनी चाहिए। नैक ग्रेडिंग के पात्र विश्वविद्यालयों से अनिवार्य रूप से इस प्रक्रिया में भाग लेने को कहा। निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन डॉ. विजय कुमार गोयल ने विश्वविद्यालयों से जुड़ी चुनौतियों की चर्चा की। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना और उच्च शिक्षा आयुक्त संतोष देवांगन मौजूद रहे। निजी विवि को सौंपा गया टास्क {छात्रों की शिकायतों पर कार्रवाई। {स्थानीय जरूरतों के अनुसार स्टार्टअप। {आकांक्षी जिलों के गांवों में नवाचार। {विवि परिसरों में सौर ऊर्जा प्रणाली। {डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करना। {एलुमिनी मीट आयोजित करना। {एक पेड़ मां के नाम के तहत पौधरोपण।
राज्यपाल की निजी विवि प्रबंधन को चेतावनी-गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरे तो होंगे बंद

















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