छत्तीसगढ़ के दक्षिण हिस्से यानी बस्तर संभाग के जिलों में भारी बारिश कि चेतावनी है। मौसम विभाग ने आज बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, धमतरी, कांकेर इन पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां गरज चमक के साथ बिजली गिर सकती है। आंधी चल सकती है। भारी बारिश हो सकती है। वहीं कोंडागांव, सुकमा, बस्तर, गरियाबंद, बालोद, राजनांदगांव, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, रायगढ़, मुंगेली इन 11 जिलों में बिजली गिरने, बादल गरजने, आंधी चलने और भारी बारिश का यलो अलर्ट है। बाकी जिलों में बिजली गिरने, बादल गरजने, आंधी चलने का यलो अलर्ट जारी किया गया है। तापमान की बात करें तो बुधवार को प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 33.3 डिग्री रायपुर में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 22 डिग्री पेंड्रा रोड में दर्ज किया गया। बस्तर और बिलासपुर संभाग में भारी बारिश पिछले 36 घंटों की बात करें तो छत्तीसगढ़ के सभी संभागों में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा हुई। बस्तर और बिलासपुर संभागों के एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिम-मध्य और इससे लगे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया बना हुआ है। इसके प्रभाव के कारण अगले एक सप्ताह तक एक-दो स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 1 अगस्त से 13 अगस्त के बीच 141 मिमी बारिश ओवर ऑल इस माह की बारिश की बात करें तो 1 से 13 अगस्त के बीच 166.7MM पानी बरसना चाहिए था, लेकिन अब तक केवल 64.0 MM ही पानी बरसा है। यानी सामान्य से लगभग 62 प्रतिशत कम बारिश हुई है। 1 जून से अब तक 678 मिमी बरसा पानी 1 जून से अब तक प्रदेश में 678 मिमी बारिश हो चुकी है। बलरामपुर में सबसे ज़्यादा 1113.5 मिमी बारिश हुई है। बेमेतरा में सबसे कम 336.4 मिमी बारिश हुई है। जून से जुलाई के बीच 623.1 MM मिलीमीटर बारिश प्रदेश में 1 जून से 30 जुलाई तक कुल 623.1 MM मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग ने 558MM के करीब बारिश का अनुमान लगाया था। यानी अनुमान से 12 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। वहीं सिर्फ जुलाई महीने की बात करें तो कुल 453.5 मिमी बारिश हुई है। पिछले 10 सालों में सिर्फ 2 बार ही जुलाई में बारिश का आंकड़ा 400MM पार हुआ है। 2023 में जुलाई माह में प्रदेश में सबसे ज्यादा 566.8MM पानी बरसा था। इससे पहले 2016 में 463.3MM पानी गिरा था। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ
धमतरी-कांकेर समेत 16 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट:दुर्ग-बेमेतरा, राजनांदगांव सहित 17 जिलों में बिजली गिरेगी; अब तक 62 फीसदी कम बरसा पानी

















Leave a Reply