मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के 26 जिलों में आज यलो अलर्ट जारी किया है। इनमें जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, कोंडागांव, बस्तर इन 7 जिलों में भारी बारिश के साथ बिजली गिरने, बादल गरजने और आंधी चलने का अलर्ट है। वहीं 19 जिलों में सिर्फ बिजली गिरने, बादल गरजने और आंधी चलने का ही अलर्ट है। कोरिया, जीपीएम, बिलासपुर, कबीरधाम, राजनांदगांव, बालोद, दुर्ग इन सात जिलों में सामान्य रहेगा। बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया बन सकता है, जो मानसूनी गतिविधियों को मजबूत कर सकता है। इस कारण छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर भारी बारिश और ओले भी गिर सकते हैं। पिछले 24 घंटे में सरगुजा, बस्तर और बिलासपुर संभाग के कई हिस्सों और रायपुर और दुर्ग संभाग के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। बिलासपुर जिले में बाढ़ में एक ही परिवार के 4 बच्चे बह गए, जिनमें से 3 की मौत हो गई। एक की तलाश जारी है। पचपेड़ी थाना क्षेत्र के टांगर गांव में एक 12 साल का बच्चा एनीकट पार करते समय नदी में बह गया। उसका पता नहीं चल पाया है। तलाश जारी है। वहीं बीजापुर जिले में नाव पलटने से 2 बच्चियां लापता हैं। 9 लोगों ने तैरकर अपनी जान बचाई। नाव में नारायणपुर के तीन ग्रामीण और कुछ स्कूली बच्चियों सहित कुल 11 लोग सवार थे। बलरामपुर में सबसे ज्यादा पानी बरसा राज्य के बेमेतरा जिले में अब तक 408.3 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से -49% कम है। महासमुंद (-20%) जिले में वर्षा सामान्य से काफी कम रही है, जिन्हें ‘क्षेत्र में वर्षा की कमी’ वाले क्षेत्रों में रखा गया है। सरगुजा जिले में भी 27% वर्षा की कमी दर्ज की गई है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, बेमेतरा, जगदलपुर में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। वहीं, बलरामपुर जिले में 1244.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 71% अधिक है। जांजगीर जिले में भी 24% अधिक बारिश हुई है। जून से जुलाई के बीच 623.1 MM मिमी बारिश प्रदेश में 1 जून से 30 जुलाई तक कुल 623.1 MM मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग ने 558MM के करीब बारिश का अनुमान लगाया था। यानी अनुमान से 12 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। वहीं सिर्फ जुलाई महीने की बात करें तो कुल 453.5 मिमी बारिश हुई है। पिछले 10 सालों में सिर्फ 2 बार ही जुलाई में बारिश का आंकड़ा 400MM पार हुआ है। 2023 में जुलाई माह में प्रदेश में सबसे ज्यादा 566.8MM पानी बरसा था। इससे पहले 2016 में 463.3MM पानी गिरा था जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ
धमतरी-गरियाबंद समेत 26 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट:दुर्ग-बालोद सहित 7 जिलों में मौसम सामान्य, बिलासपुर में बाढ़ में बहे 4 बच्चे, 3 की मौत



















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