दंतेवाड़ा-बीजापुर समेत 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट:रायपुर-दुर्ग सहित 15 जिलों में बिजली गिरेगी, बस्तर में 3 दिन बरसात; अब-तक 66% कम बारिश

छत्तीसगढ़ में आज 12 अगस्त से 15 अगस्त के बीच बस्तर संभाग के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, बस्तर, कोंडागांव और नारायणपुर इन 6 जिलों में बिजली गिरने, बादल गरजने के साथ भारी बारिश का भी यलो अलर्ट है। वहीं सरगुजा, रायपुर, दुर्ग, बालोद, धमतरी, कांकेर सहित 9 जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का यलो अलर्ट है। सिनॉप्टिक सिस्टम की बात करें तो कल यानी 13 अगस्त के आसपास बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य क्षेत्र में लो प्रेशर एरिया बनने से आज से पूरे प्रदेश में बारिश की एक्टिविटी बढ़ेगी। 1 अगस्त से 11 अगस्त के बीच 141 मिमी बारिश पिछले 36 घंटों में प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई। कुछ जिले शुष्क रहे। सबसे अधिक तापमान 35.2 डिग्री दुर्ग में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 22.0 डिग्री राजनांदगांव में दर्ज किया गया। ओवर ऑल इस माह की बारिश की बात करें तो 1 से 11 अगस्त के बीच 141.8MM पानी बरसना चाहिए था, लेकिन अब तक केवल 47.7MM पानी ही बरसा है। यानी सामान्य से लगभग 66 प्रतिशत कम बारिश हुई है। छत्तीसगढ़ के किस संभाग में कितनी बारिश ? 1 जून से अब तक प्रदेश में 674.8 मिमी बारिश हो चुकी है। बलरामपुर में सबसे ज़्यादा 1107.1 मिमी बारिश हुई है। बेमेतरा में सबसे कम 331.4 मिमी बारिश हुई है। जून से जुलाई के बीच 623.1 MM मिलीमीटर बारिश प्रदेश में 1 जून से 30 जुलाई तक कुल 623.1 MM मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग ने 558MM के करीब बारिश का अनुमान लगाया था। यानी अनुमान से 12 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। वहीं सिर्फ जुलाई महीने की बात करें तो कुल 453.5 मिमी बारिश हुई है। पिछले 10 सालों में सिर्फ 2 बार ही जुलाई में बारिश का आंकड़ा 400MM पार हुआ है। 2023 में जुलाई माह में प्रदेश में सबसे ज्यादा 566.8MM पानी बरसा था। इससे पहले 2016 में 463.3MM पानी गिरा था। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ

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