बस्तर संभाग में 100% तक ज्यादा पानी बरसा, दंतेवाड़ा में एक करोड़ रुपए के नोट कीचड़ में सने

बस्तर संभाग में 100% तक ज्यादा पानी बरसा, दंतेवाड़ा में एक करोड़ रुपए के नोट कीचड़ में सने पिछले सप्ताह प्रदेश में सक्रिय मानसून से बस्तर संभाग में जमकर बारिश हुई। इस दौरान यहां के कुछ जिलों में 100 फीसदी तक ज्यादा बारिश हो गई। यानी जितना पानी सप्ताहभर में गिरना चाहिए, उससे लगभग दोगुनी वर्षा हो गई। वहीं, रायपुर जिले में 57 फीसदी ज्यादा पानी गिरा है। प्रदेश के शेष हिस्सों में 21 से 27 अगस्त तक बहुत कम वर्षा हुई है। सरगुजा समेत कई जिलों में नो-रेन की स्थिति रही। यानी इस दौरान यहां बारिश ही रिकॉर्ड नहीं किया गया। गुरुवार को बारिश थमने के बाद अब भारी नुकसान सामने आ रहा है। दंतेवाड़ा में तो बाढ़ का पानी बैंकों में घुस गया और यहां बैंक चेस्ट में रखे 1 करोड़ रुपए बाढ़ के पानी और कीचड़ से सन गए। दंतेवाड़ा की सड़कों पर पानी भरा, पिछले एक हफ्ते में रायपुर में 57% बारिश बीजापुर जिले में बारिश से बांगापाल के पास नेशनल हाईवे की सड़क बह गई है। इससे छत्तीसगढ़-तेलंगाना के बीच संपर्क खत्म हो गया है। सुकमा जिले में झापरा पुल पर पानी भरा हुआ है, जिसके कारण ओडिशा से आवाजाही ठप पड़ी हुई है। बस्तर जिले में भी बाढ़ ने तबाही मचाई है। बिजली गुल: चार जिलों में करीब 40 से ज्यादा स्थानों पर या तो सड़क बह गई है या पुल-पुलिए ढह गए हैं। डेढ़ सौ से ज्यादा गांव अब भी अंधेरे में हैं। इसलिए ज्यादा पानी गिरा बंगाल की खाड़ी में 25 अगस्त से मानसूनी गतिविधियां तेज हुईं। बंगाल की खाड़ी में कुछ मजबूत सिस्टम बने। 26 और 27 अगस्त को ओडिशा तट से सटे बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम में एक सुस्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र बना। यह काफी मजबूत सिस्टम है। इस सिस्टम से पिछले दो दिन बस्तर संभाग जमकर बारिश हुई। आगे क्या… मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना सुस्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र 28 अगस्त से कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया। अब प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में अब कमी आएगी। पिछले सप्ताह छत्तीसगढ़ से लगे हुए ओडिशा तट और बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम का प्रभाव बस्तर संभाग में अधिक रहा। इस वजह से यहां पिछले दो-तीन दिनों में बहुत ज्यादा बारिश हुई। बाकी जगह कम बारिश हुई। यह मानसून का स्वभाव है। किसी क्षेत्र में सक्रियता अधिक होने पर वहां अधिक बारिश होती है और कहीं पर कम। यह बहुत कुछ सिस्टम के बनने के स्थान और उसकी गहनता पर निर्भर करता है। -डॉ. जीके दास, क्लाइमेटोलाजिस्ट

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