बिलासपुर में केमिकल से बन रहा नकली दूध, पनीर:होटलों-रेस्टोरेंट्स में सप्लाई, 200 रुपए किलो में बिक रहा; लीवर को कर सकता है डैमेज

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मिलावटी पनीर का धंधा बड़े पैमाने पर फैल चुका है। शहर की कई छोटी फैक्ट्रियों और दूध यूनिट्स में स्किम्ड मिल्क पाउडर से पनीर तैयार किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि तेल, यूरिया, कास्टिक सोडा और चीनी मिलाकर नकली दूध बनाया जा रहा है। शहर के कई होटल-रेस्टोरेंट्स में इसकी सप्लाई हो रही है। इस नकली दूध से पहले फैट अलग किया जाता है, फिर इसके पाउडर से पनीर बनाया जाता है जो दिखने में असली जैसा लगता है, लेकिन न तो उसकी बनावट असली है और न ही गुणवत्ता। शहर के एक डेयरी व्यवसायी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि असली पनीर को मसलने पर दूध जैसी बनावट नजर आती है, जबकि मिलावटी पनीर रबर जैसा खिंचता है। यही नहीं, नकली दूध से तैयार पनीर की लागत महज 150 रुपए प्रति किलो आती है, और उसे बाजार में 200 रुपए में आसानी से बेचा जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे मिलावटी पनीर का लगातार सेवन करने से पाचन तंत्र, लीवर पर सीधा असर पड़ सकता है। लंबे समय में यह सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट में पढ़िए कैसे बन रहा है मिलावटी पनीर, कौन बना रहा, कहां बन रहा और कैसे पहुंच रहा है आपकी थाली तक:- पहले ये दो तस्वीरें देखिए… नकली पनीर का सच ऐसे सामने आया भास्कर की टीम ने शहर में पनीर की खपत और प्रोडक्शन का एनालिसिस किया। साथ ही शहर और आसपास के मार्केट में सस्ती कीमतों पर उपलब्ध पनीर की जानकारी ली। इस दौरान पनीर उत्पादक व्यवसायी से लेकर ढाबा संचालकों से बातचीत की, तब नकली पनीर उत्पाद का सच सामने आया। 200 रुपए में 1 KG पनीर देने का दावा दैनिक भास्कर की टीम जब शहर की एक डेयरी दुकान पर ढाबा संचालक बनकर बल्क में पनीर की डिमांड करने पहुंची, तो दुकानदार ने 200 रुपए प्रति किलो की दर से पनीर आसानी से उपलब्ध कराने का दावा किया हालांकि, स्टिंग में वो शुद्ध पनीर देने का दावा कर रहा है। लेकिन, मार्केट में जिस पनीर की कीमत 380 से लेकर 400 रुपए प्रति किलो है, वही पनीर बिना मिलावट के 180 से 200 रुपए किलो में कैसे मिल सकता है। ढाबा में 180 रुपए किलो में पनीर बेचने आया शख्स एक ढाबा संचालक की मदद से सीसीटीवी वीडियो भी मिला है, जिसमें दूध बेचने वाला शख्स सस्ती कीमत यानी 180 रुपए में पनीर देने पहुंचा था। उसके पैकेट में रखे पनीर को खोलने पर गांठ और रंग पीला दिख रहा था। वो बाइक पर घूम-घूमकर सस्ता पनीर बेचने का दावा करता है, जिसका उपयोग होटल और ढाबों में ज्यादा होता है। शहर के कई जगहों पर संचालित है मिल्क प्रोडक्ट की फैक्ट्रियां पड़ताल में यह भी सामने आया कि मिलावटी पनीर शहर की छोटी-छोटी दुग्ध यूनिट्स और कुछ फैक्ट्रियों से सप्लाई किया जा रहा है। शहर के राजकिशोर नगर, चिंगराजपारा और सिरगिट्टी में मिल्क प्रोडक्ट से जुड़ी फैक्ट्रियां संचालित हैं, जहां पनीर, दही और खोआ तैयार किया जाता है। यहां से एजेंट और सेल्समैन बाइक के जरिए पनीर को बाजार तक पहुंचाते हैं और स्थानीय दुकानों, ढाबों और डेयरियों में खपाते हैं। ज्यादातर मिलावटी पनीर होटल, ढाबों और डेयरी दुकानों में बेचा जाता है, जहां इसकी डिमांड अधिक होती है। इस तरह के पनीर की न तो गुणवत्ता तय मानकों के अनुरूप होती है और न ही इसकी कीमत ज्यादा। यही वजह है कि यह बाजार में तेजी से बिक भी जाता है। 21 लाख से अधिक की आबादी, 2.22 लाख लीटर दूध का उत्पादन एकीकृत न्यादर्श सर्वेक्षण के मुताबिक, जिले में रोजाना करीब 2 लाख 55 हजार लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। जिले की जनसंख्या 21 लाख से अधिक है। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति दूध उत्पादन 100 ग्राम से भी कम बैठता है। हालांकि, अन्य स्रोतों से बाजार में 85 से 90 हजार लीटर दूध और पहुंचता है, लेकिन इनमें से अधिकतर दूध बाहरी जिलों और राज्यों से आता है। इन दोनों स्रोतों को जोड़ भी लें, तब भी कुल उपलब्ध दूध प्रति व्यक्ति महज 140 ग्राम प्रतिदिन ही होता है। यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला है। लेकिन इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि जब जिले में इतनी मात्रा में दूध है ही नहीं, तो फिर बाजार में भरपूर दूध और पनीर आखिर आ कहां से रहा है। जाहिर है, कुछ मात्रा में ऐसा दूध और पनीर भी बन रहा है जो प्राकृतिक स्रोतों से नहीं, बल्कि मिलावट या कृत्रिम तरीकों से तैयार हो रहा है। जानिए कैसे बनता है मिलावटी पनीर पड़ताल में सामने आया कि जितना पनीर तैयार करना होता है, उसकी मात्रा के अनुसार करीब 25% तक सपरेटा (स्किम्ड मिल्क) लिया जाता है। इसके बाद इसमें सोडियम बाइकार्बोनेट और पाम ऑयल मिलाया जाता है। पाम ऑयल दूध में फैट की कमी को पूरा करता है। कई जगहों पर सपरेटा की जगह सीधे स्किम्ड मिल्क पाउडर का उपयोग भी किया जाता है। इन सभी को मिलाकर एक घोल तैयार किया जाता है, जिसकी लागत 20 से 25 रुपए प्रति लीटर आती है। इस घोल से लगभग 1 किलो पनीर तैयार होता है, जिसकी लागत 150 रुपए आती है और होलसेल बाजार में 170 रुपए किलो तक बेचा जाता है। 60 रुपए लीटर दूध, बनाने में 300 तक का खर्च दुग्ध व्यवसायी संघ के अध्यक्ष मुकेश मिश्रा बताते हैं कि एक किलो स्टैंडर्ड पनीर बनाने के लिए 5 लीटर दूध की जरूरत पड़ती है। 1 लीटर दूध 50 रुपए से अधिक में आता है। एक किलो पनीर के लिए 250 रुपए का तो दूध ही लगता है। फिर प्रोसेसिंग एंड प्रोडक्शन का चार्ज अलग। दूध व्यवसायी बोला- मिलावटी पनीर की कीमत कम शहर के एक डेयरी व्यवसायी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि असली पनीर को मसलने पर उसमें दूध जैसी बनावट नजर आती है, जबकि मिलावटी पनीर रबर जैसा महसूस होता है। नकली पनीर आमतौर पर पाउडर, सोया और कुछ केमिकल्स से तैयार किया जाता है, इसी वजह से इसकी कीमत भी कम होती है। सपरेटा क्या होता है सपरेटा दूध वह दूध होता है जिससे मलाई (क्रीम) निकाल दी जाती है। “सपरेटा” शब्द का मतलब है अलग किया हुआ। दूध को एक खास मशीन में घुमाया जाता है, जिससे मलाई ऊपर आ जाती है और अलग हो जाती है। जो दूध बचता है, वही सपरेटा दूध कहलाता है। निकाली गई मलाई से घी बनाया जाता है, और बचे हुए सपरेटा दूध से पनीर, दही या मिठाई जैसे चीज़ें बनाई जाती हैं। स्किम्ड मिल्क क्या है स्किम्ड दूध वह दूध होता है जिसमें से मोटा हिस्सा (मलाई या वसा) निकाल दिया जाता है। इसे फैट-फ्री (वसा रहित) कहा जाता है, लेकिन इसमें थोड़ी सी वसा (लगभग 0.1%) रह जाती है। दूध में जो वसा होती है, वह ज़्यादातर संतृप्त वसा होती है। यह वसा ज़्यादा हो तो हानिकारक हो सकती है, लेकिन थोड़ी मात्रा में यह शरीर के लिए फायदेमंद होती है। एक्सपर्ट बोले- स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है मिलावटी पनीर डॉ. अखिलेश देवरस बताते हैं कि मिलावटी पनीर खाने से पेट भारी महसूस होता है। स्टार्च, वेजिटेबल ऑयल और अन्य एडिटिव्स से बना पनीर खाने से डायरिया और फूड पॉयजनिंग के केस बढ़ सकते हैं। ………………………… इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… मरी हुई मक्खियों वाले पानी में बन रहा नकली पनीर,VIDEO:नाले के ऊपर फैक्ट्री, 200 रुपए किलो में बिक रहा; हार्ट-लीवर करेगा डैमेज रायपुर में एक नकली पनीर बनाने वाली फैक्ट्री का खुलासा हुआ है। नकली पनीर दूध पाउडर, पाम ऑयल और फैट से तैयार किया जा रहा है। शंकर नगर इलाके में नाले के ऊपर फैक्ट्री चल रही है। जहां गंदगी के बीच मरी हुई मक्खियों वाले पानी में इसे बनाया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर…

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