बिलासपुर में बादल में छिपा चांद…सुहागिनों ने किया इंतजार:दुल्हन सी सजी महिलाओं में दिखा उत्साह; पति की लंबी आयु के लिए रखा निर्जला व्रत

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में शुक्रवार (10 अक्टूबर) को सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र की कामना कर करवा चौथ पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। सुहागिन महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पति की लंबी उम्र की कामना की। शहर सहित जिले में बदली की वजह से चांद बादल में छिप गया। जिसके चलते सुहागिन महिलाएं चांद का दीदार करने इंतजार करती रहीं। फिर रात में चंद्रोदय होने पर अर्ध्य देकर महिलाओं ने छलनी से चांद का दीदार किया। इस दौरान महिलाएं दुल्हन की तरह सजी-धजी नजर आईं। बादलों में छिपा चांद, इंतजार करती रहीं सुहागिन महिलाएं इस दौरान मंदिर और घरों की छत पर पूजा-अर्चना करने के बाद महिलाएं चांद का बेसब्री से इंतजार करती नजर आईं। चांद निकलते के इंतजार में महिलाएं निराश दिखीं। उन्होंने पूजा कर दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने की मनोकामनाएं मांगी। पति-पत्नी के अटूट प्रेम का प्रतीक है करवा चौथ पर्व करवा चौथ व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। सुहागिन महिलाएं साल भर इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करती हैं। इस पर्व को मनाने के लिए महिलाएं एक दिन पहले से ही तैयारी में जुटी रहीं। इस दौरान उन्होंने हाथों पर मेंहदी लगाया। साथ ही पूजा की तैयारी में जुटी रहीं। 10 अक्टूबर को व्रती महिलाएं सुबह से स्नान कर भगवान शिव और पार्वती की पूजा-अर्चना की, जिसके साथ ही निर्जला व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा आराधना की। शाम होते ही महिलाएं सज-धज कर पूजा की थाल सजाकर चंद्रमा, शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय और गौरा की मूर्तियों की पूजा कर चौथ माता की आराधना की। सुहागिन महिलाओं ने सुनी करवा चौथ की पौराणिक कथा करवा चौथ पर शुक्रवार को पंजाबी समाज की महिलाओं ने सामूहिक रूप से वीरमाता की कथा सुनी। मानसी मलिक ने बताया कि मान्यता है कि वीरमाता 7 भाइयों की इकलौती बहन थीं। वीरावती इकलौती बेटी थी, इसने अपने पहले करवा चौथ व्रत में दिन भर भूखी-प्यासी रहकर उपवास किया। शाम होते-होते वह भूख-प्यास की वजह से बेहोश होने लगी। उसके भाई वीरावती की ऐसी हालत देखकर व्याकुल हो उठे और उन्होंने एक झूठा चंद्रमा दिखाकर बहन से व्रत तुड़वा दिया। व्रत में छल करने से उसके पति की मौत हो गई। दुखी वीरवती ने देवी मां से क्षमा मांगी और मार्गदर्शन करने की प्रार्थना की। माता ने उसे फिर से विधिपूर्वक व्रत रखने का निर्देश दिया। माता की बात मानकर वीरावती ने अगली करवा चौथ का व्रत लगन और ईमानदारी से किया। जिससे उसके पति को जीवनदान मिला। यह कथा सिखाती है कि व्रत में छल या अधूरी निष्ठा नहीं होनी चाहिए। चौथ को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हिंदू धर्म में करवा चौथ को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। यह व्रत हर साल कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करतीं हैं। करवा चौथ में करवा का अर्थ है टोंटी वाली मिट्टी का बर्तन और चौथ का अर्थ है चौथा। मिट्टी के बर्तन में महिलाएं चंद्रमा को जल चढ़ाती हैं। चंद्र दर्शन के बाद व्रती महिलाएं अपने पति के हाथों व्रत खोलती हैं। पंजाबी समाज की महिलाएं रखती हैं करवाचौथ का व्रत बिलासपुर में इस परंपरा की शुरुआत दयालबंद से हुई थी। वैसे तो करवाचौथ का व्रत पंजाबी समाज की महिलाएं रखती हैं, लेकिन इसकी लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी है कि हिंदू समाज की महिलाएं भी यह व्रत रखने लगी हैं। पंजाबी समाज की महिलाओं ने की सामूहिक पूजा शहर में रजनी ऋषि के निवास में पंजाबी समाज की सुहागिन महिलाओं ने करवा चौथ पर सामूहिक रूप से पूजा अर्चना की। साथ ही सुहागिनों ने अपने पति की दीर्घायु कामना की। रजनी ऋषि के निवास में 25 सालों से करवा चौथ पर पूजन की परंपरा चल रही है। यहां नेहा ऋषि, योगिता, मानसी मलिक, सुनीता चावला, रिचा चावला, रेनी अग्रवाल, शिल्पा शाह, वाणी बजाज, रूही बजाज, अकांक्षा जाजोदिया, वेदिका मंगवानी, सिमरन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने करवा चौथ की कथा सुनी।

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