मिशन 2026 में बाधा.. ठेकेदारों का भुगतान अटका:बस्तर के 6 जिलों में मंजूर 213 सड़कों में से 156 का काम शुरू नहीं, बाकी अधूरी

एक तरफ बस्तर को नक्सलमुक्त बनाने के लिए पुलिस, प्रशासन और सरकार सामूहिक प्रयास कर रहे हैं। मिशन 2026 को लेकर जिस तरह से नक्सलियों के खात्मे के साथ अंदरूनी इलाकों तक विकास पहुंचाने अधोसंरचना पर काम हो रहे हैं, उनमें राज्य सरकार से ठेकेदारों को भुगतान नहीं होने से अधिकांश सड़कों का काम थम गया है। बस्तर संभाग के 6 जिलों में कुल 2115.64 किमी की 213 सड़कों का काम 1385 करोड़ रुपए की लागत से शुरू किया गया। इनमें से केवल 57 सड़कों का काम शुरू हुआ, पर भुगतान न होने से काम बंद है। जबकि अब भी 156 सड़कों का काम ही शुरू नहीं हो पाया है। गौरतलब है कि अंदरूनी इलाकों को पक्की सड़कों से जोड़ने आरसीपी एलडब्ल्यूई यानी रोड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट फॉर लेफ्ट विंग एक्स्ट्रीमिज्म डिस्ट्रिक्ट्स के जरिए काम किया जा रहा है। इसके तहत मंजूर की गई इन सड़कों के जरिए अंदरूनी इलाकों तक विकास पहुंचाया जाना था। बताया जाता है कि बस्तर संभाग में करीब 200 करोड़ से ज्यादा का भुगतान अटका हुआ है, जिसके चलते ठेकेदारों ने भी काम पूरा करने हाथ खड़े कर दिए हैं। अप्रैल से भुगतान नहीं, कई ठेकेदार दिवालिया हो सकते हैं: बताया ये भी जाता है कि नए वित्तीय वर्ष में अप्रैल 2025 से ठेकेदारों को सड़क निर्माण का भुगतान ही नहीं हो सका है। इनमें अधिकांश सड़कें सुकमा, नारायणपुर व दंतेवाड़ा जिलों की हैं। भुगतान न होने की स्थिति में ठेकेदार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, कुछ ठेकेदार दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। उनका कहना है कि यदि पीडब्ल्यूडी उनके काम का भुगतान करती है, तभी वे आगे काम कर पाएंगे। 1400 करोड़ में बननी हैं सड़क, ये नक्सलवाद से निर्णायक लड़ाई में अहम सड़क पहुंची तो पुवर्ती हुआ नक्सलमुक्त सुकमा जिले का पुवर्ती गांव। यह गांव दुर्दांत नक्सली हिड़मा का है। यह गांव नक्सलियों के कब्जे में था, लेकिन गांव तक सड़क पहुंची तो कैंप खुला। कैंप खुला तो यहां स्कूल, हॉस्पिटल, आंगनबाड़ी खुल गए। मोबाइल नेटवर्क भी आ गया। अब यह गांव पूरी तरह से नक्सलियों से मुक्त है। जगरगुंडा में 6 महीनों का स्टॉक करते थे
जगरगुंडा, नाम सुनते ही लोग यहां जाने से भी कतराते थे। यहां बारिश से पहले ही 6 महीनों का राशन जमा कर लिया जाता था। राशन छोड़ने के लिए भी 2000 जवानों की जरूरत पड़ती थी। रास्ते में राशन की लूट, नक्सलियों के हमले आम थे। सड़क बनी तो अब 12 महीने राशन आसानी से पहुंच जाता है। इन प्रमुख सड़कों का काम अटका सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक के जगरगुंडा-बासागुड़ा से धुरनधरभा, कोंडासावली से सरपंचपारा, पिड़मेल से कासलपाड़, बंजामपल्ली से ईतापारा, गुमोड़ी से हैबापारा, पांडूपारा से बटेर, अचकट से चिमलीलावा, केरलापेंदा-एलमागुंडा से टोंडामरका । केंद्र से ही भुगतान नहीं मिला है, जिसके चलते ठेकेदारों को भुगतान में दिक्कत आ रही है। पूर्व में जो भुगतान मिला था, वह तकनीकी दिक्कतों के चलते नहीं हो सका। ठेकेदारों को भुगतान संबंधी पत्राचार लगातार किया जा रहा है। विभाग को ही केंद्र से फंड नहीं मिल पाया है।
-जीआर रावट, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी 40% जमा नहीं कर रही राज्य सरकार, केंद्र की राशि भी अटकी करीब 1394.06 किमी सड़क का निर्माण तकरीबन पूरा होने को है। बताया जाता है कि राज्य सरकार ने अपना राज्यांश ही नहीं दिया है। दरअसल, आरसीपी एलडब्ल्यूई के तहत केंद्र व राज्य सरकार के अंश को मिलाकर एक बजट बनाया जाता है। इसमें 60% हिस्सा केंद्र का और 40% हिस्सा राज्य सरकार का होता है। राज्य सरकार जब तक अपना हिस्सा जमा नहीं करती, तब तक केंद्र अपने हिस्से का 60% रिलीज नहीं करता। राज्यांश जमा नहीं किए जाने के कारण केंद्र से बजट भी नहीं मिल रहा है, जिसके कारण ठेकेदारों का करीब 200 करोड़ से ज्यादा भुगतान अब तक अटका हुआ है।

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