युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में 13 हजार से ज्यादा शिक्षकों को अतिशेष बताकर नए स्थानों पर पोस्टिंग कर दी गई। इसे लेकर बवाल मचा हुआ है। प्रदेशभर में 2 हजार से ज्यादा अतिशेष शिक्षकों ने अपनी नई पोस्टिंग को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। फिलहाल संभागों के कमिश्नर अपने कार्यालय में एक-एक शिक्षक के आवेदन पर सुनवाई कर रहे हैं। ज्यादातर शिक्षकों ने वरिष्ठता क्रम बदलने की शिकायत की है। किसी का कहना है काउंसिलिंग में जूनियर को मनपसंद पोस्टिंग चुनने का मौका पहले दिया गया। उन्हें बाद में बुलाया गया। किसी ने आपत्ति की है कि उन्हें जिस स्कूल में भेजा गया है वहां पद ही खाली नहीं है। कई शिक्षकों का रिटायरमेंट के एक-डेढ़ साल पहले तबादला कर दिया गया है। युक्तियुक्तकरण के तुरंत बाद ही आपत्तियों का सिलसिला शुरू हो गया था। इसके खिलाफ 26 सौ से ज्यादा शिक्षकों ने तो कोर्ट में अर्जी लगा दी। इसी बीच अतिशेष शिक्षकों की लगातार आपत्ति के बाद शासन ने कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारी को आपत्तियों की सुनवाई के लिए अधिकृत कर दिया। कलेक्टर ने मामलों का निपटारा किया लेकिन जिन शिक्षकों के आवेदन निरस्त हुए वे फिर से शासन के सामने शिकायत लेकर पहुंच गए। आरोप लगाया गया कि कलेक्टोरेट में उनके मामले को सुना ही नहीं गया है। तबादलों में हुई नियमों की अनदेखी आपत्तियां कम, आग्रह-निवेदन ज्यादा मुख्यालय में सिर्फ 31 आपत्तियां
नवा रायपुर स्थित लोक शिक्षण संचालनालय में अभी तक सिर्फ 31 आपत्तियां ही दर्ज कराई गईं है। अफसरों का कहना है संभाग स्तर पर उनकी आपत्ति अमान्य होने की स्थिति में ही शिक्षक संचालनालय में नए सिरे से आवेदन कर रहे हैं। अभी तक एक-दो आवेदनों में ही तबादले को तकनीकी त्रुटि की शिकायत है। अन्य सभी में शिक्षकों ने अपना तबादला रद्द कराने का ही आग्रह किया है। आगे क्या: राज्य में हर संभाग के कमिश्नर शिक्षकों की आपत्ति की सुनवाई के बाद परीक्षण करेंगे। इस दौरान तबादला या नई पोस्टिंग नियमों के अनुसार नहीं होगी, संबंधित मामले में आदेश को निरस्त कर पुरानी पोस्टिंग पर बहाल किया जाएगा।
युक्तियुक्तकरण में अजब-गजब खेल:जूनियर को मनपसंद पोस्टिंग, सीनियर का बिना पद के तबादला, 2000 शिक्षकों ने जताई आपत्ति

















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