असुविधा:रोज 6 हजार से ज्यादा नंबर प्लेट लग रही थी, अब 2 हजार भी नहीं, कई सेंटर हुए बंद

राज्य में 2019 के पूर्व के वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बदलने का काम इतना धीमा हो गया है कि तीसरी अंतिम तारीख गुजरने के बावजूद आंकड़ा 11 लाख के पार ही पहुंचा है। जबकि 52 लाख से ज्यादा वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगानी है। राजधानी सहित कई सेंटरों में तो दिन में एक-दो वाहन ही पहुंच रहे थे। इसलिए उन सेंटरों को बंद करना पड़ गया है। पिछले साल सितंबर-अक्टूबर तक रोज औसतन 6 हजार वाहनों के नंबर प्लेट बदले जा रहे थे, अब ये संख्या बमुश्किल दो हजार तक पहुंच रही है। इसके बावजूद नंबर प्लेट लगाने का जिम्मा जिन कंपनियों को सौंपा गया है उनकी ओर से काेई अतिरिक्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। नंबर प्लेट लगाने का ठेका लेने वाली कंपनी के जिम्मेदार परिवहन विभाग और जिला प्रशासन के प्रयासों के भरोसे बैठे हैं। परिवहन विभाग के अधिकारी पुलिस और प्रशासन के अफसरों के साथ पिछले एक साल के दौरान दो बार फील्ड में उतरे थे। वाहन चालकों को रोड पर रोककर नंबर प्लेट लगाने की समझाइश दी थी। उस दौरान हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का आंकड़ा बढ़ा था। कई बार तो स्थिति ये आ गई थी कि नंबर प्लेट लगाने वाले सेंटरों में वाहन चालकों को दो-दो, तीन-तीन घंटे इंतजार करना पड़ता था। प्रशासनिक अमला और परिवहन विभाग के अधिकारी जैसे ही दूसरे कामों में व्यस्त हुए सेंटरों में वाहन पहुंचने की संख्या कम होने लगी। नंबर प्लेट लगाने का ठेका लेने वाली कंपनी के जिम्मेदारों ने उसके बाद अपनी ओर से कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं किया और स्थिति ये हो गई कि अब पहले की तुलना में एक तिहाई वाहन चालक भी सेंटर नहीं पहुंच रहे हैं। आंखों देखी – नहीं लगती कतार, पसरा रहता है सन्नाटा केवल 6 नंबर प्लेट बदले
पंडरी…आरटीओ का सिटी ऑफिस। उसी से सटे एक निजी कांप्लेक्स में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का सेंटर। दोपहर 12 बजे जब भास्कर टीम पहुंची तो वहां सन्नाटा था। पूछने पर पता चला सुबह 6 वाहन चालक आए थे, उनकी गाड़ियों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाकर दी गई। ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन करवाने वाले इन वाहन मालिकों का काम मिनटों में हो गया था, क्योंकि भीड़ ही नहीं थी। एक भी वाहन चालक नहीं पहुंचा
आरंग हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का सेंटर। दोपहर करीब 1.30 बजे बाहर से सेंटर बंद जैसा दिखाई दे रहा था। नंबर प्लेट लगाने वाले स्टाफ भी चाय-नाश्ता करने चले गए थे। कर्मचारी लौटे तो पता चला सुबह से एक भी वाहन नंबर प्लेट लगाने के लिए नहीं लाया गया था। नंबर प्लेट के लिए रजिस्टर में एंट्री करने वाले एक स्टाफ ने बताया जुलाई से ही नंबर प्लेट लगाने वालों की संख्या कम होने लगी थी। रायपुर में 7 सेंटर बंद
रायपुर में सबसे अधिक 13 लाख से ज्यादा वाहन पंजीकृत हैं। इस वजह से यहां सबसे ज्यादा 97 से ज्यादा सेंटर खोले गए थे ताकि लोगों को सहूलियत हो। धीरे धीरे लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाना कम किया और आमानाका, टाटीबंध, सड्डू, खमतराई, तिल्दा, शंकरनगर और माना के सेंटरों को बंद करना पड़ा। एक नजर में
राज्य में 2019 के पूर्व पंजीकृत 52 लाख से ज्यादा वाहन {सुप्रीम कोर्ट ने पहले 3 अप्रैल 2025 अंतिम तारीख की थी तय {नंबर प्लेट नहीं लगी तो 15 अप्रैल 2025 नई तारीख तय की {अब 31 अक्टूबर 2025 अंतिम तारीख की गई है तय {सितंबर-अक्टूबर 2024 तक रोज औसतन 6 हजार लगती थी नई प्लेट। क्या कहते हैं जिम्मेदार
आर्डर की स्थिति दिन प्रतिदिन घटती जा रही है। विभाग और कंपनी दोनों मिलकर लगातार शिविर आयोजित कर रहे हैं। परंतु उसके बाद भी नंबर प्लेट का रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया जा रहा है।
आशीष मिश्रा, रियल मेजॉन इंडिया लिमिटेड
त्योहार की वजह से भी नंबर प्लेट लगाने वालों की संख्या में कमी आई होगी। इसके लिए अब सख्ती से प्रयास करेंगे। कंपनी को भी कहा जाएगा कि कोई न कोई अभियान चलाकर लोगों को जागरुक करे।
मनोज ध्रुव, डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर​​​​​​​

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