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अस्पताल है या राहत कैंप…?:सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में हर घंटे में एक डिलिवरी, सभी 150 बेड फुल… अब एक बेड पर बच्चों के साथ 2-2 प्रसूताएं

ये तस्वीर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेकाहारा के गायनी वार्ड की है, जहां एक ही बेड पर दो प्रसूताओं को रखा गया है। 150 बिस्तर वाले इस वार्ड में बुधवार को बेड फुल हो गया। इसके चलते वार्ड नंबर 5 और 6 में एक-एक बेड पर दो-दो प्रसूताओं को रखा गया है। बच्चों को साथ लिए प्रसूताओं ने बेड के एक-एक हिस्से को सिरहाना बनाया है। इसे लेकर मरीजों के परिजनों ने खासी नाराजगी जताई, लेकिन बेड नहीं होने के कारण उन्हें आखिरकार शांत होना पड़ा। दरअसल, अस्पताल में औसतन हर घंटे एक डिलिवरी होती है। यानी एक दिन में सीजेरियन-नॉर्मल मिलाकर करीब 24 डिलिवरी होती है। अस्पताल के गायनी वार्ड में कुल 150 बेड हैं। किसी प्रसूता को एक दिन तो किसी को एक हफ्ते तक अस्पताल में भर्ती रखना पड़ता है। अब हालत यहां तक पहुंच गई है कि करीब 10 बेड पर दो-दो प्रसूताओं को शिशुओं के साथ सुलाया गया है। प्रसूता वार्ड में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते ही अलग से 700 बिस्तर का मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण किया जाना है। इसके लेकर सारी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। ^अंबेडकर हॉस्पिटल में दूसरे जिलों के स्वास्थ्य केंद्रों समेत पूरे प्रदेश से मरीज रेफर किए जाते हैं। किसी को मना नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि भर्ती प्रसूताओं की संख्या बढ़ जाती है। बेड की कमी को देखते हुए मातृ-शिशु अस्पताल बनाया जा रहा है। – डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक अंबेडकर हॉस्पिटल बदइंतजामी पर हाई कोर्ट जता चुका है नाराजगी अंबेडकर अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं को लेकर हाई कोर्ट ने कुछ मामलों में स्वत: संज्ञान लेकर अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग से जवाब-तलब किया है। मई में 2 मामलों में स्वत: संज्ञान लेकर स्वास्थ्य सचिव को हाई कोर्ट ने तलब किया था। अंबेडकर अस्पताल में एचआईवी पॉजिटिव मां के नाम का पोस्टर शिशु के पास चिपकाने को लेकर भी हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने अंबेडकर अस्पताल को मरीज को मुआवजा देने का आदेश दिया था। अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को 2 लाख रुपए मुआवजा दिया था।
मानवाधिकार आयोग ने अस्पताल मेंं फ्रीजर खराब, शव को दफनाने 2 गज जमीन नहीं, इस खबर पर स्वत: संज्ञान लेकर सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जवाब मांगा था।

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