छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से सरगुजा संभाग में सबसे ज्यादा बारिश हुई है। सूरजपुर जिले में लगातार पानी गिरने से पुलिया बह गई। जिससे प्रतापपुर ब्लॉक के मदनगर गांव में बलरामपुर को जोड़ने वाले इस रोड पर आवाजाही बंद है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पुल के बचे एक हिस्से से साइकिल और बाइक से आना-जाना कर रहे हैं। इस बीच मौसम विभाग ने आज रायपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा, सरगुजा और जशपुर इन सात जिलों में बिजली गिरने का यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं बलरामपुर में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहेगा। प्रदेश में बीते 48 घंटे में बलरामपुर के कुछ स्थानों को छोड़कर भारी बारिश नहीं हुई है। अगले पांच दिन यही स्थिति बने रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक 4 अगस्त तक मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश कम होगी। प्रदेश के अन्य जगहों पर भी गरज चमक के साथ सामान्य वर्षा हो सकती है। पिछले चार दिनों में प्रदेश में सिर्फ 24.1 MM पानी बरसा 28 जुलाई तक 603 MM औसत बारिश प्रदेश में हुई थी। 29 जुलाई को यही आंकड़ा 611.5 MM और 30 जुलाई को 623 MM और 31 जुलाई को 627.1MM तक पहुंचा। यानी 28 और 29 जुलाई के बीच 8.5 MM, 29 और 30 जुलाई के बीच 11.5 MM, 30 से 31 जुलाई के बीच 4.1MM, 28 और 30 जुलाई के बीच सिर्फ 24.1 MM औसत बारिश ही दर्ज की गई। जुलाई में 453 मिलीमीटर बारिश जुलाई महीने की बात करें तो अब तक 457 मिमी बारिश हो चुकी है। आखिरी 6 दिनों यानी 25 जुलाई से 29 जुलाई तक 157 मिमी बारिश हुई है। पिछले दस सालों में सिर्फ दो बार ही जुलाई में बारिश का आंकड़ा 400MM पार हुआ है। 2023 में जुलाई माह में प्रदेश में सबसे ज्यादा 566.8MM पानी बरसा था। इससे पहले 2016 में 463.3MM पानी गिरा था। इस लिहाज से 10 साल में दूसरी बार ही प्रदेश में इतनी बारिश रिकॉर्ड की गई है। लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियमित समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ
सूरजपुर में पुलिया बही…बचे हिस्से से आना-जाना कर रहे लोग:बेमेतरा-धमतरी समेत 10 जिलों में बिजली गिरेगी, 4 दिन सेंट्रल पार्ट में कम बारिश

















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