उस मां के दुख का अंदाज लगाइए जिसके जवान बेटे की मौत के बाद अस्थियों पर हक जताने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ रही हो। यह लड़ाई भी उन परिजन और समाज से करनी पड़ी, जिसने पति की मौत के बाद पिछले 15 साल से उसे समाज से बहिष्कृत कर रखा था। छह घंटे तक मां अकेले लड़ाई लड़ती रही, जब तक पुलिस और गांव के बुजुर्गों ने आकर हस्तक्षेप नहीं किया। आखिरकार ममता की जीत हुई और बड़े-बुजुर्गों की समझाइश में यह फैसला लिया गया कि बेटे के अस्थि कलश पर पहला हक मां का है। मामला रायगढ़ के कोतरा रोड थाना क्षेत्र के चिराई पानी गांव का है। यहां की विमला अगरिया को पति की मौत के बाद समाज ने बदचलन का आरोप लगाकर 15 साल पहले समाज से बहिष्कृत कर दिया था। वह अकेले बेटे अरुण और बेटी नीलम के सहारे जीवन बिता रही थी। दिवाली पर सोमवार की शाम करीब 4 बजे अरुण अगरिया (19) की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उसका अंतिम संस्कार समाज की परंपरा के अनुसार किया गया। गुरुवार को तीजनहावन कार्यक्रम था। तीसरे दिन परंपरा के तहत अस्थि कलश उठाने मां विमला अगरिया मुक्तिधाम पहुंचीं। इसी समय जेठ मदन सुंदर अगरिया भी पहुंच गए। जेठ मदन ने अस्थियों पर हक जताया। इस पर विमला बिफर पड़ी। दोनों के बीच जमकर विवाद हुआ। यह बात कुछ ही देर में पूरे गांव तक पहुंच गई। विवाद की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। सुबह 9 बजे से चल रहे विवाद का दोपहर 3 बजे तक कोई हल नहीं निकला। इसके बाद गांव के बड़े-बुजुर्गों को सामने किया गया। उनकी मौजूदगी में फैसला लिया गया और अस्थि कलश मां को सौंपा गया। अगरिया समाज के जिला अध्यक्ष उबरन अगरिया का कहना है कि वे तीन साल से अध्यक्ष हैं, लेकिन सामाजिक बहिष्कार की जानकारी उन्हें नहीं है। यदि विमला को समाज से अलग किया गया है, तो इसकी जांच होगी। शिक्षा व जागरूकता से खत्म होगा सामाजिक बहिष्कार
समाजशास्त्री किरण सिंह का कहना है कि आज भले ही महिला सशक्तिकरण की बात होती हो, लेकिन कुछ क्षेत्रों में महिलाओं को ऐसी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। बिना साबित हुए समाज में किसी के खिलाफ कुछ भी आरोप लग रहे हैं, जो कि गलत है। किसी भी महिला का चरित्र हनन नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा हो रहा है, तो अपराध की श्रेणी में आता है। सामाजिक उत्थान की बात करें, तो समाज आगे तभी बढ़ेगा जब समाज में शिक्षा और जागरूकता बढ़ेगी। इधर, जशपुर में अंधविश्वास में वारदात जादू-टोना का शक, बुआ टांगी से हत्या की जशपुर जिले के बगीचा थाना क्षेत्र के ग्राम जामुनजोबला में दीपावली के दूसरे दिन एक युवक ने जादू-टोना के शक में अपनी बुआ की हत्या कर दी और फूफा पर जानलेवा हमला किया। घटना 21 अक्टूबर की शाम करीब 5 बजे हुई, जब सुखाड़ी कोरवा (40) अपने पति पंकज कोरवा के साथ घर लौट रही थी। मुकेश ने टांगी से बुआ की गर्दन पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बीच-बचाव करने पर उसने पंकज पर भी वार किया, लेकिन पंकज बचने में सफल रहा। आरोपी मुकेश पहाड़ी कोरवा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसने बताया कि उसे शक था कि उसकी बुआ ने तंत्र-मंत्र किया, जिससे उसके दोनों बच्चे बीमार हो गए।
रूढ़िवाद पर ममता भारी…:मां ने समाज से लड़कर हासिल की अपने बेटे की अस्थियां

















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