छत्तीसगढ़ के धमतरी में पीला दशहरा के अवसर पर मंदर माई की ज्योत जवारा शोभायात्रा निकाली गई। दशहरा के दूसरे दिन रात्रि में बरसते पानी के बीच ज्योत जवारा का विसर्जन किया गया। इस दौरान छाते के सहारे ज्योत को विसर्जन स्थल तक ले जाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस वर्ष कुल 160 ज्योत प्रज्वलित की गई थीं। शुक्रवार शाम को धमतरी शहर के मराठापारा स्थित मां मंदर माई मंदिर से जवारा और कलश की शोभायात्रा पूरी श्रद्धा के साथ शुरू हुई। बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह चरम पर था। मां मंदर माई की विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद ज्योत विसर्जन का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। कलश यात्रा मराठापारा से होते हुए सदरबाजार रोड, गणेश चौक, रामबाग, बिलाईमाता मंदिर से शीतला मंदिर पहुंची। शीतला मंदिर के महिमा सागर तालाब में कलश और जवारा की पूजा के बाद उनका विसर्जन किया गया। शोभायात्रा में जवारा पूजा और सुख-समृद्धि की कामना की शोभायात्रा के दौरान मराठापारा और अन्य स्थानों पर लोगों ने पूजा की थाल सजाकर जवारा की पूजा की और सुख-समृद्धि की कामना की। बाना धारण करने वाले युवा आकर्षण का केंद्र रहे, जबकि श्रद्धालु बाजे की धुन पर झूमते नजर आए। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदर माई की पूजा कई सालों से की जा रही है और यह जवारा परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाई जा रही है। दूर-दूर से भक्त मनोकामना ज्योत प्रज्वलित करने आते हैं। मंदर माई मंदिर की 200 वर्ष पुरानी परंपरा मंदर माई मंदिर के पुजारी ने बताया कि परंपरा के अनुसार, नवरात्र पंचमी के दिन से मनाया जाता है। भक्त मंदिर में मनोकामना ज्योत जलवाते हैं। पांच दिनों तक माता की आराधना के बाद एकादशी के दिन विसर्जन यात्रा निकाली जाती है। यह परंपरा 200 साल से भी अधिक समय से चली आ रही है, और ऐसी मान्यता है कि मां मंदर माई सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इस यात्रा में सिर पर ज्योत लेकर चल रही एक युवती ने बताया कि वह तीन वर्षों के लिए मन्नत लेकर शीतला मंदिर तक ज्योत ले जाती है। उसने कहा कि ज्योत लेकर चलने में उसे सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
धमतरी में मंदर माई की ज्योत जवारा शोभायात्रा:200 साल पुरानी परंपरा में 160 ज्योत प्रज्वलित, बारिश में हुआ विसर्जन

















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