छत्तीसगढ़ में अगले पांच दिनों तक कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर छत्तीसगढ़ में आज से बारिश की गतिविधि कम होने की संभावना है। इस बीच कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा इन 7 जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और आंधी चलने को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। पिछले 24 घंटे में रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। सबसे अधिक बारिश 5 मिमी छोटेडोंगर में हुई। वहीं, सबसे अधिक तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया है। अक्टूबर में अब-तक 109% ज्यादा बरसा पानी इस बार अक्टूबर माह में अब तक सामान्य से 109% अधिक बारिश दर्ज की गई है। आमतौर पर 8 अक्टूबर तक राज्य में औसतन 28.3 मिमी वर्षा होती है और मानसून लौट चुका होता है, लेकिन इस बार अब तक 59.1 मिमी से ज्यादा बारिश हो चुकी है। 15 अक्टूबर के बाद मानसून लौटने के आसार मौसम विभाग के मुताबिक, 30 सितंबर तक हुई बारिश को मानसून की बारिश माना जाता है, जबकि इसके बाद की बारिश को ‘पोस्ट मानसून’ यानी मानसून के बाद की बारिश माना जाता है। फिलहाल देश के कई हिस्सों से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है। छत्तीसगढ़ में आमतौर पर 5 अक्टूबर के आसपास सरगुजा की तरफ से मानसून लौटना शुरू होता है, लेकिन इस बार वापसी में देरी हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार प्रदेश में मानसून करीब 15 अक्टूबर के बाद लौटेगा, यानी सामान्य से करीब 10 दिन देरी से। बेमेतरा में सबसे कम बरसा पानी प्रदेश में अब तक 1167.4 मिमी औसत बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 524.5 मिमी पानी बरसा है, जो सामान्य से 50% कम है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, राजनांदगांव, रायगढ़ में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। जबकि बलरामपुर में 1520.9 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 52% ज्यादा है। ये आंकड़े 30 सितंबर तक के हैं। जानिए क्यों गिरती है बिजली बादलों में मौजूद पानी की बूंदें और बर्फ के कण हवा से रगड़ खाते हैं, जिससे उनमें बिजली जैसा चार्ज पैदा होता है। कुछ बादलों में पॉजिटिव और कुछ में नेगेटिव चार्ज जमा हो जाता है। जब ये विपरीत चार्ज वाले बादल आपस में टकराते हैं तो बिजली बनती है। आमतौर पर यह बिजली बादलों के भीतर ही रहती है, लेकिन कभी-कभी यह इतनी तेज होती है कि धरती तक पहुंच जाती है। बिजली को धरती तक पहुंचने के लिए कंडक्टर की जरूरत होती है। पेड़, पानी, बिजली के खंभे और धातु के सामान ऐसे कंडक्टर बनते हैं। अगर कोई व्यक्ति इनके पास या संपर्क में होता है तो वह बिजली की चपेट में आ सकता है।
उत्तरी छत्तीसगढ़ में आज से मानसूनी एक्टिविटी कम होगी:मध्य हिस्से में मौसम सामान्य रहेगा; बस्तर संभाग में बिजली गिरने और आंधी चलने का अलर्ट

















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