छत्तीसगढ़ के उत्तरी और मध्य हिस्सों से मानसून लगभग विदा हो चुका है। हालांकि, दक्षिण छत्तीसगढ़ में अगले दो दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने सुकमा, बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कोंडागांव और कांकेर जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और आंधी को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। इसी बीच, बलौदाबाजार के अमेठी गांव से एक वीडियो सामने आया, जिसमें महानदी पर बने एनीकट से करीब 2 फीट ऊपर बहते पानी के बीच एक मिनी ट्रक गुजरता दिखा। वाहन में करीब 30 से 40 लोग सवार थे। वीडियो 2-3 दिन पुराना है। जो अब वायरल हो रहा है। पिछले 24 घंटों में भैरमगढ़ में सबसे ज्यादा 40 मिमी बारिश दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस पेंड्रारोड में रिकॉर्ड किया गया। अक्टूबर में अब तक 109% ज्यादा बरसा पानी इस बार अक्टूबर में अब तक सामान्य से 109% अधिक बारिश दर्ज की गई है। आमतौर पर 8 अक्टूबर तक राज्य में औसतन 28.3 मिमी वर्षा होती है और मानसून लौट चुका होता है, लेकिन इस बार अब तक 59.1 मिमी से ज्यादा बारिश हो चुकी है। 10-12 दिन देरी से लौटा मानसून मौसम विभाग के मुताबिक, 30 सितंबर तक हुई बारिश को मानसून की बारिश माना जाता है, जबकि इसके बाद की बारिश को ‘पोस्ट मानसून’ यानी मानसून के बाद की बारिश माना जाता है। फिलहाल देश के कई हिस्सों से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है। छत्तीसगढ़ में आमतौर पर 5 अक्टूबर के आसपास सरगुजा की तरफ से मानसून लौटना शुरू होता है, लेकिन इस बार वापसी में देरी हुई। इस बार प्रदेश में मानसून सामान्य से करीब 10-12 दिन देरी से लौट रहा है। बलरामपुर में सामान्य से 52% ज्यादा बारिश प्रदेश में अब तक 1167.4 मिमी औसत बारिश हुई है। बेमेतरा जिले में अब तक 524.5 मिमी पानी बरसा है, जो सामान्य से 50% कम है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, राजनांदगांव, रायगढ़ में वर्षा सामान्य के आसपास हुई है। जबकि बलरामपुर में 1520.9 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 52% ज्यादा है। ये आंकड़े 30 सितंबर तक के हैं। जानिए क्यों गिरती है बिजली बादलों में मौजूद पानी की बूंदें और बर्फ के कण हवा से रगड़ खाते हैं, जिससे उनमें बिजली जैसा चार्ज पैदा होता है। कुछ बादलों में पॉजिटिव और कुछ में नेगेटिव चार्ज जमा हो जाता है। जब ये विपरीत चार्ज वाले बादल आपस में टकराते हैं तो बिजली बनती है। आमतौर पर यह बिजली बादलों के भीतर ही रहती है, लेकिन कभी-कभी यह इतनी तेज होती है कि धरती तक पहुंच जाती है। बिजली को धरती तक पहुंचने के लिए कंडक्टर की जरूरत होती है। पेड़, पानी, बिजली के खंभे और धातु के सामान ऐसे कंडक्टर बनते हैं। अगर कोई व्यक्ति इनके पास या संपर्क में होता है तो वह बिजली की चपेट में आ सकता है।
उत्तर-मध्य छत्तीसगढ़ से मानसून विदा:दक्षिणी हिस्से में दो दिन बारिश की चेतावनी; बलौदाबाजार में एनीकट के ऊपर बहते पानी के बीच गुजरा मिनी ट्रक

















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