मानसून सत्र:​RI परीक्षा: मूणत ने पूछा- एफआईआर क्यों नहीं? मंत्री बोले- ईओडब्ल्यू कर रही है जांच

मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष के विधायक के सवाल पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा घिर गए। मामला पटवारी से राजस्व निरीक्षक की विभागीय परीक्षा में अनियमितता से जुड़ा था। भाजपा के विधायक राजेश मूणत ने सवाल पूछा कि अब तक इस मामले में एफआईआर क्यों नहीं कराई गई? इस पर मंत्री टंकराम वर्मा ने जवाब दिया कि अभी ईओडब्ल्यू जांच कर रही है। इसी बीच विपक्ष ने भी वर्तमान सरकार का मुद्दा बताते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग कर दी। तब मंत्री ने कहा कि ईओडब्ल्यू जांच कर रही है। अगले सत्र से पहले कार्रवाई हो जाएगी। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष सदन से वॉकआउट कर गया। इधर, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में भर्ती में रोस्टर का पालन नहीं करने का मुद्दा उठाया। इस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि 10 विभागों में से 8 विभागों में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं। अभी जांच चल रही है। सदन के अंदर ऐसे चला सवाल- जवाब का दौर राजेश मूणत: राजस्व निरीक्षक की विभागीय परीक्षा में कितने अभ्यर्थी शामिल हुए? टंकराम: पूर्व मंत्री राजेश मूणत इस विषय में गंभीर हैं। उनकी चिंता सही है। स्पीकर: मंत्रीजी, गंभीर आपको होना है। टंकराम: परीक्षा की प्रक्रिया विधान सभा चुनाव से ठीक 2-3 महीने पहले शुरू हुई। परिणाम फरवरी, 2024 में आए। परिणाम आने के बाद शिकायतों का दौर चला। हमने सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर 5 सदस्यीय टीम बनाई। जांच में अनियमितता का मामला सामने आया। जैसे, भाई-भाई या रिश्तेदार एक जगह बैठे हैं। हमारा विभाग इतनी गहराई तक जांच करने में सक्षम नहीं है, इसलिए हमने गृह विभाग को पत्र लिखा। गृह विभाग ने अपने पत्र में लिखा कि विभाग सक्षम है, इसलिए वह एफआईआर करे और इसकी जांच कराए। कॉल डिटेल निकालना, वाट्सएप ग्रुप के मैसेज व मोबाइल का लोकेशन निकालना संभव नहीं था। इसलिए इस मामले को फिर से ईओडब्ल्यू को दिया गया है और ईओडब्ल्यू ने इस मामले में जांच शुरू कर दिया है। मूणत: गृह विभाग ने कहा कि विभाग कार्रवाई करने में सक्षम है। इसके बाद भी विभागीय कार्रवाई न करके आपने ईओडब्ल्यू को भेजा है। जांच के कितने बिंदू हैं, आपने कब भेजा है और उसमें क्या-क्या शर्तें हैं। टंकराम: कमेटी ने जांच रिपोर्ट में लिखा है कि शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज साक्ष्य की श्रेणी में नहीं आते हैं। जांच कमेटी ने स्वीकार किया है कि गड़बड़ी हुई है। लेकिन वास्तव में परीक्षा संचालन में जो दोषी हैं, वहां तक पहुंचने के लिए हमारी कमेटी सक्षम नहीं है इसलिए ईओडब्ल्यू को जांच के लिए दिया गया है। मूणत: एफआईआर क्यों नहीं कराई गई? जबकि यह पूर्व सरकार के कार्यकाल का मामला है। संगीता सिन्हा: यह आपके शासनकाल का मामला है। टंकराम : परीक्षा में गड़बड़ी के लिए जो भी दोषी हैं, उस पर ठोस कार्रवाई होगी। मूणत: आप ईओडब्ल्यू से जांच कराकर अगले सत्र के पहले दोषियों के ऊपर कार्रवाई कर देंगे, इसका आश्वासन चाहता हूं। टंकराम: हमारे विभाग से ईओडब्ल्यू 41 बिन्दुओं में जानकारी और पूछताछ के लिए अनुमति ले चुका है। इसमें यथाशीघ्र जांच होगी। अगले सत्र के पहले इसमें कार्रवाई होगी। अजय चंद्राकर: एफआईआर क्यों नहीं कराई गई। दूसरा, ईओडब्ल्यू से जांच कराने का निर्णय किसने लिया है? टंकराम: भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करते हुए विभाग ने जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी। भूपेश बघेल: भ्रष्टाचारियों को बचाने की कोशिश हो रही है। क्या मंत्री जी इसकी सीबीआई जांच कराएंगे? केदार: क्या आपको सीबीआई जांच पर विश्वास है। भूपेश: सीबीआई जांच कराना होगा। मंत्री जी उत्तर नहीं दे पा रहे हैं। हम उनके उत्तर से असंतुष्ट हैं। इसलिए हम सदन से वॉकआउट करते हैं।

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