नक्सलियों ने बदला ट्रेंड…:शांति वार्ता और सरेंडर के समर्थन-विरोध में अब तक 4 पर्चे

मिशन 2026 शुरू होने के बाद से नक्सलियों के अलग-अलग धड़ों, संगठन इंचार्ज पत्र जारी कर रहे हैं। नक्सलियों की ओर से जारी इन पत्रों को लेकर संशय बना हुआ है। दरअसल, जब मिशन 2026 की शुरुआत हुई तो एक के बाद एक 6 पत्र नक्सलियों के अलग-अलग कैडर और विंग प्रमुखों ने जारी किए। इन पत्रों में सरकार से शांतिवार्ता करने की इच्छा नक्सलियों की ओर से जताई गई है। सरकार की ओर से शांतिवार्ता वाले पत्रों पर कार्रवाई नहीं हुई तो अब नक्सलियों ने ट्रेंड बदल दिया है और पिछले दिनों से नक्सलियों की ओर से आत्मसमर्पण और हथियार छोड़ने वाले पत्र जारी हो रहे हैं। पिछले 10 दिनों में ही एक के बाद एक चार ऐसे पत्र जारी हुए हैं, जिनमें कुछ ने हथियार छोड़ने और कुछ ने हथियार न छोड़ने वाले पत्र जारी किए हैं। लेकिन, दोनों ही पत्रों के बाद नक्सलियों की ओर से जारी बयानों पर ठोस पहल होती नहीं दिख रही है। शांतिवार्ता और सरेंडर वाले हर पत्र के अंत में नक्सली सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह पहले बस्तर में चल रहे फोर्स के अभियानों को बंद करें। सोनू ने बदला ट्रेंड, सबसे पहले आत्मसमर्पण वाला पर्चा जारी किया
नक्सलियों के शांतिवार्ता वाले पत्रों के ट्रेंड को नक्सलियों के पोलित ब्यूरो सदस्य और कुख्यात नक्सली सोनू ने शुरू किया है। सोनू ने सबसे पहले वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आत्मसमर्पण करने हथियार डालने और फिर आम जनता के साथ मिलकर उनकी समस्याओं के लिए आवाज उठाने वाला पर्चा जारी किया। इसके बाद सोनू के पत्र के समर्थन में एक के बाद एक दो पत्र जारी हुए इस बीच सोनू के विरोध में भी पर्चा जारी हुआ। अब मंगलवार को फिर एक पर्चा सोनू के बयान के समर्थन में जारी हो गया है। पत्र तारीख दर तारीख ये पुरानी रणनीति: नक्सली जब बैकफुट पर होते हैं तभी करते हैं वार्ता की पहल भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. गिरीशकांत पांडेय, नक्सल मामलों के जानकार नक्सलियों की पुरानी रणनीति रही है कि जब भी वह बैकफुट पर होते हैं, तब वे शांतिवार्ता की बातें करते हैं। अभी शांतिवार्ता के साथ सरेंडर वाले पत्र भी आ रहे हैं। नक्सली ऐसा समय गेन करने के लिए करते हैं। वे जब भी बैकफुट पर होते हैं तब वे प्रोपेगंडा वारफेयर का उपयोग कर समय लेते हैं और फिर बड़े हमले या बड़ी ताकत से वापसी करते हैं। दो-चार नक्सली मिलकर हथियार छोड़ने का फैसला नहीं ले सकते हैं। सामूहिक आत्मसमर्पण का निर्णय सीसी मेंबर या नए महासचिव को लेना है। यह तब संभव होगा, जब नक्सली आपस में बैठक कर पाएंगे। निर्णय लेने वाले लोगों का ही अभी आपस में संपर्क नहीं है और इनके बीच कोई संवाद नहीं है। यही कारण है कि झारखंड, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ में नक्सली कैडर अलग-अलग दिशा में चल रहे हैं। एक और पर्चा जारी… सशस्त्र संघर्ष छोड़ने के समर्थन में माड़ डिवीजन नक्सलियों की ओर से लगातार जारी शांतिवार्ता के प्रस्तावों के बीच माड़ डिवीजन ने भी सशस्त्र संघर्ष छोड़ने का समर्थन किया है। डिवीजन की सचिव राणीता के हवाले जारी पर्चे में कहा गया है कि पोलित ब्यूरो मेंबर सोनू के सशस्त्र संघर्ष छोड़ने के फैसले से वे सहमत हैं। अप्रैल-मई महीने में संगठन के तत्कालीन महासचिव बसवा राजू और पोलित ब्यूरो प्रभारी की ओर से किए गए शांति वार्ता के प्रयासों का भी उन्होंने समर्थन किया था। इसके साथ ये भी लिखा है कि फोर्स 15 अक्टूबर तक ऑपरेशन बंद करे। नक्सल खात्मे की डेडलाइन के बीच लगातार कार्रवाई नक्सलियों की मांग 15 अक्टूबर तक फोर्स ऑपरेशन को बंद करे

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