एनडीआरएफ टीम ने बारिश से हुए नुकसान पर दी रिपोर्ट:अधिक बारिश बेअसर… बेमेतरा को छोड़कर 32 जिलों में ‘बंपर’ होगा धान

प्रदेश में इस बार धान और सब्जियों का उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है। मंत्रालय तक जिलों से पहुंची रिपोर्ट के अनुसार, 33 में से केवल बेमेतरा जिला ऐसा है जहां औसत से 40% कम बारिश हुई। इससे किसान चिंतित हैं। दूसरी ओर, बस्तर संभाग के चार जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा में अधिक वर्षा के बावजूद फसलों को कम नुकसान की संभावना जताई गई है। केंद्रीय मंत्रालय की एनडीआरएफ टीम ने इन जिलों का दौरा कर रिपोर्ट केंद्र को भेज दी है। धान खरीदी के लिए तैयारियां शुरू: इस वर्ष ई-केवाईसी के ज़रिए एग्रीस्टेक पोर्टल (https://agristech.gov.in/) पर किसानों का पंजीयन 31 अक्टूबर तक निशुल्क किया जा सकेगा। डिजिटल सर्वे से धान का रकबा तय डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत 23 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई का ऑनलाइन निर्धारण किया गया है। 20 हजार गाँवों में 2 अक्टूबर से मैन्युअल गिरदावरी के डेटा का ग्रामसभा में वाचन जारी है। सूत्रों के मुताबिक, 33% या अधिक नुकसान को ही सूखा या अतिवर्षा माना जाता है। अब सूखा घोषित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। 2017 के बाद से प्रदेश में किसी क्षेत्र को सूखा घोषित नहीं किया गया है। जानकारों का कहना है कि धान की कटाई के बाद ही अंतिम रिपोर्ट आएगी, पर अब तक के कैलकुलेशन से स्पष्ट है कि प्रदेश में अच्छा उत्पादन होगा। यदि किसी क्षेत्र में विपरीत परिस्थिति बनी भी, तो राज्य और केंद्र दोनों में एक ही पार्टी की सरकार होने से राहत में कोई दिक्कत नहीं आएगी। एक्सपर्ट व्यू पौधों की नई वैरायटी को नुकसान कम कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस बार बारिश का पैटर्न धान की फसल के अनुकूल रहा है। बेमेतरा को छोड़ बाकी जिलों में फसलें सुरक्षित हैं। 5-6 अक्टूबर की वर्षा ने मध्यम अवधि के धान को सहारा दिया। विशेषज्ञों ने बताया कि अब किसान स्वर्णा वैरायटी जैसे बौने और लांग टर्म पौधे लगा रहे हैं, जिनमें गिरने या पानी से नुकसान की संभावना कम होती है। इससे इस साल धान का बंपर उत्पादन तय माना जा रहा है।

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