नीम पत्ती-लहसुन-अदरक से बना रहे नीमास्त्र:​​​​​​​खुद बना रहे जैविक खाद-दवा, बीज जनित रोगों से बचाने और बेहतर अंकुरण के लिए बीजामृत का उपयोग

प्राकृतिक चीजों और देशी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए नवाचारों के साथ जैविक खेती की जाए तो न सिर्फ कम लागत पर अच्छी उपज हासिल की जा सकती है, बल्कि खेत की उर्वरा शक्ति भी लगातार बढ़ाई जा सकती है। कवर्धा के ग्राम खैरझिटी पुराना के किसान बेदराम जायसवाल ने ऐसा ही उदाहरण पेश कर किसानों को सही राह दिखाई है। किसान बेदराम ने बताया, पहले पुराने तरीके से ही खेती करता था, जिसमें खास बचत नहीं होती थी। फिर कृषि विज्ञान केन्द्र पर संपर्क कर प्राकृतिक खेती, आधुनिक खेती के बारे में प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद मैंने रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती को तो अपनाया ही, अपने अनुभव के आधार पर नवाचार भी करता रहा। किसान बेदराम ने बताया कि रासायनिक खेती से जहां जमीन सख्त हो जाती थी, प्राकृतिक खेती से वह मुलायम और जीवंत होने लगी। मिट्टी की संरचना बेहतर होने लगी। वर्तमान में धान, गन्ना, चना और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलें इसी विधि से उगा रहा हूं। किसान बेदराम ने बताया कि रासायनिक खाद और कीटनाशक के बजाय गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन, जंगल की मिट्टी और पत्तियों से तैयार देशी घोल का उपयोग करता हूं। प्राकृतिक खेती में शुरू में उत्पादन थोड़ा कम होता है लेकिन दो-तीन साल में मिट्‌टी की सेहत बेहतर होने के साथ फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में वृद्धि होने लगती है। खेत की मिट्टी नरम रहती है, कीटों का प्रकोप घटता है और फसलें ज्यादा समय तक टिकाऊ होती हैं। किसान बेदराम ने बताया, रासायनिक खाद और कीटनाशक की जगह देसी तरीके से बनाया गया बीजामृत, घन जीवामृत, नीमास्त्र और बायो एंजाइम का उपयोग कर रहा हूं। बीजामृत से बीज जनित रोगों से बचाव होता है और अंकुरण मजबूत होता है। घन जीवामृत मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाकर उसे उपजाऊ बनाता है। नीमास्त्र एक प्राकृतिक कीटनाशक है, जो फसलों को कीटों से सुरक्षित रखता है। इसमें नीम की पत्तियां, लहसुन, अदरक और गोमूत्र का मिश्रण होता है। बायो एंजाइम पौधों के विकास को बढ़ावा देने और मिट्टी की संरचना सुधारने में सहायक है। किसान जायसवाल ने बताया कि अब हमारे जिले ही नहीं बल्कि अन्य जिलों से भी बहुत से किसान मेरे खेत पर आते हैं और मुझसे खेती की तकनीकों के बारे में जानकारी लेते हैं।

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