जर्जर स्कूलों की मरम्मत में लापरवाही:29 ठेकेदारों को नोटिस, 2 का ठेका रद्द; 7 दिन में अधूरा काम शुरू नहीं करने पर राशि भी होगी जब्त

मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत जर्जर स्कूलों की मरम्मत की जिम्मेदारी आरईएस यानी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग को दी गई थी। विभाग पिछले तीन साल से काम करा रहा है। वर्तमान में 29 जगहों पर ठेकेदारों ने काम अधूरा छोड़ दिया है। कई बार पत्राचार करने के बावजूद अतिरिक्त भवन निर्माण और मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ। कार्यपालन यंत्री ने 29 ठेकेदारों को अंतिम नोटिस जारी कर 7 दिन के भीतर अधूरा काम शुरू करने का निर्देश दिया है। समय पर काम न शुरू करने पर ठेका निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। वहीं, मरम्मत का काम अधूरा छोड़ने वाले दो ठेकेदारों की राशि जब्त कर ली गई है। 29 ठेकेदारों की कुल राशि लगभग 1 करोड़ रुपए है। मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत जर्जर स्कूलों की मरम्मत का काम धीमी रफ्तार से चल रहा है। तत्कालीन सरकार ने मरम्मत का काम 5 महीने और अतिरिक्त कक्ष का निर्माण एक साल में पूरा करने का आदेश दिया था। लेकिन तीन साल बाद भी दोनों काम पूरे नहीं हो पाए हैं। 761 स्कूलों में से 29 स्कूलों का निर्माण कार्य 6 महीने से अधूरा पड़ा है। इनमें अतिरिक्त कक्ष का काम 20 और मरम्मत का काम 9 जगहों पर अटका है। दोनों कार्य 29 अलग-अलग ठेकेदारों को दिए गए थे। पिछले 5 महीने से काम की गति बेहद धीमी है। काम शुरू कराने के लिए कई बार पत्र लिखा गया। आश्वासन देने के बावजूद ठेकेदार काम शुरू नहीं कर रहे। आरईएस के कार्यपालन यंत्री सुरेश बांधे ने बताया कि 29 ठेकेदारों के पास लगभग 1 करोड़ रुपए का काम है। सभी को अंतिम चेतावनी दी गई है। अगर 7 दिन के भीतर काम शुरू नहीं हुआ, तो ठेका निरस्त कर काम दूसरे को दे दिया जाएगा। दो ठेकेदारों का कार्य निरस्त आरईएस द्वारा कराए जा रहे अतिरिक्त भवन का काम लंबे समय से अधूरा था। 33 लाख रुपए का काम एक साल बाद भी पूरा नहीं करने पर वपन इंटरप्राइजेस का ठेका निरस्त कर दिया गया। यह काम मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के उनी और कुकदा गांव में चल रहा था। उनके पास बची 17 लाख रुपए की राशि जब्त कर ली गई है। अब इसे पूरा करने नए टेंडर निकाले जाएंगे। मरम्मत के बाद उखड़ने लगा प्लास्टर जिले में आरईएस द्वारा कराए गए मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। जिले के 78 स्कूलों में सही मरम्मत नहीं होने से प्लास्टर उखड़ने लगा। तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने ऐसे सभी स्कूलों की दोबारा मरम्मत कराने के आदेश दिए थे। आरईएस के कार्यपालन यंत्री सुरेश बांधे का कहना है कि सभी स्कूलों में सुधार कर लिया गया है। 302 स्कूल गिराने योग्य पाए गए हैं तीन साल पुराने जर्जर स्कूलों की मरम्मत अब तक पूरी नहीं हुई है। वहीं, शासन के आदेश पर स्कूल शिक्षा विभाग ने फिर से सूची मंगाई, जिसमें 731 स्कूल सामने आए। इनमें 302 स्कूल गिराने योग्य और 429 स्कूल मरम्मत योग्य हैं। डीईओ विजय टांडे का कहना है कि जर्जर भवनों में बच्चों को बैठने की अनुमति नहीं है। सभी बीईओ को आदेश दिया गया है कि ऐसे भवनों में कक्षाएं न लगाई जाएं। सिर्फ प्रस्ताव ही भेजे जा रहे. जर्जर भवन यथावत जिले में 302 स्कूल भवन 20–25 साल पुराने हैं। इन्हें गिराने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग हर साल कलेक्टर को प्रस्ताव देता है और शासन को भेजा जाता है। इसके बावजूद भवन अब तक नहीं गिरे। जर्जर भवन उसी परिसर में खड़े हैं, जहां बच्चे दूसरे भवन में पढ़ाई करते हैं। बच्चे इन भवनों के पास खेलते रहते हैं, जिससे किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। स्कूलों की छत और अतिरिक्त कक्ष का निर्माण लंबे समय से अधूरा है। 29 ठेकेदारों को नोटिस जारी कर 7 दिन में काम शुरू करने का निर्देश दिया गया है। तय समय पर काम नहीं शुरू करने वालों की राशि जब्त की जाएगी। राशि लगभग 1 करोड़ है। – सुरेश बांधे, कार्यपालन यंत्री, आरईएस

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