छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजी पीएससी) की गड़बड़ी में सीबीआई ने सोमवार को रिटायर्ड आईएएस जीवन किशोर ध्रुव, उनके बेटे सुमित, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, टामन की बहू निशा कोसले, दीपा आदिल के खिलाफ 2000 पन्नों की चार्जशीट पेश की। सीबीआई की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पीएससी के तत्कालीन चेयरमैन और रिटायर्ड आईएएस टामन सिंह सोनवानी का भतीजा नीतेश सोनवानी और बहू निशा कोसले मुख्य इंटरव्यू में शामिल ही नहीं हुए थे। इसके बावजूद दोनों का चयन कर लिया गया। वजह यह कि नीतेश टामन का दत्तक पुत्र है। इंटरव्यू में खुद टामन बैठे थे। रिश्तेदारी का मामला उठने के बाद पति-पत्नी इंटरव्यू देने पहुंचे ही नहीं, फिर भी चयन सूची में दोनों के नाम आ गए। यह खुलासा पीएससी के दस्तावेजों से हुआ है। रिश्तेदारी छिपाने फार्म में नहीं लिखा पति का नाम टामन के भाई की बहू दीपा आदिल का चयन आबकारी अधिकारी के तौर पर हुआ। दीपा के दस्तावेज में भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दीपा ने पीएससी के फार्म में पति का नाम ही नहीं लिखा और कॉलम खाली छोड़ दिया। जबकि शादी हुई है या नहीं वाले कॉलम में हां लिखा है और शादी की तारीख 7 मई 2008 भी दर्ज है। दीपा, टामन के बड़े भाई स्व. दीमान सिंह की बहू हैं। सीबीआई के अनुसार, परीक्षा से पहले दीपा, निशा, साहिल और नीतेश को टामन ने प्री और मेन्स का पेपर उपलब्ध कराया था। चारों ने मिलकर तैयारी की और चयन पहले से तय था। टामन के भतीजे विनीत और श्वेता के चैट में इसका खुलासा हुआ है। दोनों चयन को लेकर चर्चा कर रहे थे। चैट मिलने के बाद सीबीआई ने दोनों के बयान दर्ज किए। स्ट्रॉन्ग रूम में नहीं रखा पर्चा
आरती ने 2020 में दो सेट में पीएससी मुख्य परीक्षा का पेपर तैयार कराया था। एक सेट से परीक्षा आयोजित हुई। दूसरा सेट स्ट्रॉन्ग रूम में रखने की बात कही गई थी, लेकिन उसकी कहीं भी एंट्री नहीं है। यह पेपर आरती के पास ही रखा रहा और इसी पेपर से 2021 की मुख्य परीक्षा आयोजित कराई गई। इसके लिए अलग से नया पेपर तैयार नहीं किया गया। अन्य परीक्षाओं में भी गड़बड़ी
सीबीआई की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि टामन ने अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी गड़बड़ी की। कुछ लोगों की भर्ती वन विभाग और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर कराई गई। जिन्होंने पेपर सेट नहीं किया, उनका नाम दर्ज आरती के पास से सीबीआई ने एक रजिस्टर जब्त किया है। इसमें पेपर सेट करने वाले मॉडरेटर का नाम दर्ज है। इनमें प्रो. डॉ. बीपी यादव, प्रो. जेएल भारद्वाज, ज्ञानेंद्र शुक्ला, डॉ. सीमा खान, डॉ. नीरज झा और डॉ. आरएल दवे के नाम हैं। इन्होंने पीएससी का पेपर बनाकर दिया था। सीबीआई ने सभी के बयान लिए हैं। डॉ. नीरज ने पेपर-7 सेट करने से इनकार किया। पीएससी सचिव को 2021 की परीक्षा का पेपर 2020 में ही दे दिया
टामन सिंह और आरती वासनिक ने पीएससी मुख्य परीक्षा 2021 का पेपर एक साल पहले यानी 2020 में ही पीएससी सचिव जीवन किशोर ध्रुव को दे दिया था। इस पेपर से ध्रुव का बेटा सुमित ध्रुव लगातार अभ्यास करता रहा। यह खुलासा सीबीआई की 15 जुलाई 2024 की छापेमारी में हुआ। सीबीआई ने जीवन किशोर ध्रुव के घर से प्रश्नपत्र और उत्तर की कॉपी बरामद की। पेपर-2 और पेपर-7 पहले से सुमित के पास थे। इनमें 47 में से 42 प्रश्न उसे उपलब्ध कराए गए थे। पेपर-2 में क्रिप्टोकरेंसी, टोनही प्रथा और दंतेवाड़ा पर निबंध लिखना था, जिसका सुमित एक साल से अभ्यास कर रहा था। उसके घर से अन्य सबूत भी मिले हैं।
सीजी पीएससी गड़बड़ी:पूर्व चेयरमैन का भतीजा नीतेश और बहू निशा बिना इंटरव्यू दिए ही बन गए डिप्टी कलेक्टर

















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