छत्तीसगढ़ में 2028 की तैयारी, वोटर लिस्ट की घर-घर जांच:पिछले चुनावों में आरोपों के बाद बढ़ी निगरानी; फर्जी और डुप्लीकेट नाम हटाए जाएंगे

छत्तीसगढ़ में अब वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू होने जा रहा है। इसे लेकर राज्य चुनाव आयोग ने निर्देश जारी कर दिए हैं। यह वही प्रक्रिया है जो हाल ही में बिहार में लागू हुई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देश के जिन 12 राज्यों में SIR कराने का ऐलान किया। उनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है। इस बार प्रदेश की सभी 90 विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट की गहनता से जांच होगी। हर वोटर को फिर से वेरिफाई किया जाएगा ताकि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची पूरी तरह अपडेट और त्रुटिरहित हो। वहीं चुनाव आयोग की इस पहल का सीएम साय ने भी समर्थन व्यक्त किया है। 2028 की तैयारी का पहला कदम चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि यह रिवीजन भविष्य के चुनावों की नींव है। दरअसल, 2028 में विधानसभा और 2029 में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इस प्रक्रिया को ‘प्री-इलेक्शन क्लीनिंग ड्राइव’ माना जा रहा है। इस दौरान मतदाता सूची में नए वोटर जोड़े जाएंगे, गलतियों को सुधारा जाएगा, और डुप्लीकेट या मृत वोटरों के नाम हटाए जाएंगे। रात 12 बजे लिस्ट फ्रीज की गई सोमवार रात 12 बजे से राज्य की वोटर लिस्ट फ्रीज कर दी गई है। इसके बाद अब किसी भी तरह का जोड़ या सुधार केवल SIR के जरिए ही किया जा सकेगा। बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) आज (मंगलवार) से घर-घर जाकर फॉर्म 6, 7, 8 और 8A वितरित करेंगे। हर BLO एक घर में तीन बार विजिट करेगा, ताकि कोई योग्य मतदाता छूटे नहीं। 2028 की तैयारी, लेकिन पिछले चुनाव में लगे आरोप बड़ी वजह SIR का सीधा संबंध अगले विधानसभा चुनाव से तो है, लेकिन इसके पीछे की असली वजह अब तक हुए पिछले विधानसभा चुनावों में लगे गंभीर आरोप से हैं। इस पूरे विवाद से पहले राहुल गांधी भी ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठा चुके हैं। उन्होंने 31 मिनट का प्रजेंटेशन देकर ये बताया था कि महाराष्ट्र, हरियाणा, यूपी और कर्नाटक में लाखों वोटर्स के नाम गायब कर दिए गए। राहुल ने दावा किया कि चुनाव आयोग जानबूझकर कांग्रेस के वोटर्स के नाम लिस्ट से डिलीट कर रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया था कि वो उन लोगों की रक्षा कर रहे हैं जिन्होंने लोकतंत्र को कमजोर किया है। चुनाव आयोग ने राहुल के आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि देशभर में मतदाता सूची पारदर्शी प्रक्रिया से अपडेट की जा रही है। बीजेपी विधायकों के 2-2 वोटर लिस्ट में नाम कांग्रेस ने बीजेपी नेताओं पर दो-दो विधानसभा क्षेत्रों में नाम दर्ज कराने के आरोप लगाए हैं। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने दस्तावेज जारी करते हुए कहा था कि ‘राजेश मूणत का नाम रायपुर पश्चिम और रायपुर उत्तर दोनों जगह दर्ज है, जबकि बसना विधायक संपत अग्रवाल का नाम बसना और रायपुर दक्षिण दोनों वोटर लिस्ट में है।’ कांग्रेस ने यह भी दावा किया था कि दोनों विधायकों के पास दो EPIC नंबर हैं, उम्र अलग-अलग दर्ज है और कुछ जगहों पर फोटो भी नहीं हैं। पार्टी का कहना था कि करीब 18 विधानसभा सीटों पर इस तरह की डबल एंट्री के मामले सामने आए हैं। इन्हीं विवादों और आरोपों के बाद अब चुनाव आयोग मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करा रहा है। आयोग के मुताबिक, इस प्रक्रिया में नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे, गलतियों को सुधारा जाएगा और डुप्लीकेट या गैर-मान्य नामों को हटाया जाएगा। छत्तीसगढ़ में भी विवादों में रही वोटर लिस्ट कांग्रेस ने देशभर में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान चलाया था। राज्य में भी पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया था कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और डबल एंट्री की गई। वहीं, बीजेपी ने भी कांग्रेस पर फर्जी वोट जोड़ने के आरोप लगाए थे। अब चुनाव आयोग का यह स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) उन्हीं आरोपों के आधार पर कराया जा रहा है। आयोग का मकसद वोटर लिस्ट को पूरी तरह अपडेट करना और जिन क्षेत्रों में गड़बड़ियों की शिकायतें मिली थीं, वहां की मतदाता सूची को सत्यापित और शुद्ध करना है। राज्य के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कुछ महीने पहले दावा किया था कि 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान कवर्धा विधानसभा क्षेत्र में फर्जी नाम जोड़े गए थे। उन्होंने कहा था कि यह काम पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर के इशारे पर हुआ। शर्मा ने उदाहरण देते हुए कहा था। ‘कवर्धा में 75 साल के रियाज हुसैन ने फॉर्म-6 भरकर अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाया, सिर्फ वहां वोट डालने के लिए। चुनाव परिणाम आने के बाद उसने फॉर्म-8 भरकर अपना नाम रायपुर पश्चिम विधानसभा में शिफ्ट कर लिया।’ विजय शर्मा ने कहा था कि इसी तरह रमीज कुट्टी नाम के व्यक्ति ने कवर्धा में खुद को निवासी बताकर फॉर्म-6 भरा, जबकि उसके पासपोर्ट में पता रायपुर का दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे 5 से 7 लोगों की लिस्ट उनके पास है जिनके नाम गलत तरीके से जोड़े गए। मोहम्मद अकबर ने इन आरोपों को ‘झूठा और राजनीतिक’ बताया। अब जानिए कि SIR क्या है चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इससे वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। इसमें 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है। जो शिफ्ट हो चुके हैं उनके नाम हटाए जाते हैं। वोटर लिस्ट में नाम, पते में हुई गलतियों को भी ठीक किया जाता है। BLO घर-घर जाकर खुद फॉर्म भरवाते हैं। 1. मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन क्यों किया जा रहा है? चुनाव आयोग अब तक आठ बार एसआईआर करवा चुका है। पिछली बार 2003-04 में एसआईआर हुआ था। औसतन 22 साल में एक बार वोटर लिस्ट का एसआईआर किया जाता है। एसआईआर में वोटर लिस्ट में शामिल हर व्यक्ति की गहनता से जांच की जाती है, कोई गलत व्यक्ति तो वोटर नहीं हे। एक से ज्यादा जगह नाम तो नहीं है। 2003-04 की लिस्ट से मिलान किया जाएगा कि आपके परिवार के लोग उस वक्त कहां थे। जिनके नाम नहीं होंगे, मिलान नहीं होंगे, उन्हें नोटिस देकर दस्तावेज मांगे जाएंगे। बिहार के एसआईआर वाले 11 दस्तावेज ही राजस्थान में मान्य होंगे। 2. क्या नई व्यवस्था में ऐसे लोग जो नए वोटर बनना चाहते हैं या दूसरे राज्य से शिफ्ट होकर आए हैं, उन्हें डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा? 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे हैं, तो खुद का जन्म प्रमाण देना होगा। 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे हैं, तो माता-पिता के जन्म या नागरिकता के दस्तावेज भी दिखाने होंगे। 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे लोगों के लिए शर्त और कड़ी है। उन्हें यह साबित करना होगा कि माता-पिता में कम-से-कम एक भारतीय नागरिक हैं और दूसरा गैर-कानूनी प्रवासी नहीं है। यानी उन्हें भी अपने पेरेंट्स के दस्तावेज दिखाने होंगे। 3. क्या डॉक्यूमेंट मांगे जाएंगे? मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा- एन्यूमरेशन फेज में कोई दस्तावेज नहीं देने होंगे। पहले फेज में कोई दस्तावेज नहीं देने होंगे। बीएलओ घर-घर जाकर फॅार्म बाटेंगे, फिर मिलान होगा। जिनके दस्तावेज का मिलान नहीं होगा, उनसे दस्तावेज मांगे जाएंगे। 4. वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या बरकरार रखने को किस उम्र के लोगों को कौनसा प्रमाण देना होगा? 1 जनवरी 2025 के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 2.11 करोड़ वोटर्स छत्तीसगढ़ पंचायत चुनाव में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने 1 जनवरी 2025 की तिथि में प्रदेश में मतदाताओं की कुल संख्या 2 करोड़ 11 लाख 5 हजार 391 बताई थी। इनमें 1 करोड़ 4 लाख 27 हजार 842 पुरुष मतदाता, एक करोड़ 6 लाख 76 हजार 821 महिला मतदाता और 728 तृतीय जेंडर मतदाता शामिल हैं। राज्य में निर्वाचकों का लिंगानुपात 1024 है। टेबल टॉप एक्सरसाइज हो चुकी छत्तीसगढ़ में राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि, SIR को लेकर छत्तीसगढ़ में टेबल टॉप एक्सरसाइज (पुरानी और वर्तमान लिस्ट का मिलान) हो चुकी है। निर्वाचन आयोग से आदेश आते ही इसे राज्य के सभी जिलों में एक साथ लागू किया जाएगा। राज्य के अधिकारियों ने सर्वे को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया, 21 साल पहले किया गया था आखिरी SIR मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि देश में 21 साल पहले आखिरी विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया था। उन्होंने बताया कि SIR में सभी योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाएगा और अयोग्य मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर किया जाएगा। सीईसी ने आगे कहा कि चुनावों से पहले SIR किया जाना सबसे ज्यादा जरूरी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा- बिहार में SIR कामयाब रहा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि नतीजा सबके सामने है। बिहार में SIR कामयाब रहा। दूसरे फेज में 12 राज्यों और UT की वोटर लिस्ट अपडेट करेंगे। आयोग का दावा है कि, उनका पूरा ध्यान केरल, तमिलनाडु, प. बंगाल, असम और पुडुचेरी पर है, जहां मई 2026 तक चुनाव होने हैं।

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